स्मार्ट मीटर का दर्द: नोएडा में बिजली उपभोक्ता त्राहिमाम, पहले से तीन गुना तक आ रहे बिल — बजट बिगड़ा, शिकायतें अनसुनी

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा समेत पश्चिमांचल के कई जिलों में बिजली विभाग द्वारा लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर आम जनता के लिए किसी आफत से कम नहीं बन रहे। जिन मीटरों को “डिजिटल क्रांति” और “पारदर्शी बिलिंग” के नाम पर लगाया गया था, वही अब घर-घर में रोष और परेशानी का सबब बन चुके हैं। स्मार्ट बिजली मीटरों की स्थापना के चलते नागरिकों में व्यापक चिंताएँ पैदा हो गई हैं, जिनमें बढ़े हुए बिल, अनिवार्य प्रीपेड उपयोग को लेकर भ्रम और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप प्रमुख हैं। 

तीन गुना तक बढ़ा बिजली का बिल, हर तबके में आक्रोश

अलीगढ़ की 62 वर्षीय ओमवती देवी जैसी तमाम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले 900 से 1200 रुपये का महीने का बिल आता था, अब सात हजार रुपये आ रहा है। यह हाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि सैकड़ों उपभोक्ता इस बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। शहर के कई बिजलीघरों पर सुबह से ही बिल जमा करने के लिए उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ रही है। उपभोक्ताओं ने मीटर तेज चलने, गलत रीडिंग और लोड बढ़ने जैसी समस्याएं बताई हैं। मीटर की जांच या शिकायत दर्ज कराने पर विभागीय अधिकारी फोन नहीं उठाते या कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलता।

नोएडा के सेक्टरों में तकनीकी खराबी, मरीजों की ऑक्सीजन तक बाधित

नोएडा के कई सेक्टरों में विद्युत निगम द्वारा लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर में तकनीकी खराबी आने से हजारों उपभोक्ताओं के घर घंटों बिजली बाधित रही। सेक्टर 105 पॉकेट ए में दोपहर गई बिजली देर शाम तक नहीं आई। स्मार्ट मीटर में बिजली आ रही थी, लेकिन पावर न होने से सारे विद्युत उपकरण बंद पड़े रहे। इस गड़बड़ी के चलते गंभीर मरीजों की ऑक्सीजन सप्लाई तक बाधित रही।

FONRWA का आरोप — आश्वासन देकर लगाए मीटर, अब पलट गया विभाग

फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (FONRWA) ने खासकर सेक्टर 34 में घरों के बीच असंतोष को उजागर किया है। कई घरों को कथित तौर पर असामान्य रूप से ज़्यादा बिल मिल रहे हैं।  FONRWA के मुख्य अभियंता PVVNL नोएडा को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया गया कि मीटर लगाने के दौरान निवासियों को बताया गया था कि प्रीपेड मीटरिंग एक वैकल्पिक सुविधा होगी। हालांकि, अब उन्हें एसएमएस अलर्ट मिल रहे हैं जिससे प्रीपेड भुगतान अनिवार्य हो गया है। इससे कई निवासी परेशान हैं, खासकर तब जब उन्होंने पहले ही UPPCL के पास दो महीने की सिक्योरिटी जमा कर दी थी।  FONRWA के महासचिव केके जैन ने कहा कि जब तक बिलिंग में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं का विश्वास सुनिश्चित नहीं किया जाता, स्मार्ट मीटर विरोध का विषय बने रहेंगे।

होली से पहले 77 हजार घरों में अंधेरा — विभाग की कार्रवाई से भारी रोष

उत्तर प्रदेश में होली के त्योहार से ठीक पहले बिजली विभाग की कार्रवाई ने हजारों परिवारों को अंधेरे में धकेल दिया। प्रदेश के लगभग 76,785 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। Jaihindjanab

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं का बैलेंस पॉजिटिव होने के बावजूद उनकी बिजली काट दी गई। नोएडा और गाजियाबाद में कई लोगों ने शिकायत की कि मीटर रिचार्ज करने के बाद भी बैलेंस अपडेट नहीं हुआ और खाते में राशि माइनस ही दिखाई गई।

