असम में BJP की दोहरी रणनीति: असम विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे) से ठीक पहले भाजपा ने अपना 31 सूत्री ‘संकल्प पत्र’ (मेनिफेस्टो) जारी किया। इसमें बड़े विकास वादों के साथ ही पहचान, घुसपैठ और सांस्कृतिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया गया है। यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने मेनिफेस्टो जारी किया, जबकि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे “सुरक्षित और विकसित असम” बनाने का संकल्प बताया।
विकास के बड़े वादे
भाजपा का फोकस आर्थिक प्रगति पर है:
₹5 लाख करोड़ का निवेश, असम को भारत का “पूर्वी गेटवे” बनाने का लक्ष्य।
2 लाख सरकारी नौकरियां + 10 लाख युवाओं को ₹2 लाख से ₹5 लाख तक वित्तीय सहायता।
ओरुनोदई योजना में महिलाओं को मासिक सहायता ₹1,250 से बढ़ाकर ₹3,000 करने का वादा, साथ ही 15 लाख अतिरिक्त परिवारों को कवरेज। बाढ़ मुक्त असम मिशन (पहले दो साल में ₹18,000 करोड़ खर्च), ब्रह्मपुत्र पर अंडर वाटर टनल, एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेनें, नए एयरपोर्ट और वाटर मेट्रो सिस्टम। स्वास्थ्य, शिक्षा और चाय बागान मजदूरों के लिए विशेष योजनाएं। पार्टी का दावा है कि 2015-16 में असम का GSDP ₹2.24 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹7.41 लाख करोड़ हो गया है और प्रति व्यक्ति आय में 50% से ज्यादा वृद्धि हुई है।
पहचान और घुसपैठ पर सख्त रुख
मेनिफेस्टो में विकास के साथ ही हिंदुत्व एजेंडे को मजबूती से जगह दी गई है:
सत्ता में वापसी पर 3 महीने के अंदर Uniform Civil Code (UCC) लागू करना (6वीं अनुसूची वाले आदिवासी क्षेत्रों को छोड़कर)।
“लव जिहाद” खत्म करने के लिए प्रभावी कानून बनाना।
“लैंड जिहाद” (भूमि पर कब्जा) रोकने के लिए सख्त कदम।
Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950 का रोजाना इस्तेमाल कर “घुसपैठियों” को पुशबैक (बांग्लादेश भेजना)।अवैध कब्जे वाली हर इंच जमीन खाली कराना, मिशन बसुंधरा के तहत असली नागरिकों को भूमि अधिकार। विशेष इंटेंसिव रिवीजन में 4-5 लाख “मिया” वोटरों को सूची से हटाने का संकेत। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने अभियान में बांग्लादेशी घुसपैठ को “जनसांख्यिकीय आक्रमण” बताया और बंगाली मुस्लिम समुदाय (खासकर “मिया”) के खिलाफ आर्थिक बहिष्कार जैसे बयान दिए। उन्होंने कहा कि असम की मूल आबादी की सभ्यता, विरासत और अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
क्यों यह मिश्रित रणनीति?
भाजपा की यह दोहरी पिच चुनावी गणित पर आधारित है। 2011 में भाजपा सिर्फ 5 सीटें जीती थी (वोट शेयर 11.47%)। 2016 में 60 सीटें और 2021 में भी 60 सीटें (गठबंधन के साथ 75) हासिल कीं। वोट शेयर में छोटा फर्क (2021 में महज 1%) होने के बावजूद सीटों में बड़ा अंतर आया। पार्टी का मानना है कि विकास से विश्वसनीयता और पहचान के मुद्दों से वोटों का कुशल बंटवारा दोनों जरूरी हैं।
दो टर्म की एंटी-इनकंबेंसी के बावजूद भाजपा विकास (शांति, इंफ्रास्ट्रक्चर, वेलफेयर) और घुसपैठ विरोधी एक्शन (1.25 लाख एकड़ जमीन रिकवर) को हाइलाइट कर रही है। विपक्ष (कांग्रेस-महागठबंधन) पर कांग्रेस के पुराने शासन में घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही है।यह रणनीति असम की खासियत को ध्यान में रखकर बनाई गई है — जहां विकास के साथ मूल निवासियों की चिंताएं (जनसांख्यिकी, भूमि, संस्कृति) हमेशा चुनावी मुद्दा रहती हैं।

