‘द वान’ ने बिहार में सिनेमाघरों को बनाया छठ उत्सव जैसा माहौल, दर्शकों ने जूते उतारकर दिखाई श्रद्धा

पटना/मुजफ्फरपुर। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वान’ को लेकर बिहार में एक अनोखा सांस्कृतिक नजारा देखने को मिल रहा है। राज्यभर के सिनेमाघरों में फिल्म देखने पहुंचे दर्शक इसे महज एक फिल्म की तरह नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा के उत्सव की तरह अनुभव कर रहे हैं। कई जगहों पर दर्शकों को हॉल में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारते देखा गया, वहीं पारंपरिक परिधान पहनी महिलाओं ने सिनेमाघरों के अंदर ही ठेकुआ बांटा। 400 साल पुराने वान देवी मंदिर की कहानी पर आधारित यह फिल्म 25 सितंबर को रिलीज हुई थी। मुजफ्फरपुर के मशहूर सिने गैलेक्सी हॉल में कई दर्शक सम्मानस्वरूप ऑडिटोरियम में जाने से पहले अपने जूते बाहर उतारते नजर आए।

आखिर दर्शकों को क्यों छू गई यह फिल्म?

इसका जवाब सीधा है — बिहार के दर्शकों को फिल्म की कहानी और परिवेश में अपनी ही संस्कृति की झलक दिखाई दे रही है। एक मुख्यधारा की हिंदी फिल्म में अपनी लोक परंपरा को इस तरह पर्दे पर देखना उनके लिए भावनात्मक अनुभव बन गया है।

यह जुड़ाव तब और गहरा हो गया जब फिल्म का गीत ‘छठी मैया’ रिलीज हुआ, जिसे बिहार की कोकिला और पद्म भूषण से सम्मानित दिवंगत गायिका शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही सिनेमाघरों में शारदा सिन्हा की आवाज गूंजती है, दर्शक भावुक हो उठते हैं। एक वायरल वीडियो में एक बच्चा हाथ जोड़े हुए उस दृश्य को देखता नजर आ रहा है, जिसमें तमन्ना भाटिया का किरदार पारंपरिक छठ पूजा करते हुए दिखाया गया है।

ट्रेड एनालिस्ट ने साझा किया वीडियो

इस बदलते माहौल को लेकर ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने भी एक वीडियो साझा किया, जिसमें तिलक लगाए और पारंपरिक परिधान पहने महिलाएं सिनेमाहॉल के अंदर गीत की धुन पर ताली बजाती नजर आ रही हैं। उन्होंने लिखा कि आस्था इस फिल्म की भावनात्मक धुरी बन गई है, और छठी मैया गीत का दृश्य भक्ति, भावना और विश्वास को खूबसूरती से पिरोते हुए दर्शकों के दिल को छू रहा है।

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