अदन/दुबई/इस्तांबुल, मध्य-पूर्व में युद्ध की आग और फैली, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर हूथियों की पकड़ मजबूत, सऊदी क्राउन प्रिंस की अमेरिका से सीधी सैन्य कार्रवाई की अपील खारिज, UAE ने ईरानी हमलों के बाद अपने महत्वाकांक्षी AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को भूमिगत और बिखरे हुए ढांचे में बदलने का फैसला किया।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष शुक्रवार को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया, जब यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, और इसके एक तरफ स्वेज नहर तक जाने वाला रास्ता तो दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां पहले से ही ईरान और अमेरिका-इस्राइल गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है।
पेरिम द्वीप पर हूथियों का कब्जा, यमन सरकार की सेना पीछे हटी
रॉयटर्स से बात करने वाले यमन सरकार के चार सूत्रों के अनुसार, हूथी लड़ाके शुक्रवार को पेरिम द्वीप तक पहुंच गए। इससे पहले सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के दो सूत्रों ने बताया था कि उनकी सेनाएं द्वीप से पीछे हट गई हैं, और हूथियों ने द्वीप के सामने स्थित लाल सागर तटीय शहर धुबाब पर भी कब्जा कर लिया है। इसी सप्ताह हूथियों ने बिजली की तेजी से आगे बढ़ते हुए लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और हनीश द्वीप समूह पर भी कब्जा जमाया था। यमनी सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नाजिली ने आम नागरिकों से ताइज़ और मोखा के बीच के मार्ग का इस्तेमाल न करने और हूथी उपकरणों से दूर रहने की अपील की है, क्योंकि सरकारी सेनाएं इन इलाकों को वापस छीनने के लिए हथियारों और लड़ाकू विमानों की तैनाती की तैयारी कर रही हैं।
विश्लेषकों की मानें तो अगर हूथी विद्रोही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो इससे उनके समर्थक ईरान को अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध में एक बड़ी रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इससे न केवल एक और बड़ा व्यापारिक गलियारा प्रभावित होगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं।
रॉयटर्स की पहले की रिपोर्ट के अनुसार, यमन के तटीय इलाकों में हूथियों की इस आक्रामक बढ़त के पीछे सीधे तौर पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का मार्गदर्शन बताया जा रहा है, जो अमेरिका के साथ अपने युद्ध में एक नया मोर्चा खोलना चाहते हैं। यमनी सरकार, ईरानी और क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार ईरान ने पिछले हफ्ते हूथियों को सऊदी अरब पर हमले तेज करने का निर्देश दिया था और बदले में अधिक धन, हथियार तथा वरिष्ठ अधिकारी भेजने का वादा किया था। हालांकि ईरान सार्वजनिक रूप से हूथियों को अपना “प्रॉक्सी” मानने से इनकार करता रहा है, भले ही वह उन्हें अपना सहयोगी बताता है।
इस बीच सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के आसपास गुरुवार को सैटेलाइट तस्वीरों में धुआं दिखाई दिया, जो सऊदी अरब के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार कर कच्चा तेल निर्यात करने का एक अहम जरिया बन गई है। सऊदी अरब की घटना की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक अगस्त महीने में सऊदी कच्चे तेल की आपूर्ति में 23 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट दर्ज की गई, जो तीन दशकों से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से मांगी सीधी सैन्य मदद, अमेरिका ने कहा फिलहाल नहीं
रॉयटर्स की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बात कर हूथियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई की मांग की। यह खबर सबसे पहले एक्सियोस ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित की थी। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल हूथियों के खिलाफ सीधा सैन्य हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है, लेकिन अमेरिका खुफिया जानकारी साझा करने और लक्ष्य तय करने में मदद देने को तैयार है। इसी क्रम में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को तत्काल समन्वय वार्ता के लिए सऊदी अरब पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से ही सऊदी अरब में गैर-लड़ाकू सहायता (non-kinetic support) प्रदान कर रहे हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ ट्रंप प्रशासन अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की प्राथमिकता लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है, जबकि क्षेत्रीय साझेदारों को व्यापक संघर्ष के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जा रही है। यह तनाव जुलाई की शुरुआत से बढ़ना शुरू हुआ था, जब सऊदी अरब ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से लौट रहे एक ईरानी विमान को, जिसमें वरिष्ठ हूथी अधिकारी सवार थे, सना हवाई अड्डे पर उतरने से रोक दिया था।
