Daughters break the shackles of stereotypes: किसी समय में जिस समाज में महिलाओं को चौखट के भीतर रखने की परंपरा थी, आज उसी समाज की बेटियाँ खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा के एक छोटे से गाँव से निकलकर IPS पूजा अवाना ने जो मुकाम हासिल किया है, उसने न केवल उनके परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि ‘गुर्जर समाज’ में पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देते हुए एक नई मिसाल पेश की है।
परिवार की नहीं, अब खुद की पहचान
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की पहचान उनके पिता, पति या परिवार के पुरुषों से होती है। लेकिन पूजा अवाना ने इस चलन को पूरी तरह बदल दिया है। आज उनके क्षेत्र में उनके परिवार को उनके नाम से पहचाना जाता है। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और समाज की उन बंदिशों को तोड़ने का साहस है, जहाँ कभी लड़कियों को उच्च शिक्षा और बाहरी दुनिया से दूर रखा जाता था।
चुनौतियों भरा सफर और सामाजिक बाधाएं
गुर्जर समाज ऐतिहासिक रूप से अपनी परंपराओं और कठोर सामाजिक नियमों के लिए जाना जाता रहा है। एक दौर था जब इस समाज में बेटियों की शिक्षा से ज्यादा उनके घरेलू कौशल और विवाह पर जोर दिया जाता था। ऐसी स्थिति में:
- शिक्षा का अभाव: लड़कियों को स्कूल भेजना एक बड़ी चुनौती मानी जाती थी।
- रूढ़िवादिता: ‘बाहर की दुनिया’ को लड़कियों के लिए असुरक्षित माना जाता था।
- सीमित अवसर: करियर के विकल्प केवल घर के कामों या खेती-किसानी तक सीमित थे।
पूजा के पिता विजय अवाना ने इन सामाजिक बेड़ियों को दरकिनार किया और अपनी बेटी के सपनों को पंख दिए। उन्होंने समाज के तानों की परवाह न करते हुए पूजा को वह माहौल दिया, जिसकी उसे ज़रूरत थी।
प्रेरणा का स्रोत बनीं पूजा
पूजा अवाना का IPS बनना केवल एक सरकारी नौकरी पाना नहीं है। यह उन हज़ारों लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण है जो अपनी प्रतिभा को घर की चारदीवारी में दम तोड़ते हुए देख रही थीं। उनकी सफलता ने समाज में दो बड़े बदलाव किए हैं:
- शिक्षा के प्रति जागरूकता: अब समाज के अभिभावक अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
- मानसिकता में परिवर्तन: यह स्वीकार्यता बढ़ी है कि बेटियाँ भी वंश का नाम बढ़ा सकती हैं और सुरक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं।
“पूजा अवाना का सफर यह साबित करता है कि अगर अवसर और हौसला मिले, तो समाज की कोई भी दीवार किसी बेटी का रास्ता नहीं रोक सकती।”
निष्कर्ष
आज पूजा अवाना राजस्थान कैडर में अपनी सेवाएँ दे रही हैं और उनकी कार्यशैली की सराहना हर तरफ होती है। उनका IPS बनना इस बात का प्रमाण है कि पहचान जन्म से नहीं, बल्कि कर्म और कड़े संघर्ष से बनती है। गुर्जर समाज में आ रहा यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त भविष्य की नींव रख रहा है।