14 जिलों में प्रीपेड मोड लागू, ग्रामीण सबसे अधिक बेहाल

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, रामपुर और बिजनौर — इन 14 जिलों में स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या या ऑनलाइन पेमेंट के साधन न होने की वजह से प्रीपेड मीटर का रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है।

50 लाख उपभोक्ता अचानक बन गए “बकायेदार”

उत्तर प्रदेश में 50 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता अचानक से कर्जदार हो गए हैं। कई उपभोक्ताओं पर एक लाख रुपये या इससे भी अधिक का बकाया हो गया है। मीटर बदलते ही इन सभी उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर खाते का बैलेंस नेगेटिव हो गया।

क्यों तेज चलते हैं स्मार्ट मीटर? — जानें असली वजह

बिजली कंपनी के अनुसार, उपभोक्ताओं को उनके द्वारा लिए गए लोड से अधिक बिजली की खपत होने पर अतिरिक्त शुल्क और जुर्माना देना होता है। अगर किसी उपभोक्ता ने दो किलोवाट का लोड लिया है और किसी दिन आधे घंटे के लिए उनका लोड दो किलोवाट से ऊपर चला जाता है, तो उन्हें प्रति अतिरिक्त किलोवाट के हिसाब से शुल्क और जुर्माना देना होगा और यह राशि उपभोक्ता के प्रीपेड बैलेंस से अपने आप कट जाती है।

गरीबों पर अतिरिक्त ₹100 मासिक शुल्क का बोझ

बिजली कंपनियां स्मार्ट मीटर की लागत की भरपाई के लिए मीटर रेंट को मासिक बिलिंग टैरिफ में जोड़ने की योजना बना रही हैं। एक गरीब परिवार जो महीने का 300 से 400 रुपये का बिजली बिल मुश्किल से भर पाता है, उसके लिए 100 रुपये का अतिरिक्त मीटर शुल्क 25 से 30 प्रतिशत की सीधी वृद्धि होगी।

कानून का उल्लंघन — बिना सहमति मीटर बदलना गैरकानूनी

बिना उपभोक्ता की सहमति के मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। उपभोक्ता परिषद ने याद दिलाया कि जन्माष्टमी के दौरान भी ऐसी ही दिक्कतें आई थीं, जिसके बाद इस योजना को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था।

टेंडर में भी विवाद — ₹18,885 करोड़ की जगह ₹27,342 करोड़ का टेंडर

केंद्र सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना के लिए 18,885 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन पावर कॉरपोरेशन ने 27,342 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया।  इस पर नियामक आयोग में बड़ी लड़ाई होने की संभावना है।

विरोध का स्वर तेज — किसान और बिजली कर्मचारी भी मैदान में

बिजली के निजीकरण और उपभोक्ताओं के घरों पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की जबरदस्ती को लेकर किसानों और बिजली कर्मचारियों ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एंप्लॉइज एंड इंजीनियर्स के बीच समझौते के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिना उनकी सहमति के जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। विरोध कर रहे लोगों ने अधिकारियों से कहा कि जब तक स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक वे इसे लगाने की अनुमति नहीं देंगे।

दर्दनाक मामला: गलत बिल का सदमा — 55 वर्षीय की मौत

इटावा के भरथना कस्बे में 55 वर्षीय शिवकुमार कश्यप के यहाँ सितंबर 2025 में स्मार्ट मीटर लगाया गया था। तब से उनका बिल लगातार बढ़ रहा था। महज तीन माह में एक लाख साठ हजार रुपये का बिजली बिल आने का मैसेज देखकर वह गहरे सदमे में आ गए और बिल संशोधन के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। विभागीय अधिकारियों ने समाधान नहीं निकाला और अंततः उनकी हृदयगति रुक जाने से दर्दनाक मौत हो गई।

विभाग का रुख — जागरूकता अभियान तक सीमित

विभाग की ओर से उपभोक्ताओं की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई की बजाय स्मार्ट मीटर पखवाड़ा अभियान चलाकर उपभोक्ताओं को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और हेल्प डेस्क लगाए गए।  लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उपभोक्ताओं की परेशानियां बदस्तूर जारी हैं।

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