दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार का बिगुल बजाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब महाराष्ट्र की ‘ज्ञान नगरी’ पुणे में अपनी हुंकार भरने जा रही है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 10 जून को सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर घोषणा करते हुए बताया कि पर्यावरण एवं शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 11 जून को पुणे में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। इस घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर देशभर में उत्सुकता और बढ़ गई है। यह विरोध प्रदर्शन 11 जून को शाम 6 बजे सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर के पास डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुल पर आयोजित किया जाएगा।
क्या है माँग?
नीट, CBSE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित धांधली और पेपर लीक मामलों को लेकर CJP केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रही है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जो सड़न आई है, उसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जंतर-मंतर से पुणे तक का सफर
6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में सोनम वांगचुक ने मंच से संबोधित करते हुए इसे केवल शिक्षा का नहीं बल्कि व्यापक व्यवस्थागत सुधार का आंदोलन बताया था। अभिजीत दीपके, जो शनिवार को अमेरिका से भारत लौटे थे, सीधे हवाई अड्डे से दिल्ली के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब पार्टी ने शिक्षा के गढ़ कहे जाने वाले पुणे को अपना अगला केंद्र बनाया है।
कौन-कौन होंगे मंच पर?
अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के साथ पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। CJP के मुख्य प्रवक्ता खोजी पत्रकार सौरव दास हैं, जबकि विजेता दहिया और आशुतोष रांका भी पार्टी की ओर से सक्रिय भूमिका में हैं।
पुणे क्यों?
आयोजकों के अनुसार पुणे को ज्ञान और विचारों का केंद्र माना जाता है और देशभर से लाखों विद्यार्थी यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यह शहर इस आंदोलन के लिए सबसे उपयुक्त मंच है।
सार्वजनिक आह्वान
CJP के आह्वान पत्र में कहा गया है कि यह आंदोलन फुले-शाहू-आंबेडकर के विचारों और महात्मा गांधी के मार्ग पर चलते हुए जाति, धर्म, पंथ और भाषा से ऊपर उठकर किया जाएगा। सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, युवाओं और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की गई है। 11 जून को होने वाला यह प्रदर्शन न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर चल रही बहस के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुणे में CJP के आह्वान पर कितने युवा सड़कों पर उतरते हैं।

