उत्तर प्रदेश सरकार और UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने प्रदेश को बिजली वितरण के क्षेत्र में “स्मार्ट” बनाने का सपना देखा। बिजली चोरी रोकने, उपभोक्ताओं को रियल-टाइम खपत की जानकारी देने और मैनुअल बिलिंग की झंझट खत्म करने के नाम पर पूरे प्रदेश में ताबड़तोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए।
31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत देशभर में 3.9 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जबकि पूरे देश में कुल संख्या 5.28 करोड़ तक पहुंच गई थी। उत्तर प्रदेश में 84.5 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 75.5 लाख प्रीपेड मीटर के रूप में काम कर रहे हैं। राज्य का लक्ष्य 3 करोड़ मीटर लगाने का है, लेकिन आधे लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही शिकायतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।
नोएडा: हाईटेक शहर में सबसे बड़ा संकट
जिस नोएडा को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया जाता है, वहीं के नागरिक आज इस “स्मार्ट मीटर” के कारण सबसे अधिक परेशान हैं। नोएडा शहर में रहने वाले अधिकांश लोगों का आरोप है कि स्मार्ट प्रीपेड विद्युत मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत के स्थान पर आफत बनते जा रहे हैं। तेज गति से चलने वाला मीटर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रहा है। वहीं प्रीपेड स्मार्ट मीटर को रिचार्ज कराने के घंटों बाद तक कनेक्शन नहीं जुड़ने जैसी समस्याओं से भी विद्युत उपभोक्ता परेशान हैं। उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष विकास जैन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर बताया कि उनके सेक्टर-115 नोएडा स्थित कार्यालय में स्मार्ट मीटर लगने के बाद मात्र 12 दिनों में 8 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा। कार्यालय का स्वीकृत लोड मात्र 3 किलोवाट है, इसके बावजूद इतनी भारी रकम तकनीकी रूप से असंभव और अनुचित प्रतीत होती है।
RWA और उपभोक्ताओं की गुहार, अधिकारियों का रवैया लापरवाह
नोएडा में प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं को लेकर फोनरवा के बैनर तले विभिन्न RWA पदाधिकारियों ने UPPCL के मुख्य अभियंता संजय जैन के साथ बैठक की। फोनरवा अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद निवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में पैसे कटने के बावजूद घरों की बिजली आपूर्ति बंद हो रही है।
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स, नोएडा के अध्यक्ष केके जैन ने कहा कि हर दिन सैकड़ों लोग स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं लेकर सामने आ रहे हैं और वे इन चिंताओं को अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं। नोएडा के एक निवासी अनुज कुमार ने कहा कि वे लगातार शिकायत करते रहे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नजरअंदाज ही किया। धिकारियों ने आश्वासन दिया कि जब तक सर्वर और सिस्टम पूरी तरह सुचारू नहीं हो जाते, तब तक नए मीटर लगाने पर पुनर्विचार किया जाएगा। बिल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सेक्टर-18 के अलावा अन्य जगहों पर एक अतिरिक्त नया कार्यालय खोला जाएगा। लेकिन यह आश्वासन कब अमल में आएगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
बिल में 31% की बढ़ोतरी — सरकारी रिपोर्ट ने खोली पोल
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की एक ताजा रिपोर्ट ने बिजली विभाग के दावों की पोल खोल दी है। जिन 23 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, उनके बिजली बिल में सालाना औसतन 31.19 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। तिमाही वार आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं — अप्रैल से जून में बिल में 32.80 प्रतिशत, जुलाई से सितंबर में 22.78 प्रतिशत और अक्टूबर से दिसंबर में सबसे अधिक 36.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्मार्ट मीटर की वजह से इन उपभोक्ताओं को एक साल में 66 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़े।
13 मार्च के बाद से 50 लाख खातों में माइनस बैलेंस, लाखों घरों में अंधेरा
13 मार्च से इन मीटरों को पूरी तरह ‘लाइव’ कर दिए जाने के बाद नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन खुद कटने लगे। राज्य में 78 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70.50 लाख मीटर अब पूरी तरह प्रीपेड मोड में काम कर रहे हैं। प्रदेश में 50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर खातों में बैलेंस नेगेटिव हो गया है।
