Crackdown on deepfake and AI-generated content: नए आईटी नियमों में लेबलिंग अनिवार्य, 3 घंटे में हटाना होगा अवैध सामग्री

Crackdown on deepfake and AI-generated content: भारत सरकार ने डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए आईटी नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 10 फरवरी 2026 को ‘इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) अमेंडमेंट रूल्स 2026’ को नोटिफाई किया है। ये नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो जाएंगे, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ 10 दिन का समय मिला है अनुपालन के लिए।

सिंथेटिक कंटेंट की नई परिभाषा और लेबलिंग
नियमों में पहली बार “सिंथेटिकली जनरेटेड इन्फॉर्मेशन” (SGI) को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें कोई भी ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल है जो कंप्यूटर रिसोर्स से आर्टिफिशियल तरीके से बनाया, बदला या जनरेट किया गया हो, और जो असली लगे। हालांकि, सामान्य एडिटिंग जैसे कलर करेक्शन, नॉइज रिडक्शन आदि को इससे बाहर रखा गया है।

एआई से बने इमेज, वीडियो या ऑडियो को स्पष्ट रूप से ‘एआई जनरेटेड’ लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यूजर्स और प्लेटफॉर्म्स दोनों पर यह जिम्मेदारी रहेगी। लेबल हटाने या छिपाने पर सख्त कार्रवाई होगी। ड्राफ्ट में लेबल के साइज (10% एरिया) की बात थी, लेकिन फाइनल नियमों में इसे हटा दिया गया है।

प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे X, Instagram, WhatsApp, YouTube) को अब ऑटोमेटेड टूल्स लगाने होंगे जो अवैध सिंथेटिक कंटेंट (जैसे चाइल्ड पोर्नोग्राफी, ऑब्सीन कंटेंट, फ्रॉड, विस्फोटक बनाने की जानकारी आदि) को पहचानें और ब्लॉक करें। अवैध कंटेंट हटाने की समयसीमा घटकर 3 घंटे हो गई (पहले 36 घंटे)। न्यूडिटी या ऑब्सीन एआई कंटेंट के लिए सिर्फ 2 घंटे। ग्रिवांस रिड्रेसल 7 दिन में (पहले 15 दिन)। यूजर्स को हर तीन महीने में इन नियमों की जानकारी देनी होगी।

विशेषज्ञों की चिंताएं:

सेंसरशिप और ओवर-रेगुलेशन का डर
कई कानूनी विशेषज्ञों ने इन नियमों पर चिंता जताई है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के अपार गुप्ता ने कहा कि इससे सैटायर, पैरोडी और आर्टिस्टिक कंटेंट भी ब्लॉक हो सकता है, क्योंकि मशीन न्यूएंस नहीं समझ पाएंगी। छोटे प्लेटफॉर्म्स पर बोझ बढ़ेगा, जिससे मार्केट में बड़े खिलाड़ी ही बचेंगे। अन्य विशेषज्ञों (जैसे खेतान एंड कंपनी, ट्राइलिगल) का कहना है कि फ्री स्पीच पर असर पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स ओवर-मॉडरेशन कर सकते हैं। कुछ ने इसे जरूरी बताया, क्योंकि डीपफेक से समाज को गंभीर नुकसान हो रहा है।

ताजा स्थिति (13 फरवरी 2026 तक)
नियम लागू होने में अभी एक सप्ताह बाकी है। प्लेटफॉर्म्स अपनी पॉलिसी अपडेट कर रहे हैं। कोई बड़ा अपडेट नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों और संगठनों (IFF आदि) ने आलोचना की है। सरकार का कहना है कि ये नियम यूजर्स को एआई क्राइम्स से बचाएंगे। आने वाले दिनों में प्लेटफॉर्म्स की प्रतिक्रिया और कोर्ट चैलेंज पर नजर रहेगी।

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