सपा का ‘अखाड़ा’ बना मासिक बैठक, नोएडा शहर में शहरी वोट बैंक को लेकर गहरी आंतरिक कलह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर नोएडा में समाजवादी पार्टी की मासिक बैठक रविवार को नेताओं की आपसी वैचारिक लड़ाई और निजी आरोप‑प्रत्यारोप का दंगल बनकर रह गई। पार्टी के भीतर चुनावी जिम्मेदारी, नेतृत्वशैली और पैसों के इस्तेमाल को लेकर उछले आरोपों के बाद अब कार्यकर्ताओं में यह चिंता बढ़ रही है कि खुला घमासान नोएडा में सपा की चुनावी संभावनाओं को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

नोएडा महानगर में खुला मोर्चा

रविवार को नोएडा में सुरक्षित स्थल पर आयोजित सपा की मासिक बैठक के दौरान नोएडा महानगर के पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में कई वरिष्ठ नेताओं ने वर्तमान महानगर अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नाराज गुट का दावा है कि अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी के शहरी वोट बैंक में कोई ठोस वृद्धि नहीं हुई है, जबकि उन्हें विशेष रूप से नोएडा के सेक्टरों, सोसाइटियों और झुग्गी‑झोपड़ियों में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस मुद्दे पर तर्क‑वितर्क बढ़ते हुए कई नेताओं ने यह तर्क पेश किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के सहारे भी पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम वोट मिले, जबकि तब सपा अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में थी। इसे “संगठनात्मक विफलता” बताते हुए कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से वर्तमान महानगर अध्यक्ष के इस्तीफे तक की मांग कर दी।

अध्यक्ष का सीधा पलटवार: भाजपा ‘एजेंट’ और ‘पेड न्यूज़’

आरोपों से घिरे महानगर अध्यक्ष ने बैठक में तीखा पलटवार करते हुए खुद पर हमला करने वाले नेताओं को “भारतीय जनता पार्टी से मिला हुआ” बताया और चेतावनी दी कि यदि विरोध जारी रहा, तो वे एक‑एक करके ऐसे ‘जातिवादी’ व ‘ग्रामीण नेताओं’ की पोल खोल देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित संस्था द्वारा आयोजित मसूरी यात्रा में कुछ सपा नेता शामिल हुए थे, जिन्होंने बाद में पाँच‑पाँच लाख रुपये लेकर भाजपा प्रत्याशियों की मदद करने का काम किया। मीडिया पर भी निशाना साधते हुए अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी के ही कुछ नेता पत्रकारों को प्रति खबर 5000‑5000 रुपये देकर उनके खिलाफ और पार्टी विरोधी खबरें छपवा रहे हैं। इस तरह की बातें बैठक में आग में घी की तरह जारी रहीं, जिस कारण बैठक जल्द ही आपसी टकराव वाला माहौल बन गई।

12 लाख रुपये और ‘स्टूडियो’ का विस्फोटक आरोप

बैठक से कुछ घंटे बाद मामला और उलझता गया। एक नेता ने मीडिया से बात करते हुए ऑफ द रिकॉर्ड कहा कि नोएडा जिले के एक कद्दावर नेता पर भाजपा के एक एमएलसी से अपने स्कूल के लिए 12 लाख रुपये अनुदान लेने का आरोप है। इससे भी बड़ा आरोप यह लगाया गया कि इसी पैसे से स्कूल परिसर में एक आधुनिक स्टूडियो बनाया गया है, जिसका उपयोग जातिवादी संदेशों के साथ‑साथ “मिशन‑विशेष” के लिए सोशल मीडिया वीडियो बनाने में किया जा रहा है। अगर यह आरोप सही माने जाते हैं, तो सपा पदानुक्रम के भीतर वित्तीय गड़बड़ी और राजनीतिक “संरक्षण” के आरोप भी इस आंतरिक विवाद से जुड़े हुए हैं। इन खुलासों से नोएडा इकाई में नेताओं के बीच विश्वास की दरार और गहरी होती दिख रही है।

कार्यकर्ताओं की मांग: अखिलेश से तुरंत हस्तक्षेप

राजनीतिक स्तर पर यह आंतरिक घमासान न सिर्फ नेताओं के बीच, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच भी चिंता फैला रहा है। विरोध कर रहे गुट का कहना है कि यदि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जल्द ही नोएडा इकाई की स्थिति पर हस्तक्षेप नहीं किया और मौजूदा नेतृत्व में परिवर्तन नहीं किया, तो आगामी विधानसभा चुनावों में शहरी वोट बैंक खोने का खतरा है। इस गुट की राय है कि नोएडा‑जैसी शहरी सीट पर संगठनात्मक सुधार और नए चेहरों को आगे बढ़ाना चुनावी रणनीति की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सपा कार्यकर्ताओं का यह भी तर्क है कि भाजपा के लिए नोएडा इकाई में उपजी खुली आंतरिक कलह चुनावी फायदे का कारण बन सकती है, खासकर जब पार्टी ने नोएडा और गाजियाबाद जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों को 2027 के चुनाव की रणनीति की केंद्रित जमीन बताया है।

नोएडा की चुनावी अहमियत और राजनीतिक महत्व

गौरतलब है कि नोएडा विधानसभा क्षेत्र शहरी मतदाताओं के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ आईटी पेशेवर, कॉर्पोरेट कर्मचारी और मध्यमवर्गीय आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पार्टी हाईकमान इस आंतरिक कलह पर लगाम नहीं लगाता, तब तक नोएडा में सपा की चुनावी संभावनाएँ गंभीर रूप से प्रभावित रह सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा के लिए नोएडा में विपक्ष की यह खुली राजनीतिक दरार “सुनहरा अवसर” साबित हो सकती है, वहीं सपा हाईकमान के लिए यह टेस्ट केस बन गया है कि वह शहरी संगठन में न केवल नेतृत्व बदलकर, बल्कि संस्कृति और चुनावी रणनीति को भी नए सिरे से आकार देने का संकेत दे सकती है।

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