Trump’s Dual Crisis: वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय एक साथ दो बड़े राजनीतिक और संवैधानिक संकटों से जूझ रहे हैं एक तरफ ईरान के साथ चल रहा युद्ध है जिससे निकलने का कोई साफ रास्ता नज़र नहीं आ रहा, तो दूसरी तरफ जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की उनकी कोशिश एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टकरा सकती है।
ईरान युद्ध: छह महीने बाद भी कोई निकास नहीं
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का ईरान के खिलाफ युद्ध अब अपने छठे महीने में पहुंच चुका है और इस हफ्ते धमकियों व कूटनीति की जो हलचल देखी गई, उसने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति उस अलोकप्रिय संघर्ष से निकलने की कोशिश में लगातार तंग होते जा रहे हैं, जिसे उन्होंने शुरुआत में सिर्फ कुछ हफ्तों में खत्म होने का दावा किया था।
विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप अब दो मुश्किल विकल्पों के बीच फंसे हैं ईरान और ओमान के बीच बन रहा एक अंतरिम समझौता, जो तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर वह नियंत्रण दे देगा जो युद्ध से पहले उसके पास कभी नहीं था, या फिर अपनी चेतावनियों पर अमल करते हुए तनाव को और बढ़ाना, जिससे संकट और लंबा खिंचने का खतरा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युद्ध के लंबा खिंचने के साथ ट्रंप की धमकियों का ईरान पर कोई खास असर नहीं हुआ है, और विश्लेषकों का मानना है कि अब यह ज़्यादा संभावना बनती जा रही है कि सबसे बड़ी रियायत खुद राष्ट्रपति को ही देनी पड़ेगी।
एक पूर्व मध्य-पूर्व वार्ताकार आरोन डेविड मिलर ने रॉयटर्स से कहा कि यह विकल्पों की एक ऐसी सूची है जहां हर रास्ता मुश्किल है, लेकिन ट्रंप को शायद यह एहसास हो चुका है कि इस युद्ध को हमेशा के लिए नहीं खींचा जा सकता, और अब कुछ न कुछ झुकना ही होगा शायद जलडमरूमध्य में ईरान की नई हैसियत को स्वीकार करना।
अमेरिका के पास तीसरा विकल्प भी है मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति को बनाए रखना, यानी ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखना और जहाजों पर हमलों का जवाबी कार्रवाई से जवाब देना। लेकिन यह रास्ता भी ट्रंप को उस युद्ध से कोई सम्मानजनक निकास नहीं देता, जिसे उन्होंने अप्रैल के मध्य तक खत्म हो जाने का अनुमान जताया था। इसके अलावा, नवंबर में होने वाले अहम मध्यावधि चुनावों से पहले किसी नए हवाई हमले का फैसला ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है।
जन्मसिद्ध नागरिकता पर फिर टकराव
दूसरी बड़ी खबर वॉशिंगटन से ही है, जहां रॉयटर्स के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए दो नए, पहले से संकुचित कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिससे उन्होंने संविधान के एक प्रावधान को फिर चुनौती दी है — यह वही मुद्दा है जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनकी पिछली कोशिश को खारिज कर चुका है।
अप्रवासन पर सख्त रुख अपनाने वाले रिपब्लिकन राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करना लंबे समय से शामिल रहा है, और व्हाइट हाउस ने खासतौर पर “बर्थ टूरिज्म” को निशाना बनाया है यानी वह प्रवृत्ति जिसमें विदेशी गर्भवती महिलाएं सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका आती हैं।
30 जून को सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद ट्रंप ने कांग्रेस से कानून बनाने की अपील की थी, लेकिन गुरुवार को उन्होंने कार्यकारी आदेशों का रास्ता चुना जो नीति तो तय करते हैं मगर कांग्रेस से पारित कानूनों जितना कानूनी वजन नहीं रखते।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की पहले की कोशिश को असंवैधानिक करार देकर खारिज कर दिया था। लेकिन ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह नया आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सीमाओं में नहीं आता, जिससे उसे यह विस्तार करने की छूट मिलती है कि कौन-कौन नागरिकता के दायरे में आएगा।
ओवल ऑफिस में हुए हस्ताक्षर समारोह में व्हाइट हाउस सहयोगी स्टीफन मिलर ने कहा कि “बर्थ टूरिज्म की प्रथा को इस आदेश पर हस्ताक्षर होते ही प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब दुनिया में कोई भी इस धोखाधड़ी वाले मकसद के लिए वीज़ा हासिल नहीं कर सकता।”
CBS न्यूज़ के अनुसार, फिलहाल विदेशी राजनयिकों के बच्चे पहले से ही जन्म के आधार पर नागरिकता के हकदार नहीं हैं, लेकिन गुरुवार का आदेश इस छूट के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ा सकता है। वहीं प्यूर्टो रिको जैसे अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे लोग फिलहाल संघीय कानून के तहत नागरिक माने जाते हैं।
Just The News की रिपोर्ट के अनुसार, नए आदेश के तहत उन बच्चों की श्रेणी बढ़ा दी गई है जो जन्म के आधार पर स्वतः नागरिकता के पात्र नहीं होंगे, जिनमें “अमेरिका के दुश्मन विदेशी नागरिकों, विदेशी आतंकवादी संगठनों के सदस्यों और विदेशी सरकारों की ओर से लॉबिंग व कार्य करने वाले बड़े समूहों” के बच्चे शामिल हैं।
खुद राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पर सीधा निशाना साधा। Just The News के मुताबिक ओवल ऑफिस में ट्रंप ने कहा, “जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर हमें सुप्रीम कोर्ट का एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण फैसला मिला था। यह करीबी फैसला था, लेकिन बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण। तो हम अब कुछ बदलाव कर रहे हैं क्योंकि यह बहुत अनुचित है।”
कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
रॉयटर्स के मुताबिक, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए यह स्पष्ट नहीं है कि इन कार्यकारी आदेशों का कितना असर होगा, वहीं आप्रवासी अधिकार संगठनों ने इसे अदालत के फैसले से बचने की कोशिश करार दिया है। अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (ACLU) ने कहा कि यह अदालत में टिक नहीं पाएगा।
पूर्व बाइडेन प्रशासन अधिकारी डेबोरा फ्लाइशेकर ने कहा — “सिर्फ पांच हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि जन्मसिद्ध नागरिकता किसी राष्ट्रपति की मर्ज़ी पर निर्भर नहीं है, यह 150 साल से अधिक समय से चली आ रही एक संवैधानिक गारंटी है। आज के कार्यकारी आदेश उस फैसले से बचने की एक कोशिश भर हैं।” रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह भी बताया गया कि अगर कांग्रेस अमेरिकी क्षेत्रों में स्वतः नागरिकता खत्म करने वाला प्रस्तावित कानून पारित करती है, तो इन आदेशों का असर वहां जन्मे लोगों पर भी पड़ सकता है। ट्रंप के नए आदेशों को कानूनी चुनौती मिलने की पूरी संभावना है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन इस समय दो मोर्चों पर एक साथ दबाव झेल रहा है विदेश नीति के स्तर पर ईरान युद्ध से कोई सम्मानजनक निकास न मिल पाना, और घरेलू स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के साथ संवैधानिक टकराव जारी रहना। आने वाले हफ्तों में दोनों ही मुद्दों पर नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति की राजनीतिक साख के लिए बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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