इंदिरापुरम की हाई-राइज सोसाइटी में भीषण आग: गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित अभय खंड-2 में गौर ग्रीन एवेन्यू (Gaur Green Avenue) सोसाइटी के एक हाई-राइज टावर (मुख्यतः D ब्लॉक) में बुधवार सुबह करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच भीषण आग लग गई। आग शुरू में 9वीं मंजिल के एक फ्लैट से शुरू हुई और तेजी से ऊपर की ओर फैलते हुए 13वीं मंजिल तक पहुंच गई। इस हादसे में 8 से 14 फ्लैट पूरी तरह या आंशिक रूप से जलकर राख हो गए, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
सौभाग्य से इस घटना में किसी की जान नहीं गई। फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से सभी फंसे हुए निवासियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। चीफ फायर ऑफिसर राहुल पाल ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए 15 से 17 फायर टेंडर्स को लगाया गया। टीम ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, विशेष रूप से सुरक्षित बाहर निकाला। पड़ोसी C ब्लॉक के फायर सिस्टम का भी उपयोग करके आग बुझाई गई। निवासियों ने बताया कि आग लगने के बाद घना काला धुआं पूरे इलाके में फैल गया, जो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से भी साफ दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए फ्लैट के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। एक निवासी ने बताया, “मैंने कोहनी मारकर तुरंत कांच तोड़ दिया और परिवार के साथ बाहर भागा। आग इतनी तेज फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा फ्लोर धुएं से भर गया।”
निवासियों की शिकायतें और सिस्टम की खामियां
घटना के बाद सोसाइटी निवासियों ने फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाई-राइज इमारतों के लिए पर्याप्त ऊंचाई वाली हाइड्रोलिक लैडर या आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। नीचे से फेंका गया पानी 9वीं-10वीं मंजिल तक पर्याप्त दबाव के साथ नहीं पहुंच पा रहा था। अंत में बगल के टावर के फायर सिस्टम से ही आग पर काबू पाया जा सका। निवासियों ने बिल्डर पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सोसाइटी में फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं किया गया, मेंटेनेंस ठीक से नहीं होता और इमारत में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम या इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं कमजोर हैं। कई लोगों ने मांग की कि हाई-राइज बिल्डिंग्स बनाने वाले बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई हो और नियमित ऑडिट अनिवार्य किया जाए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर संज्ञान लिया और लापरवाही बर्दाश्त न करने का सख्त संदेश दिया। उन्होंने पुलिस कमिश्नर और संबंधित अधिकारियों को तुरंत राहत-बचाव कार्य तेज करने तथा कारणों की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
घटना स्थल पर स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों में आक्रोश है। एक निवासी ने कहा, “हम हर महीने मेंटेनेंस चार्ज देते हैं, लेकिन जब मुसीबत आई तो न तो बिल्डर सामने आया और न ही पर्याप्त बचाव व्यवस्था।” कई लोगों ने हाई-राइज सोसाइटियों के लिए बेहतर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने और आधुनिक फायर फाइटिंग उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल आग की वजह का पता नहीं चल सका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 9वीं मंजिल पर कुछ निर्माण या इलेक्ट्रिकल कार्य चल रहे थे, जिससे शॉर्ट सर्किट या अन्य कारण से आग लगी हो सकती है। पुलिस और फायर विभाग जांच में जुटे हुए हैं।
यह घटना दिल्ली-एनसीआर में हाई-राइज बिल्डिंगों की फायर सेफ्टी पर एक बार फिर सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों के साथ-साथ फायर ब्रिगेड को भी आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण से लैस करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में जान-माल का नुकसान कम से कम हो। प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और मुआवजे की मांग जोर पकड़ रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हैं।

