नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न-धर्मांतरण कांड: ‘मैटर ड्रॉप कर दो’ कहकर शिकायत दबाने वाली अश्विनी चैनानी 14 दिन न्यायिक हिरासत में, CM फडणवीस बोले- कोई नहीं बचेगा, ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ की जड़ तक जांच

नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न-धर्मांतरण कांड: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट में महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों वाले मामले में तहलका मचा हुआ है। गिरफ्तार असिस्टेंट जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) अश्विनी अशोक चैनानी पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता महिला कर्मचारी को यौन शोषण की शिकायत दबाने के लिए कहा था- “ड्रॉप द मैटर” (मामला छोड़ दो)। पुलिस ने उन्हें पुणे से गिरफ्तार कर 15 अप्रैल को नासिक कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 28 अप्रैल तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में खुलासा हुआ कि चैनानी कंपनी की आंतरिक POSH (Prevention of Sexual Harassment) कमेटी की सदस्य भी थीं, लेकिन उन्होंने कई शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि जब उसने टीम लीडर्स द्वारा यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव की शिकायत की, तो चैनानी ने कहा- “ऐसी चीजें होती रहती हैं, इसे छोड़ दो।” SIT ने 78 संदिग्ध ईमेल, कॉल रिकॉर्ड्स और चैट्स बरामद किए, जिनमें चैनानी और मुख्य आरोपी तौसिफ अतार के बीच दो साल में 38 बार संपर्क साबित हुआ।

मामले की पृष्ठभूमि
यह कांड तब सामने आया जब TCS नासिक की एक महिला कर्मचारी ने FIR दर्ज कराई। आरोप है कि टीम लीडर्स (जिनमें ज्यादातर मुस्लिम नाम शामिल हैं- निदा खान, तौसिफ अतार, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन आदि) ने हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया। उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर यौन संबंध बनाने का दबाव, वीडियो ब्लैकमेल, गोमांस खिलाने और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगा। कुल 9 FIR दर्ज हुईं, 7 आरोपी गिरफ्तार, जबकि HR मैनेजर निदा खान फरार है, जिसे मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। पुलिस ने 40 दिनों तक अंडरकवर महिला कांस्टेबलों को ऑफिस में तैनात कर सबूत जुटाए। TCS ने दावा किया कि आंतरिक चैनल पर कोई शिकायत नहीं आई, लेकिन SIT इसे खारिज कर रही है।

राजनीतिक प्रक्रियाएं और सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने होम डिपार्टमेंट की हाई-लेवल समीक्षा बैठक की और कहा, “धर्मांतरण के मामले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। कोई भी आरोपी नहीं बचेगा, कोई ढाल नहीं बनेगा।” उन्होंने इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” की संभावना बताते हुए केंद्रीय एजेंसियों को जांच सौंपी। फडणवीस ने TCS चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की निंदा और सहयोग की सराहना की। राज्य महिला आयोग ने भी जांच समिति गठित कर ली है।

विरोध प्रदर्शन और विपक्षी-राजनीतिक घमासान
मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। महाराष्ट्र में महिलाओं ने सड़कों पर आक्रोश जताया। ‘रणरागिनी जन आक्रोश’ के बैनर तले बाइक रैली निकाली गई, जिसमें TCS प्रबंधन और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ नारे लगे। भोपाल में बजरंग दल ने भी नासिक कांड के विरोध में प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू-मराठी महिलाओं पर हमला बताते हुए विपक्ष (खासकर ठाकरे गुट) पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। एक भाजपा नेता ने कहा, “सभी पीड़ित हिंदू और मराठी हैं, फिर भी विपक्ष क्यों चुप है?”

विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए, लेकिन मुख्य फोकस महिलाओं की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही पर रहा। कुछ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले को “भारत के खिलाफ अप्रत्यक्ष युद्ध” और “आतंकी कृत्य” करार देने की मांग की। नासिक में आरोपी कर्मचारियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ रही है।

TCS का रुख
कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि वह पुलिस को पूरा सहयोग दे रही है। नासिक यूनिट में कामकाज अस्थायी रूप से WFH मोड में कर दिया गया है और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। SIT की जांच जारी है। निदा खान की गिरफ्तारी और अंतरराष्ट्रीय लिंक (अगर कोई) की तह तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। यह मामला पूरे IT सेक्टर में POSH कानून की पालना और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा कर रहा है। अपडेट: चैनानी अभी नासिक जेल में हैं। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को। पुलिस का दावा- यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की हरकत नहीं, बल्कि बड़े साजिश का हिस्सा हो सकता है।

यह भी पढ़ें: “AC का कंप्रेसर बना ‘बम’: AC कंप्रेसर फटने से दो सोसायटियों में आग, एक फ्लैट में अकेली बच्ची थी बंद, बिल्डर पर लापरवाही का आरोप”

यहां से शेयर करें