ईरान का छिपा प्रहार, ट्रंप के दावों से कहीं अधिक गहरा नुकसान झेल रहा अमेरिका

ईरानी सैटेलाइट चित्रों के विश्लेषण से खुलासा हुआ है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के 15 सैन्य ठिकानों पर 228 संरचनाएं और उपकरण नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह नुकसान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा स्वीकार किए गए आंकड़ों से कहीं अधिक है, जो ईरान की सटीकता और क्षमता को रेखांकित करता है।

ट्रंप प्रशासन के दावों पर सवाल

फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े मुख्यालय और कुवैत के प्रमुख अड्डों को भारी क्षति पहुंची। रिपोर्ट बताती है कि हैंगर, रडार, संचार केंद्र और एक ई-3 सेंट्री कमांड एयरक्राफ्ट जैसे महत्वपूर्ण उपकरण तबाह हुए। अमेरिकी सरकार ने नुकसान को कमतर बताकर जीत के दावे किए थे, लेकिन वास्तविकता में कम से कम 7 सैनिक मारे गए और 400 से अधिक घायल हुए। सीएसआईएस रिपोर्ट के अनुसार, कुल नुकसान 80 करोड़ डॉलर से अधिक का है, जिसमें अधिकांश प्रहार युद्ध के पहले सप्ताह में हुए। विशेषज्ञ मार्क कैंसियन का कहना है कि क्षेत्रीय ठिकानों की क्षति का आकलन पहले कम किया गया था।

राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप से सवाल किया कि उन्होंने एकतरफा युद्ध में देश को धकेल दिया। सीनेटर चक शूमर ने कहा, “राष्ट्रपति को जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।” इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी कार्रवाई की प्रशंसा की। रूस और चीन ने अमेरिका-इजरायल हमलों की कड़ी निंदा की, इसे “बिना उकसावे की आक्रामकता” करार दिया। भारत ने शांति की अपील की, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरानी हमलों की भर्त्सना की लेकिन सैन्य कार्रवाई से इनकार किया। ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने अमेरिका का समर्थन किया।

जनता की प्रतिक्रियाएं: सोशल मीडिया पर आक्रोश

सोशल मीडिया पर अमेरिकी नागरिक नुकसान के आंकड़ों से स्तब्ध हैं, कई ट्रंप की “छिपी सच्चाई” पर सवाल उठा रहे हैं। खाड़ी देशों में सहयोगी राष्ट्रों की जनता चिंतित है कि वे अनचाहे संघर्ष में फंस गए। ईरानी जनता इसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक मान रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर शांति मार्च और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

रणनीतिक प्रभाव और भविष्य

यह खुलासा अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता पर सवाल उठाता है, खासकर रूस की खुफिया सहायता से ईरान के सटीक हमलों के बाद। ट्रंप अब युद्ध समाप्ति की बात कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए खतरा है।

यह भी पढ़ें: नोएडा एयरपोर्ट से उड़ानों का इंतजार हुआ खत्म, इंडिगो पहली एयरलाइन जिसने शुरू की टिकटों की बिक्री

यहां से शेयर करें