भारत में आम का पीक सीजन चल रहा है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह सीजन निराशाजनक साबित हो रहा है। जापान, जो भारतीय आमों के लिए एक प्रीमियम और हाई-वैल्यू मार्केट रहा है, ने 2026 सीजन के लिए भारत से ताजे आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला मार्च 2026 में जापानी क्वारेंटाइन अधिकारियों द्वारा उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) फैसिलिटी के निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर लिया गया है। योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन (Yokohama Plant Protection Association) ने 31 मार्च 2026 को जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद भारत द्वारा जारी इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट वाली आमों की खेपों को जापान स्वीकार नहीं करेगा। आयात तब तक सस्पेंड रहेगा, जब तक जापान को सुधारों पर संतोष नहीं हो जाता।
क्या है पूरा मामला?
जापान के प्लांट क्वारंटीन अधिकारियों ने VHT फैसिलिटी में फ्यूमिगेशन, डिसइन्फेक्शन सिस्टम और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स में गंभीर कमियां पाईं। VHT एक गैर-रासायनिक क्वारेंटाइन प्रक्रिया है, जिसमें आमों को नियंत्रित गर्म हवा और नमी वाले चैंबर में रखकर फ्रूट फ्लाई के अंडे, लार्वा आदि को नष्ट किया जाता है। जापान ने भारतीय आमों के लिए इस प्रक्रिया को अनिवार्य कर रखा है ताकि फ्रूट फ्लाई जैसे कीटों का खतरा न रहे। यह पहली बार नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया हो। 1986 में फ्रूट फ्लाई इन्फेक्शन के संदेह में जापान ने 20 साल तक बैन लगाए रखा था। 2006 में लंबी बातचीत, वैज्ञानिक अध्ययन और सुधारों के बाद यह बैन हटाया गया था। उसके बाद से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा, बंगनपल्ली जैसी प्रमुख किस्में जापान पहुंच रही थीं।
निर्यात पर क्या असर?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां सालाना लगभग 24 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन होता है। हालांकि कुल उत्पादन का निर्यात हिस्सा छोटा है (लगभग 5000 मीट्रिक टन), लेकिन जापान जैसे बाजार में मिलने वाला प्राइस अन्य देशों से दोगुना-तिगुना होता है। जापानी उपभोक्ता क्वालिटी, सेफ्टी और ट्रेसेबिलिटी के लिए प्रीमियम भुगतान करते हैं। इस बैन से अल्फांसो (हापुस), केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी चार प्रमुख निर्यात किस्में प्रभावित हुई हैं। पीक एक्सपोर्ट विंडो (अप्रैल-जून) में यह रोक निर्यातकों के लिए बड़ा नुकसान है। निर्यातकों का कहना है कि अगर एक फैसिलिटी में समस्या है तो पूरे देश पर बैन नहीं लगना चाहिए, जबकि जापान जीरो-रिस्क अप्रोच अपनाते हुए सख्ती बरत रहा है।
क्यों इतना सख्त है जापान?
फ्रेश फ्रूट्स अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सबसे अधिक रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स में से एक हैं। फ्रूट फ्लाई जैसे कीट अगर किसी देश में घुस गए तो वहां के पूरे कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देश सख्त सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) मापदंड अपनाते हैं।
भारत को अब क्या करना चाहिए?
VHT फैसिलिटीज का तुरंत अपग्रेडेशन और बेहतर मॉनिटरिंग, डिजिटल सर्टिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करना, जापानी अधिकारियों को दोबारा निरीक्षण के लिए आमंत्रित करना, कंप्लायंस और ट्रेनिंग पर फोकस। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और वाणिज्य मंत्रालय को इस मुद्दे को प्राथमिकता से सुलझाना होगा, ताकि प्रतिष्ठा का नुकसान न हो और अन्य बाजारों पर भी इसका असर न पड़े। यह घटना भारतीय आम निर्यात उद्योग के लिए एक चेतावनी है कि क्वालिटी कंट्रोल और फाइटोसैनिटरी मानकों में कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही बातचीत से यह अस्थायी रोक हट जाएगी और 20 साल पुराना विश्वास बहाल होगा।भारतीय आम दुनिया भर में अपनी अनुपम स्वाद और खुशबू के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में टिके रहने के लिए सख्त मानकों का पालन अनिवार्य है।