होली के त्योहार से ठीक पहले बिजली विभाग की कार्रवाई ने हजारों परिवारों को अंधेरे में धकेल दिया। प्रदेश के लगभग 76,785 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैल गया। उपभोक्ता परिषद ने यह भी याद दिलाया कि जन्माष्टमी के दौरान भी ऐसी ही दिक्कतें आई थीं, जिसके बाद इस योजना को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था।
भदोही जिले के ज्ञानपुर नगर के बालीपुर निवासी सोनू सिंह ने बताया कि जबसे जनरल मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाया गया है, बिल दोगुना आ रहा है। इसके साथ ही 667 रुपये माइनस में होने के कारण स्मार्ट मीटर ने विद्युत आपूर्ति रोक दी। पत्नी की बीमारी के कारण छह माह का बिल नहीं जमा हो सका, इसी दौरान मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगा दिया गया और उनके ऊपर 17 हजार रुपये का बकाया बिजली बिल थोप दिया गया। ज्ञानपुर नगर में कपड़े की दुकान चलाने वाले शिवम शुक्ला और राम बहादुर यादव का कहना है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिल में भारी बढ़ोतरी हुई है और मामूली बकाए पर भी पावर सप्लाई रोक दी जा रही है। लोगों की मांग है कि स्मार्ट मीटर को बदलकर जनरल मीटर लगाया जाए।
सोलर उपभोक्ताओं के साथ भी धोखा — बिना सूचना यूनिट हड़पीं
वाराणसी में सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं की अतिरिक्त (सरप्लस) यूनिट बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली निगम ने मर्ज कर लीं। उपभोक्ताओं को इसका पता तब चला जब उन्होंने अप्रैल का बिल डाउनलोड किया। निगम ने सरप्लस यूनिट के बदले केवल 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान किया, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को 5.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जाती है।
14 जिलों में प्रीपेड मोड — ग्रामीण सबसे ज्यादा बेहाल
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों — मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, रामपुर और बिजनौर में स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या या ऑनलाइन पेमेंट के साधन न होने की वजह से रिचार्ज खत्म होने पर लोगों की दिक्कतें और भी गहरी हो जाती हैं।
अब क्या कह रही है सरकार — राहत के नाम पर आधा-अधूरा पैबंद
लंबे समय तक चुप रही योगी सरकार ने अब कुछ राहत उपाय घोषित किए हैं, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें नाकाफी मान रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि 1 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं की लाइट बिल जमा न होने पर भी एक महीने तक नहीं काटी जाएगी। यह फैसला खासतौर पर गरीब और रोजमर्रा के उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लिया गया है। इसके अलावा 2 किलोवाट तक के प्रीपेड मीटर कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के खाते में यदि 200 रुपये तक का माइनस बैलेंस हो जाता है, तब भी एक सप्ताह तक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। लेकिन 2 किलोवाट से अधिक के उपभोक्ताओं को इस राहत से बाहर रखा गया है, जो मध्यम वर्ग के लिए बड़ा झटका है।
उपभोक्ता परिषद की मांग — उच्च स्तरीय जांच हो
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मांग रखी है कि स्मार्ट मीटर योजना का पूरा खर्च बिजली कंपनियों या सरकार को वहन करना चाहिए और इसे किसी भी रूप में टैरिफ बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जाना चाहिए। परिषद ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
किसान और बिजली कर्मचारी भी उठा रहे आवाज
बिजली के निजीकरण और उपभोक्ताओं के घरों पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की जबरदस्ती को लेकर किसानों और बिजली कर्मचारियों ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के बीच समझौते के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
निष्कर्ष: ‘स्मार्ट’ मीटर, ‘बेसमार्ट’ सरकार
यूपी में स्मार्ट मीटर का यह प्रयोग अब तक किसी भी मानक पर खरा नहीं उतरा है। स्मार्ट मीटर इस तरह डिजाइन किए गए थे कि वे मोबाइल ऐप के जरिए लगभग वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी दें, लेकिन कई निवासी बताते हैं कि अलर्ट अक्सर देर से आते हैं या बिल्कुल नहीं आते, और ऐप व वेबसाइट की त्रुटियों के कारण समय पर रिचार्ज नहीं हो पाता।

