प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा, करेली समेत कई इलाकों में बाढ़ का खतरा; ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार पर उठे सवाल

प्रयागराज। गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। शहर के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है और करेली समेत कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि बुधवार रात तक दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ था और सभी बांध सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सलोरी कछार पहुंचकर बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी रखें और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जाए।

चार घंटे में यमुना का जलस्तर 8 सेंटीमीटर बढ़ा

बुधवार रात 8 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में पिछले चार घंटे के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रयागराज में बाढ़ का खतरे का निशान 84.734 मीटर निर्धारित है। नैनी में यमुना का जलस्तर 82.47 मीटर दर्ज किया गया। यहां पिछले चार घंटे में जलस्तर में 8 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.86 मीटर और छतनाग में 82.03 मीटर दर्ज किया गया। एसटीपी बक्शी बांध पर जलस्तर 82.58 मीटर रहा। इन स्थानों पर भी पिछले चार घंटे में पानी बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

निचले इलाकों में बढ़ी चिंता

गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। करेली समेत शहर के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां बाढ़ और जलभराव की आशंका बढ़ गई है। इससे स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है।

हालांकि फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन नदियों के लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए आने वाले समय में स्थिति गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है।

महाकुंभ के दौरान हुए विकास कार्यों पर भी सवाल

प्रयागराज में मौजूदा जलभराव और पानी निकासी की स्थिति को लेकर महाकुंभ के दौरान हुए विकास कार्यों पर भी सवाल उठने लगे हैं। महाकुंभ के आयोजन से पहले शहर के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम किए गए थे। सरकार की ओर से शहर के विकास पर बड़ी राशि खर्च किए जाने का दावा किया गया था।

अब गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद शहर की जल निकासी व्यवस्था को पर्याप्त रूप से मजबूत किया जा सका?

विपक्ष और सरकार के आलोचक इसे ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की व्यवस्था पर सवाल के तौर पर देख रहे हैं। केंद्र में बीजेपी की सरकार, उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार और प्रयागराज में बीजेपी का मेयर होने के बावजूद यदि शहर के निचले इलाकों में जल निकासी की समस्या गंभीर रूप लेती है तो स्थानीय स्तर पर व्यवस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के सामने चुनौती

प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात ऐसे समय में बने हैं जब शहर में महाकुंभ से पहले और उसके दौरान बड़े पैमाने पर विकास कार्य कराए गए थे। ऐसे में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि निचले इलाकों में जलभराव को नियंत्रित किया जाए और लोगों को सुरक्षित रखा जाए। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले घंटों में गंगा और यमुना के जलस्तर में होने वाली बढ़ोतरी या कमी से ही स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होगी।

प्रशासन अलर्ट, लेकिन उठ रहे हैं व्यवस्था पर सवाल

डीएम मनीष कुमार वर्मा का निरीक्षण और अधिकारियों को दिए गए निर्देश यह संकेत दे रहे हैं कि प्रशासन संभावित बाढ़ को लेकर अलर्ट है। लेकिन दूसरी ओर, शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति ने प्रयागराज की ड्रेनेज और जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर बहस छेड़ दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर करोड़ों रुपये खर्च कर शहर के विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया था, तो बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच कई इलाकों में जलभराव की नौबत क्यों आ रही है? आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियां और जल निकासी व्यवस्था इस सवाल का जवाब देंगी।

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