नोएडा: नोएडा के सेक्टर-33 स्थित इस्कॉन मंदिर के पास एलिवेटेड रोड पर मरम्मत के बावजूद दोबारा गड्ढा होने का मामला सामने आया है। सड़क की ऊपरी परत टूटने से नीचे का स्टील स्ट्रक्चर दिखाई देने की बात सामने आई है। इससे एलिवेटेड रोड के निर्माण की गुणवत्ता, मरम्मत कार्य और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने तकनीकी जांच शुरू करा दी है। अब IIT रुड़की और ब्रिज कॉरपोरेशन के इंजीनियर सड़क की सतह से लेकर नीचे बने ढांचे तक की जांच करेंगे।
मरम्मत के बाद दोबारा गड्ढा, निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
सेक्टर-33 में इस्कॉन मंदिर के पास एलिवेटेड रोड पर दोबारा गड्ढा होने की घटना ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मरम्मत के बाद भी सड़क की सतह फिर से टूट रही है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है। सड़क की ऊपरी परत का क्षतिग्रस्त होना केवल सतही समस्या है या इसके पीछे कोई तकनीकी खामी है, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
सबसे अहम सवाल यह है कि पहले मरम्मत किस आधार पर कराई गई थी और उसके बाद भी सड़क दोबारा क्यों उखड़ गई। क्या मरम्मत के दौरान सड़क की सभी तकनीकी जरूरतों का ध्यान रखा गया था या समस्या की जड़ तक पहुंचे बिना ही काम कराया गया? इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएंगे।
IIT रुड़की और ब्रिज कॉरपोरेशन के इंजीनियर करेंगे जांच
नोएडा प्राधिकरण ने मामले की तकनीकी गंभीरता को देखते हुए IIT रुड़की और ब्रिज कॉरपोरेशन के इंजीनियरों से जांच कराने की व्यवस्था की है। जांच में सड़क की ऊपरी सतह के साथ नीचे बने स्ट्रक्चर की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बार-बार गड्ढा होने की वजह क्या है और क्या इससे एलिवेटेड रोड के ढांचे को कोई नुकसान पहुंचा है। तकनीकी जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की मरम्मत और सुरक्षा से जुड़े कदम तय किए जा सकेंगे।
बैरिकेडिंग कर यातायात को सुरक्षित रखने की व्यवस्था
फिलहाल, नोएडा प्राधिकरण ने प्रभावित स्थान पर बैरिकेडिंग कराकर यातायात को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है। एलिवेटेड रोड पर किसी भी तरह की संरचनात्मक खामी की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों की सुरक्षा सीधे तौर पर सड़क की स्थिति पर निर्भर करती है।
ऐसे में तकनीकी जांच पूरी होने और आवश्यक सुधार किए जाने तक प्रभावित हिस्से की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। जांच में यदि स्ट्रक्चर को नुकसान मिलने की पुष्टि होती है, तो उसकी गंभीरता के अनुसार मरम्मत और सुरक्षा के उपाय करने होंगे।
बार-बार गड्ढा होने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की मांग
एलिवेटेड रोड पर मरम्मत के बाद दोबारा गड्ढा होने से संबंधित अधिकारियों और मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। सवाल है कि सड़क की स्थिति की निगरानी किस स्तर पर की गई, मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच किसने की और काम पूरा होने के बाद उसका तकनीकी निरीक्षण हुआ था या नहीं।
यदि जांच में निर्माण संबंधी खामी, घटिया मरम्मत या निगरानी में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालने वालों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। हालांकि, फिलहाल किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही साबित नहीं हुई है। इसके लिए तकनीकी रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
जांच रिपोर्ट से खुलेगा गड्ढे का कारण
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एलिवेटेड रोड पर बार-बार गड्ढा आखिर क्यों हो रहा है। क्या समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत तक सीमित है या नीचे बने ढांचे में भी कोई तकनीकी खामी मौजूद है? IIT रुड़की और ब्रिज कॉरपोरेशन के इंजीनियरों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोएडा प्राधिकरण के सामने अब दो अहम जिम्मेदारियां हैं—पहली, सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी, गड्ढा होने के वास्तविक कारण का पता लगाकर जिम्मेदारी तय करना। जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि मामला सामान्य सड़क मरम्मत की समस्या है या इसके पीछे कोई गंभीर तकनीकी खामी है।

