Student dies tragically during picnic: नोएडा के सेक्टर-94 में परीक्षा खत्म होने की खुशी मनाने गए अमिटी यूनिवर्सिटी के 23 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। घटना बुधवार (8 अप्रैल) दोपहर करीब 3:15 बजे सुपरनोवा बिल्डिंग के पास एक खाली पड़े निर्माण स्थल पर हुई, जो नोएडा प्राधिकरण की संपत्ति है। यह जगह ‘नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर’ के लिए विकसित की जा रही थी, लेकिन परियोजना रुकी हुई है। हर्षित एक अच्छा तैराक और एथलीट था, फिर भी 20 फीट गहरे गड्ढे में फंसकर उसकी जान चली गई। तीन साथी छात्रों को पुलिस और एनडीआरएफ की मदद से बचा लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और बयान
सेक्टर-126 थाना पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। डीसीपी नोएडा साद मिया खान ने बताया, “सेक्टर-126 क्षेत्र से कुछ युवकों के डूबने की सूचना मिली। तुरंत टीम भेजी गई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और लोकल पुलिस के साथ प्राइवेट गोताखोरों की मदद से एक छात्र की लाश निकाली गई, जिसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। बाकी तीन छात्रों को सुरक्षित बचाया गया। हम गड्ढे की गहराई, घटना के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच कर रहे हैं।” लाश का पोस्टमॉर्टम हो चुका है और परिवार को सूचित कर दिया गया है। पुलिस ने अभी तक कोई FIR दर्ज करने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच चल रही है।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश की भूमिका
यह घटना जनवरी 2026 में सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की इसी तरह की मौत के महज तीन महीने बाद हुई है। उस घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ लोकेश एम को हटाकर कृष्ण करुणेश को पद सौंपा गया था। करुणेश ने तुरंत खतरनाक स्थानों की सूची बनाने, उनमें बाड़ लगाने और साइनेज लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस बार भी नोएडा प्राधिकरण की संपत्ति पर खुला गड्ढा बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के था, जिससे लापरवाही के सवाल उठ रहे हैं। अभी तक सीईओ करुणेश की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान या नई कार्रवाई की खबर नहीं आई है।
नोएडा डीएम मेधा रूपम पर सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोलिंग
गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम पहले से ही युवराज मेहता मामले में ट्रोलिंग का शिकार हैं। उस घटना में उन्होंने घटनास्थल पर चार दिन बाद पहुंचकर मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया था। अब इस नई घटना के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और तेज हो गई है। यूजर्स पूछ रहे हैं कि “पहले घटना के बाद वादे किए गए, फिर क्यों दोहराई गई लापरवाही?” कुछ यूजर्स ने उनके पिता (मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार) का जिक्र कर व्यक्तिगत हमले भी किए। इतना दबाव बढ़ा कि डीएम ने अपना X अकाउंट अस्थायी रूप से डिएक्टिवेट कर दिया। जनता में सवाल है कि जिला प्रशासन और प्राधिकरण ने खतरनाक निर्माण स्थलों को सुरक्षित क्यों नहीं किया?
राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया
घटना ताजा होने के कारण अभी तक किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी ने औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों के समर्थक और आम नागरिक नोएडा प्राधिकरण व योगी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। पिछली घटना में भी राजनीतिक बवाल हुआ था और SIT गठित की गई थी।
अमिटी यूनिवर्सिटी का बयान
यूनिवर्सिटी ने हर्षित को अंतिम वर्ष का छात्र बताया। वीपी (कम्युनिकेशंस) सविता दुबे ने कहा, “हम पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। परिवार के प्रति गहरी संवेदना।” हर्षित इंदिरापुरम, गाजियाबाद का रहने वाला था। यह घटना नोएडा में खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रही है। परिवार और स्थानीय लोग अब न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस की जांच जारी है और आगे की अपडेट का इंतजार है।

