New Delhi news दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (ईस्टर्न रेंज) ने एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जो पाकिस्तान से तुर्की निर्मित हथियारों को नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में स्मगल करता था। गिरोह का सरगना शाहबाज अंसारी और उसका चाचा रेहान अंसारी हैं, जो लंबे समय से फरार हैं।
एडिशनल सीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि स्पेशल सेल की टीम को खुफिया जानकारी मिली थी कि शाहबाज अंसारी (जो एक ठकअ केस में पैरोल जंप कर फरार है) और उसका चाचा रेहान अंसारी जेल के बाहर से एक बड़ा हथियार सिंडिकेट चला रहे हैं. ये लोग पाकिस्तान से हथियार मंगवाते थे, जो नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत (दिल्ली-एनसीआर और यूपी) में सप्लाई किए जाते थे।
आॅपरेशन में क्राइम ब्रांच ने कुल 9 लोगों को पकड़ा है, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार हुए। क्राइम ब्रांच ने इन लोगों से 18 सेमी-आॅटोमैटिक पिस्तौल जिसमें विदेशी पिस्तौल भी शामिल है. 02 देसी शॉटगन, 03 देसी कट्टे और हथियार ठीक करने के औजार बरामद किए हैं. अपराधी पुलिस से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स (जैसे सिग्नल या व्हाट्सएप के गुप्त तरीके) का इस्तेमाल करते थे।
एडिशनल कमिश्नर स्पेशल सेल प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि वसीम मलिक दिल्ली के तुर्कमान गेट का रहने वाला एक पुराना अपराधी है, जिस पर हत्या और डकैती के कई मामले दर्ज हैं. वहीं राहिल और इमरान, दोनों मुख्य आरोपी शाहबाज के रिश्तेदार हैं. राहिल दिल्ली में डीलिंग संभालता था, जबकि इमरान नेपाल बॉर्डर के जरिए हथियारों की तस्करी में माहिर है. इसके अलावा मोहम्मद अहमद, मुंगेर (बिहार) से भी हथियार मंगवाता था और उन्हें दिल्ली-यूपी में सप्लाई करता था. एडिशनल कमिश्नर के मुताबिक पुलिस अब उन अंतरराष्ट्रीय रास्तों की जांच कर रही है, जिनके जरिए ये हथियार भारत की सीमा में दाखिल हो रहे थे।
नेपाल के रास्ते स्मगल भेज रहे थे हथियार
स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि यह गैंग बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम करता था। यह सिंडिकेट विदेशी हथियारों (मेड इन तुर्की और अन्य) को पाकिस्तान से सोर्स करता था। इसके लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता था और हथियारों को नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में स्मगल किया जाता था। पुलिस की निगरानी से बचने के लिए गिरोह के सदस्य सामान्य फोन कॉल का इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे सिग्नल या व्हाट्सएप के जरिए बातचीत करते थे, ताकि उनकी चैट और कम्युनिकेशन ट्रैक न हो सके। सिंडिकेट में काम पूरी तरह बंटा हुआ था. जांच के मुताबिक शाहबाज अंसारी इस गैंग का मुख्य हैंडलर था, जबकि रेहान अंसारी लॉजिस्टिक्स, पैसों का लेन-देन और आपसी तालमेल संभालता था. निचले स्तर के गुर्गों को केवल हथियारों की डिलीवरी और उन्हें सुरक्षित छिपाने का काम सौंपा जाता था।

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