रॉयटर्स के अनुसार, इस संकट को देखते हुए ओमान और ईरान की पहल पर खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक सोमवार को ओमान के सलाला शहर में होने वाली है, जिसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नौवहन के प्रबंधन के लिए एक अस्थायी समझौते पर सहमति बनाना है।
UAE ने ईरानी हमलों के डर से बदली 5-गीगावाट की AI डेटा सेंटर योजना
इन घटनाक्रमों के बीच रॉयटर्स की एक तीसरी खोजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) चुपचाप अपनी 5-गीगावाट की महत्वाकांक्षी AI डेटा सेंटर परियोजना की रूपरेखा बदल रहा है, जो अमेरिका के बाहर बनने वाली सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। मामले से परिचित छह सूत्रों के अनुसार, यह फैसला ईरान युद्ध के मद्देनजर महत्वपूर्ण अवसंरचना को कहां और कैसे बनाया जाए, इस पर नए सिरे से विचार करने के बाद लिया गया।
शुरुआत में अबू धाबी में करीब 26 वर्ग किलोमीटर (10 वर्ग मील) के एक ही परिसर के रूप में परिकल्पित इस परियोजना को अब पूरे UAE में फैले डेटा सेंटरों के एक नेटवर्क के रूप में विकसित किए जाने की संभावना है। चार सूत्रों के मुताबिक अधिकारी इन सुविधाओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाने के लिए वायु रक्षा प्रणाली लगाने और कुछ हिस्सों को भूमिगत बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।
यह परियोजना, जिसे “स्टारगेट UAE” नाम दिया गया है, G42 कंपनी के नेतृत्व में बनाई जा रही है, जो UAE के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और देश के राष्ट्रपति के भाई शेख तहनून बिन जायद अल नाह्यान के नियंत्रण में है। ओरेकल के चेयरमैन और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी लैरी एलिसन के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में 30 अरब डॉलर की लागत से 1-गीगावाट का कंप्यूट क्लस्टर बनाया जा रहा है, जिसके पहले 200 मेगावाट क्षमता के इसी साल चालू होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि मार्च में हुए ईरानी हमलों में UAE में अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के दो डेटा सेंटर और बहरीन में एक डेटा सेंटर क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके बाद से इस क्षेत्र में कंपनी की क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं अब तक बाधित हैं। G42 ने रॉयटर्स के सवालों के जवाब में कहा कि परियोजना योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है और इसकी विशिष्टताओं की इस पैमाने की महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए अपेक्षित सुरक्षा, मजबूती और परिचालन मानकों के अनुरूप लगातार समीक्षा की जा रही है। वहीं OpenAI ने कहा कि वह UAE के साथ मिलकर उसके AI विजन को साकार करने की दिशा में अच्छी प्रगति कर रहा है।
बड़ी तस्वीर: एक साथ तीन मोर्चों पर बढ़ता संकट
इन तीनों घटनाओं को साथ देखें तो साफ है कि मध्य-पूर्व में संघर्ष अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और अरब की आर्थिक-तकनीकी महत्वाकांक्षाओं तक फैल चुका है। एक तरफ हूथियों की बढ़त बाब अल-मंडेब जैसे अहम जलमार्ग को खतरे में डाल रही है, दूसरी तरफ सऊदी अरब अमेरिका से सीधी सैन्य मदद मांग रहा है लेकिन फिलहाल उसे सिर्फ खुफिया और तकनीकी समर्थन ही मिल पा रहा है। इसी बीच खाड़ी के सबसे बड़े आर्थिक-तकनीकी सहयोगियों में शुमार UAE भी अपनी अरबों डॉलर की AI महत्वाकांक्षाओं को युद्ध की आशंका के साये में नए सिरे से गढ़ने पर मजबूर हो गया है। आने वाले दिनों में सोमवार को ओमान में प्रस्तावित खाड़ी देशों और ईरान की बैठक इस पूरे संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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