टूटी फेंसिंग बनी काल NDRF ने तालाब से निकाला पलवल के युवक का शव, ग्रामीणों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही के गंभीर आरोप; बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत

इकोटेक-3 थाना क्षेत्र के सादुलापुर गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। गांव के तालाब में डूबे हरियाणा के पलवल निवासी लगभग 30 वर्षीय युवक का शव बुधवार की सुबह राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बरामद कर लिया। शव बरामद होते ही परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं ग्रामीणों का सब्र का बांध भी टूट गया और उन्होंने तालाब के आसपास बरसों से टूटी पड़ी सुरक्षा फेंसिंग को लेकर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया।

कैसे हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार मृतक युवक हरियाणा के पलवल जिले का रहने वाला था और सादुलापुर गांव में अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ आया हुआ था। मंगलवार की शाम वह किसी कारण से गांव के तालाब के पास पहुंचा और गहरे पानी में डूब गया। सबसे पहले गांव के एक छोटे बच्चे की नज़र उस पर पड़ी। बच्चे के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण दौड़े और तत्काल इकोटेक-3 थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से युवक को तलाशने की कोशिश शुरू की गई। हालांकि तालाब की अत्यधिक गहराई और पानी की खराब दृश्यता के कारण खोज में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद NDRF की टीम को बुलाया गया। देर रात से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार की सुबह तक चला और अंततः टीम ने युवक का शव तालाब की गहराई से बाहर निकाला। घटनास्थल पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

टूटी फेंसिंग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

शव बरामद होने के बाद गांव में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल भी बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के चारों ओर लगी सुरक्षा फेंसिंग लंबे समय से जर्जर हालत में है और कई जगह से पूरी तरह टूटकर गिर चुकी है। उन्होंने बताया कि इस बारे में संबंधित अधिकारियों को बार-बार लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन प्राधिकरण की ओर से कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का साफ कहना है  “यह महज एक हादसा नहीं, प्रशासनिक अनदेखी की वजह से हुई मौत है।”

यह पहला मामला नहीं

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा में असुरक्षित तालाबों और खुले गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी वर्ष फरवरी में दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में एक मंदिर के पास पानी से भरे खुले गड्ढे में गिरने से तीन साल के मासूम देवांश की मौत हो गई थी, जिसके बाद प्राधिकरण और जिला प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके कुछ ही दिन बाद फरवरी के अंत में एक अन्य घटना में पांच साल के बच्चे की असुरक्षित तालाब में डूबने से मौत हो गई और उसका शव 48 घंटे बाद बरामद हुआ। उस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार घटनास्थल पर न कोई चेतावनी साइन था, न रिफ्लेक्टर, न बैरिकेड और न ही सुरक्षा गार्ड गड्ढा बिना किसी सुरक्षा उपाय के सार्वजनिक मार्ग के बीच खुला छोड़ दिया गया था। दलेलगढ़ मामले में मासूम की मौत के बाद ही प्रशासन की नींद टूली और तालाब के चारों ओर तार-फेंसिंग का काम शुरू किया गया। सवाल यह है कि हर बार किसी की जान जाने के बाद ही सिस्टम क्यों जागता है?

ग्रामीणों की मांगें

सादुलापुर गांव के निवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से निम्नलिखित मांगें रखी हैं गांव के सभी तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों के चारों ओर तत्काल मज़बूत फेंसिंग लगाई जाए। तालाबों के किनारे हिंदी व स्थानीय भाषा में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।रात के समय पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध लापरवाही के लिए कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल

ग्रेटर नोएडा को उत्तर प्रदेश की ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘शो-विंडो’ कहा जाता है, जहां आसमान छूती इमारतें और चौड़ी सड़कें हैं लेकिन इसी चमक के नीचे लापरवाही के वो खौफनाक अंधेरे हैं जो अब लोगों की जान ले रहे हैं। सादुलापुर का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या ‘स्मार्ट सिटी’ के सपने में आम आदमी की बुनियादी सुरक्षा के लिए कोई जगह है? एक परिवार ने अपना जवान बेटा खो दिया, एक गांव सदमे में है और जिम्मेदार महकमा अब भी चुप है।पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्राधिकरण से आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई है, जो अभी तक नहीं मिली।

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