“TMC का किला ढह रहा है” BJP सांसद सौमित्र खान का दावा, 50 विधायक और 20 सांसद BJP में आने को तैयार, बंगाल की राजनीति में भूचाल

अभिषेक बनर्जी पर भी हमला, तृणमूल ने किया खंडन, लेकिन भीतरी संकट छुपाना मुश्किल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इसी बीच BJP सांसद सौमित्र खान ने एक ऐसा बम फोड़ा है जिसने बंगाल की सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है। बाँकुड़ा के BJP सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि TMC के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद अपनी पार्टी से नाराज हैं और BJP में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। खान ने यह बयान बाँकुड़ा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी जमकर निशाना साधा। सौमित्र खान ने अभिषेक बनर्जी पर 5,000 करोड़ रुपये के कथित घोटालों में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए उनकी जांच और गिरफ्तारी की मांग की है।

TMC का संकट — जमीनी हकीकत क्या है?

खान का यह दावा महज एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है। जमीनी तस्वीर बताती है कि TMC सच में बिखरन के कगार पर है। 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के हफ्तों बाद, पश्चिम बंगाल के नगर निकायों से करीब 100 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है, वरिष्ठ नेता खुलकर असंतोष जाहिर कर रहे हैं और पार्टी से और भी नेताओं के निकलने की अटकलें तेज हो गई हैं।  TMC की चार बार सांसद रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उत्तर 24 परगना में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में छह TMC विधायकों के साथ शिरकत की, जिसने पार्टी के भीतर बेचैनी और बढ़ा दी। एक अन्य वरिष्ठ TMC सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमय संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने जनता का शुक्रिया अदा किया कि उसने TMC के “कुशासन” का अंत किया। TMC के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी सांसदों, विधायकों और पार्षदों की बड़े पैमाने पर BJP में जाने की आशंका से घबराई हुई है।

TMC का खंडन — “खोखले दावे”

तृणमूल कांग्रेस ने सौमित्र खान के दावे को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे चुनाव के बाद की हताशा में की गई बयानबाजी करार देते हुए कहा कि BJP अपनी जीत को बड़ा दिखाने के लिए ऐसे झूठे दावे कर रही है। हालांकि, जमीनी हालात TMC के इस खंडन को कमजोर बनाते हैं।

इतिहास गवाह है — ‘दलबदल’ बंगाल की राजनीति का पुराना खेल

2019 से अब तक कम से कम तीन TMC लोकसभा सांसद — बिष्णुपुर के सौमित्र खान, बोलपुर के अनुपम हजरा और बर्धमान पूर्व के सुनील मंडल TMC छोड़कर BJP में शामिल हो चुके हैं।  2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी TMC से BJP में गए ज्यादातर नेता चुनाव हार गए थे, लेकिन अब परिस्थितियां उलट हैं BJP सत्ता में है।2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में पार्टी के महज 36 विधायक ही शामिल हुए, जो बताता है कि पार्टी में एकजुटता टूट रही है।

अभिषेक बनर्जी पर निशाना — क्यों?

सौमित्र खान हमेशा से अभिषेक बनर्जी के कट्टर आलोचक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC अब ममता की भांजी अभिषेक बनर्जी चला रहे हैं और वे उन्हें इसलिए निशाना बनाते हैं क्योंकि वे बंगाल में ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। चुनाव में हार के बाद अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर सवाल खड़े करना BJP की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 50 विधायकों और 20 सांसदों का एक साथ BJP में आना व्यावहारिक रूप से बेहद जटिल है — दलबदल विरोधी कानून की बाधाएं भी हैं। लेकिन यह तय है कि TMC का संगठन बिखर रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद उन नेताओं ने भी अलग-अलग सुर अलापने शुरू कर दिए जो चुनाव तक पार्टी नेतृत्व का बचाव कर रहे थे। बंगाल की राजनीति में यह घड़ी TMC के लिए सबसे बड़ी परीक्षा की घड़ी है। सत्ता जाने के बाद पार्टी को एकजुट रखना ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

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