पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान (23 और 29 अप्रैल) के ठीक बाद गुरुवार देर रात कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम में कथित ईवीएम टैम्परिंग को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने हाई वोल्टेज ड्रामा रचा। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद स्ट्रॉन्गरूम पहुंचकर निगरानी की, पार्टी कार्यकर्ताओं को 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया और ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग (ईसीआई) और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि गतिविधि पोस्टल बैलट के रूटीन सेग्रीगेशन का हिस्सा थी। देर रात तक चला यह विवाद अंततः एंटी-क्लाइमेक्स पर समाप्त हो गया।
घटनाक्रम: रात का ड्रामा कैसे शुरू हुआ
दूसरे चरण के मतदान के बाद गुरुवार शाम लगभग 8:30 बजे टीएमसी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें खिदिराम अनुशीलन केंद्र (नेटाजी इंडोर स्टेडियम के पास) के स्ट्रॉन्गरूम में ‘संदिग्ध गतिविधि’ दिखाई दे रही थी। पार्टी ने दावा किया कि उत्तर कोलकाता के सात विधानसभा क्षेत्रों के ईवीएम रखे गए इस सेंटर में बिना पार्टी प्रतिनिधियों के मौजूदगी के बैलट बॉक्स खोले जा रहे हैं।टीएमसी उम्मीदवार और मंत्री डॉ. शशि पांजा तथा प्रवक्ता कुणाल घोष ने नेटाजी इंडोर स्टेडियम के बाहर धरना शुरू कर दिया। टीएमसी ने ‘बीजेपी और ईसी के गठजोड़’ का आरोप लगाते हुए इसे ‘दिनदहाड़े लूट’ बताया और ममता बनर्जी के पहुंचने की घोषणा की। ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंट्स को सभी स्ट्रॉन्गरूम पर राउंड-द-क्लॉक नजर रखने का आह्वान किया और कहा कि अगर जरूरी हुआ तो वे खुद पूरी रात जागरण करेंगी। इस बीच, ममता बनर्जी अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर (बाबानिपुर) के सखावत मेमोरियल गर्ल्स हाई स्कूल स्ट्रॉन्गरूम पहुंचीं और वहां करीब चार घंटे तक रुकी रहीं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अंदर जाने में बाधा डाली गई और केंद्रीय बलों तथा पुलिस पर दबाव का आरोप लगाया। बाहर टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए, नारेबाजी हुई और सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: ‘कोई टैम्परिंग नहीं’
देर रात को राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सारी बातें साफ कीं। उन्होंने बताया: सभी राजनीतिक दलों को सुबह 10 बजे ईमेल से सूचना दी गई थी कि दोपहर 4 बजे पोस्टल बैलट का सेग्रीगेशन शुरू होगा। स्ट्रॉन्गरूम में ईवीएम सील्ड और लॉक हैं; गतिविधि केवल पोस्टल बैलट वाले कमरे में हो रही थी, जहां टॉर्च की रोशनी में काम चल रहा था (स्ट्रॉन्गरूम में बिजली नहीं होती)। सीसीटीवी लगे हैं, फुटेज बाहर से मॉनिटर की जा सकती है। तीन स्तर की सुरक्षा (केंद्रीय बल, राज्य पुलिस आदि) है। टीएमसी उम्मीदवारों को दोपहर 3:30 बजे बाहर भेजा गया था, लेकिन प्रक्रिया नियमों के अनुसार थी।
जिला निर्वाचन अधिकारी स्मिता पांडे ने भी पुष्टि की कि जो लोग दिख रहे थे, वे अधिकृत चुनाव अधिकारी थे। कोई सील नहीं तोड़ी गई और कोई अनधिकृत व्यक्ति अंदर नहीं था। धरना देने वाले नेताओं से बातचीत के बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे अतिरिक्त सीसीटीवी लगाए जाएंगे। ममता बनर्जी आधी रात के बाद स्ट्रॉन्गरूम से बाहर आईं और गिनती प्रक्रिया में किसी भी हेरफेर के खिलाफ चेतावनी दी। उत्तर कोलकाता में धरना धीरे-धीरे समाप्त हो गया।
बीजेपी की प्रतिक्रिया: ‘हार का डर, आउटगोइंग सीएम’
बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को ‘पूरी तरह बेबुनियाद’ और ‘हार की आशंका से उपजी अफवाह’ बताया। पार्टी नेता सुवेंदु अधिकारी और अन्य ने ममता को ‘आउटगोइंग चीफ मिनिस्टर’ कहकर तंज कसा। बीजेपी उम्मीदवार तपस रॉय आदि ने कहा कि टीएमसी हार का बहाना तैयार कर रही है। बाहर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव रहा, लेकिन सुरक्षा बलों ने स्थिति नियंत्रित रखी। एग्जिट पोल में बीजेपी को भारी बहुमत (कुछ सर्वे में 190+ सीटें) दिखाए जाने के बाद यह विवाद और तीखा हो गया था। टीएमसी ने एग्जिट पोल को खारिज कर दिया है।
आम जनता और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कोलकाता और राज्य भर में आम लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी गईं। कुछ टीएमसी समर्थक ईवीएम सुरक्षा पर सवाल उठा रहे थे और ममता के ‘सतर्क रहो’ वाले संदेश का समर्थन कर रहे थे। वहीं, कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर इसे ‘पहले से हार स्वीकार करने जैसा ड्रामा’ बताया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पहले वोटिंग के दौरान टेपिंग के आरोप लगे, अब स्ट्रॉन्गरूम पर। मतगणना (4 मई) तक इंतजार करें, सच्चाई सामने आएगी।” विपक्षी दलों और कुछ स्वतंत्र टिप्पणीकारों ने ईसीआई की निष्पक्षता पर भरोसा जताया और कहा कि तीन स्तर की सुरक्षा और सीसीटीवी होने के बावजूद ऐसे आरोप लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। टीएमसी ने फॉर्म 17C डेटा सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
क्या आगे?
4 मई को मतगणना होनी है। ईसीआई ने सभी स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा बढ़ा दी है और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई है। टीएमसी ने कानूनी रूप से निगरानी जारी रखने की बात कही है, जबकि बीजेपी ने इसे ‘डिफीट नरेटिव’ करार दिया है। यह घटना पश्चिम बंगाल की सियासी जंग को और तीखा बनाती दिख रही है, जहां उच्च मतदान प्रतिशत (92.93%) के बावजूद ईवीएम को लेकर बार-बार उठने वाले सवाल मतगणना के दिन तक तनाव बनाए रख सकते हैं। फिलहाल, रात का ‘घेराबंदी’ वाला ड्रामा बिना किसी ठोस सबूत के शांत हो गया।

