दिल्ली-NCR में आज से थम रहे पहिए: पेट्रोल, डीज़ल और CNG के बढ़े दामों के खिलाफ 3 दिवसीय महा-हड़ताल शुरू

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में रहने वाले लोगों के लिए अगले तीन दिन सफर करना बेहद मुश्किल भरा हो सकता है। पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी (CNG) की लगातार बढ़ती कीमतों और किराए में बढ़ोतरी न होने के विरोध में ऑटो, कैब और कमर्शियल टैक्सी चालकों ने आज यानी 21 मई से 23 मई तक तीन दिवसीय महा-हड़ताल और ‘चक्का जाम’ का ऐलान किया है। ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ (AIMTC) और ‘चालक शक्ति यूनियन’ सहित दिल्ली-NCR के करीब 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया है।

 आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर

इस तीन दिवसीय हड़ताल के कारण दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस जाने वाले लोगों, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ आम जनता को भी ऑटो और कैब की भारी किल्लत से जूझना पड़ेगा।

 हड़ताल की मुख्य वजहें और चालकों की मांगें

चालक संगठनों ने अपनी इस हड़ताल के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण और मांगें रखी हैं:

  • ईंधन की कीमतों में लगातार उछाल: हाल ही में दिल्ली-NCR में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की एक और बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ ही दिन पहले इसमें ₹3 की वृद्धि देखी गई थी। वहीं, CNG के दामों में भी ₹3 प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
  • 15 सालों से नहीं बढ़ा किराया: ‘चालक शक्ति यूनियन’ के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर का कहना है कि दिल्ली-NCR में पिछले करीब 15 वर्षों से सिटी टैक्सी के किराए में कोई संशोधन (Revision) नहीं किया गया है। महंगाई और ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे ड्राइवरों के सामने परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है।
  • ऐप-आधारित कंपनियों द्वारा शोषण: यूनियनों का आरोप है कि ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी ऐप-आधारित कंपनियां ड्राइवरों का आर्थिक शोषण कर रही हैं और मनमाने तरीके से काम कर रही हैं।
  • पर्यावरण सेस का विरोध: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने दिल्ली सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों पर लगाए गए पर्यावरण मुआवजा सेस (Environment Compensation Cess) को भी वापस लेने की मांग की है।

 सरकार को बड़ी चेतावनी, 23 मई को सचिवालय का घेराव

यूनियनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले एक से दो सप्ताह के भीतर टैक्सी और ऑटो के किराए में बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

यूनियन का बयान: “बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों ने ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है। अगर सरकार ने जल्द ही टैक्सी ड्राइवरों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए सख्त नीतियां नहीं बनाईं, तो यह आंदोलन बड़े पैमाने पर देशव्यापी विरोध में बदल जाएगा।”

हड़ताल के आखिरी दिन यानी 23 मई को सभी चालक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली सचिवालय के घेराव और बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई है। हालांकि, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और स्थानीय प्रशासन मामले को सुलझाने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल चालक अपनी हड़ताल पर अड़े हुए हैं।

यहां से शेयर करें