West Asia on the 31st day of the war: अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हमलों की एक श्रृंखला शुरू की, जिसका घोषित उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसके परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाना था। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब कूटनीति की एक किरण दिखाई दे रही थी। 27 फरवरी को ओमान के विदेश मंत्री ने कहा था कि बातचीत में “सफलता मिली है” और ईरान ने यूरेनियम संवर्धन पर सहमति जता दी थी, लेकिन अगले ही दिन हमले शुरू हो गए।
मौत का तांडव: अब तक का नुकसान
अब तक की प्रारंभिक गणना के अनुसार ईरान में कम से कम 1,937 लोग मारे जा चुके हैं, इस्राइल में 19, अमेरिकी सैनिकों में 13 और खाड़ी देशों में 25 लोगों की मौत हुई है। पहले हफ्ते का सबसे दिल दहला देने वाला हमला दक्षिणी शहर मिनाब की एक लड़कियों के स्कूल पर हुआ, जिसमें ईरानी अधिकारियों के अनुसार 170 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर बच्चे थे। लेबनान में भी 2 मार्च से अब तक इस्राइली हमलों में कम से कम 1,189 लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं पेंटागन के अनुसार अमेरिकी सेना में 13 की मौत और 300 से अधिक घायल हुए हैं।
हमलों का दायरा: नौ देशों तक फैली आग
ईरान ने पलटवार करते हुए नौ देशों में हमले किए हैं — बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और UAE। एक ईरानी ड्रोन ने साइप्रस में ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने पर भी हमला किया। यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि अब तक ईरान में 11,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं। इनमें परमाणु ठिकाने, सैन्य अड्डे, विश्वविद्यालय, इस्पात संयंत्र और आवासीय इलाके शामिल हैं। UAE पर अकेले 414 बैलिस्टिक मिसाइलें, 15 क्रूज मिसाइलें और 1,914 ड्रोन दागे जा चुके हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद: इतिहास का सबसे बड़ा तेल संकट
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद कर दिया है जिससे दुनिया प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल से वंचित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा तेल संकट बताया है। ब्रेंट क्रूड युद्ध शुरू होने के बाद से 50% से अधिक महंगा हो चुका है। पहले हफ्ते तक तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई जो युद्ध से पहले 70 डॉलर थी। दूसरे हफ्ते में यह 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई।
राजनीतिक उलटफेर: खामेनेई की मौत, नए नेतृत्व की तलाश
अमेरिका और इस्राइल के हमलों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को मार डाला, साथ ही कई ईरानी अधिकारी और नागरिक भी मारे गए। इस्राइल ने 3 मार्च को ईरान की 84 सदस्यीय विशेषज्ञ सभा पर भी बमबारी की जो नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करने वाली थी।
31वें दिन की ताज़ा स्थिति: और खतरनाक हुए हालात
30वें दिन तेहरान में ज़ोरदार विस्फोट हुए। उत्तरी तेहरान के सआदत आबाद और पश्चिमी इलाकों में हमले में कई लोग घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने 28 मार्च को पहली बार इस युद्ध में इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागकर एक नया मोर्चा खोल दिया। इस्राइल एक साथ तीन मोर्चों पर लड़ रहा है — ईरान, लेबनान में हिज़्बुल्लाह और यमन से हूती।
अमेरिका ने 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 3,500 से अधिक सैनिकों को क्षेत्र में भेजा है जिनमें परिवहन और स्ट्राइक फाइटर विमान, एम्फीबियस असॉल्ट और सामरिक संपत्तियां शामिल हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकेर गलीबाफ ने अमेरिका पर ज़मीनी हमले की योजना का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। IRGC ने धमकी दी है कि जब तक अमेरिका ईरानी विश्वविद्यालयों पर हमलों की निंदा नहीं करता, वह खाड़ी देशों में अमेरिकी और इस्राइली विश्वविद्यालयों को निशाना बनाएगा। इसके लिए 30 मार्च की समयसीमा दी गई थी।
शांति की कोशिश: पाकिस्तान बना मध्यस्थ
पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किए और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने 29 मार्च को इस्लामाबाद में युद्ध समाप्त करने के लिए बैठक की। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कराने की पेशकश की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरान ने अमेरिका की 15 सूत्री मांगों में से अधिकांश को स्वीकार कर लिया है। लेकिन ईरान इस योजना को “अत्यधिक और वास्तविकता से परे” मानता है। एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने CNN को बताया कि युद्ध समाप्ति का फैसला तेहरान करेगा और ईरान लंबे समय तक आक्रामक अभियान जारी रखने में सक्षम है।
विशेषज्ञों की राय: लंबा खिंच सकता है युद्ध
विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव से अल्पकालिक युद्धविराम हो सकता है, लेकिन वास्तविक शांति अभी दूर है। इस्राइल ने किसी भी युद्धविराम का सबसे कम समर्थन किया है और सैन्य अभियान बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विश्लेषक बातू कोसकुन का कहना है कि यह युद्ध क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को दीर्घकालिक गुटीय राजनीति में बदल सकता है और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को कमज़ोर कर सकता है।
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