ग्रेटर नोएडा के कासना में स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में सोमवार से चिकित्सा सेवाओं के बजाय कर्मचारियों की हड़ताल और मरीजों की बेबसी का केंद्र बन गया है। नियमितीकरण और नौकरी की सुरक्षा की मांग को लेकर करीब 700 आउटसोर्स कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इसकी वजह से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं, कई ऑपरेशन टाल दिए गए और गंभीर मरीजों की देखभाल प्रभावित हुई। आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों की मौत हो गई, जिसे तीमारदारों ने समय पर स्टाफ न मिलने से जोड़ा है।
हड़ताल पर गए कर्मचारियों में नर्सिंग स्टाफ, ओटी और लैब तकनीशियन, डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा हाउसकीपिंग कर्मी शामिल हैं। उनके नेतृत्वकर्ताओं अंजलि चौधरी, राकेश और दीपक ने बताया कि वे पिछले 13-14 वर्षों से जीआईएमएस में सेवाएं दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब कई लोग डरकर घर बैठ गए, तब इन कर्मचारियों ने दिन-रात मरीजों की जान बचाई। उस समय प्रशासन ने परमानेंट करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब नई भर्तियां निकाली जा रही हैं, जिससे पुराने कर्मचारियों में गहरी असुरक्षा फैल गई है। कम वेतन और अनिश्चित भविष्य के चलते उनके पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा। अस्पताल प्रबंधन ने अधूरे इलाज वाले कई मरीजों को जल्दबाजी में डिस्चार्ज कर दिया। ओपीडी काउंटरों पर सन्नाटा पसरा रहा और दूर-दराज से आए सैकड़ों मरीज बिना इलाज के लौट गए। वार्डों में तीमारदारों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। एक तीमारदार विमलेश ने बताया कि उनकी बहू का हाल ही में ऑपरेशन हुआ था, लेकिन हड़ताल के कारण टांके संक्रमित हो गए और कोई पट्टी तक नहीं बदल रहा। आठ आईसीयू में भर्ती 400 से अधिक गंभीर मरीजों की निगरानी प्रभावित होने से उनकी जान भी खतरे में बताई जा रही है।
जीआईएमएस निदेशक डॉ. आर.के. गुप्ता ने कर्मचारियों से बातचीत की और अपील की कि वे मरीजों के हित को देखते हुए काम पर लौटें। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी संस्थान का अभिन्न हिस्सा हैं और नई भर्तियां स्वीकृत पदों से कम संख्या में हो रही हैं, इसलिए किसी की नौकरी पर खतरा नहीं है। मौतों को केवल बीमारी से जोड़ा गया और हड़ताल से लिंक करने के आरोपों को खारिज किया। यह हड़ताल जीआईएमएस में लंबे समय से चली आ रही असंतोष की परिणति है। कर्मचारी वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग पहले भी उठा चुके हैं। प्रशासन के आश्वासनों के बावजूद समाधान नहीं निकलने से स्थिति बिगड़ी। स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हड़ताल मरीजों के लिए संकट बन गई है, जबकि कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। प्रशासन और कर्मचारी यूनियन के बीच वार्ता जारी है। उम्मीद है कि जल्द कोई समझौता हो जाएगा, ताकि अस्पताल की सेवाएं बहाल हो सकें और मरीजों को राहत मिले। इस घटना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति और नियमितीकरण की जरूरत पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

