लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संचालकों की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में रेस्टोरेंट, कैफे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए निर्धारित Smoking Area में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं परोसा जा सकता। कोर्ट ने हुक्का बार से जुड़ी 80 याचिकाओं को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र होने के बावजूद वहां हुक्का उपलब्ध कराना मौजूदा तंबाकू नियंत्रण कानूनों के अनुरूप नहीं है। अदालत के मुताबिक रेस्तरां, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का उपलब्ध कराना सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तथा सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध से जुड़े नियमों के विपरीत है।
80 संचालकों ने कार्रवाई को दी थी चुनौती
मामला उस समय हाईकोर्ट पहुंचा जब लखनऊ पुलिस की ओर से बिना लाइसेंस संचालित हुक्का बार के खिलाफ कार्रवाई की गई। फैशन टीवी कैफे समेत करीब 80 संचालकों ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वैध खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस रखने वाले रेस्तरां में निर्धारित स्मोकिंग एरिया में हुक्का उपलब्ध कराने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पहले से कार्रवाई
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और इंदिरापुरम समेत एनसीआर के उन इलाकों में भी हुक्का बार के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की संभावना है, जहां पुलिस और प्रशासन पहले से समय-समय पर छापेमारी करते रहे हैं।
खासकर रेस्टोरेंट और कैफे की आड़ में चलने वाले हुक्का कारोबार पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ सकती है। अब अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद संचालकों के लिए केवल अलग Smoking Area बनाकर हुक्का परोसने का विकल्प भी नहीं रहेगा।
पुलिस-प्रशासन की बढ़ेगी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। खासतौर पर उन कैफे और रेस्टोरेंट की जांच हो सकती है, जहां रेस्टोरेंट के लाइसेंस या अन्य वैध दस्तावेजों की आड़ में हुक्का सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।

