Uttar Pradesh News: लखनऊ। डिजिटल लेन-देन के दौर में भी उत्तर प्रदेश के कई बैंकों में नकदी की कमी देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हैं कि बड़ी रकम निकालने पहुंचे खाताधारकों को बैंकों से तत्काल भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक से ही बैंकों को मांग के मुकाबले कम नकदी मिल रही है। बताया जा रहा है कि बैंकों द्वारा मांगी गई राशि का केवल 20 से 30 प्रतिशत ही एक बार में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शाखाओं में कैश की किल्लत बनी हुई है।
इस मामले में आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक पंकज कुमार का कहना है कि वित्तीय वर्ष के बदलाव के दौरान कुछ समय के लिए कैश प्रबंधन में दिक्कतें आना सामान्य बात है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन बैंकों में नकदी की अधिक मांग है, वहां प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नकदी संकट को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि करेंसी चेस्ट में लगातार कमी बनी हुई है, जिससे शाखाओं को पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नकदी की बढ़ती मांग के पीछे कई कारण हैं। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव, हाल ही में गन्ना किसानों को किया गया भुगतान, गेहूं खरीद का सीजन और शादियों (सहालग) का समय—इन सभी ने नकदी की जरूरत को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी बाजार में नकदी की मांग बढ़ने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि चुनावी तैयारियों के चलते लोग पहले से ही नकदी जमा कर रहे हैं।
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हालांकि, अलग-अलग जिलों से इस मामले में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। बिजनौर के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अखिल कुमार सिंह ने नकदी की कमी की पुष्टि की है, जबकि वाराणसी के एलडीएम अविनाश अग्रवाल और कानपुर के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक आदित्य चंद्रा ने कहा कि उनके क्षेत्रों में फिलहाल नकदी की कोई बड़ी समस्या नहीं है और मांग के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। फिलहाल स्थिति को लेकर बैंक और आरबीआई दोनों ही निगरानी बनाए हुए हैं, लेकिन ग्राहकों को राहत मिलने में अभी समय लग सकता है।
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