महीने की पहली तारीख को देशभर के व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कमी की है, जिसके बाद इसका रेट 2,930 रुपये हो गया है, जो पहले 3,113.50 रुपये था। इसी दिन निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने भी अपने पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की कीमत 5 रुपये और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर घटा दी, जो पिछले दो साल में किसी भी कंपनी द्वारा की गई पहली कटौती है।
एक साल में कैसे बदले दाम
पिछले एक साल का हिसाब देखें तो तस्वीर उतार-चढ़ाव भरी रही है। 1 जुलाई 2025 को दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,665 रुपये थी। इसके बाद पश्चिम एशिया संकट के चलते कीमतें लगातार बढ़ती गईं — दिसंबर 2025 में यह 1,580.50 रुपये, जनवरी 2026 में 1,691.50 रुपये और फरवरी में 1,740.50 रुपये तक पहुंच गया। मार्च-अप्रैल में और बढ़ोतरी हुई, लेकिन मई 2026 में सबसे बड़ा झटका लगा जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम में एक साथ 993 रुपये की बढ़त दर्ज की गई। जून की शुरुआत में भी 42 रुपये महंगा होकर यह 3,113.50 रुपये तक पहुंच गया था। अब जाकर आज पहली बार राहत मिली है। कोलकाता में भी सिलेंडर 174 रुपये सस्ता होकर 3,255.50 रुपये से 3,081.50 रुपये पर आ गया है, जबकि लखनऊ और पटना में भी दरें घटी हैं। छोटे व्यापारियों के इस्तेमाल वाले 5 किलो सिलेंडर के दाम में भी इस बार नरमी की खबर है, हालांकि इसकी सटीक नई दर अलग-अलग शहरों में जारी हो रही है — जून में यह दिल्ली में करीब 821.50 रुपये तक पहुंच गया था।
घरेलू सिलेंडर पर राहत का इंतजार जारी
व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है, लेकिन आम घरों के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं है। घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसकी कीमत अभी भी 942 रुपये बनी हुई है। घरेलू सिलेंडर आखिरी बार 8 अप्रैल 2025 को संशोधित हुआ था, उसके बाद मार्च 2026 में इसमें 29-60 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, तब से इसमें कोई कमी नहीं आई।
सत्ता पक्ष-विपक्ष में पहले से गरमाया रहा मुद्दा
गैस सिलेंडर की कीमतें बीते महीनों में संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का केंद्र रही हैं। जब मार्च-मई में लगातार दाम बढ़े थे, तब कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज़ में सरकार पर निशाना साधते हुए बीजेपी को घेरा था, वहीं कांग्रेस ने इसे आम जनता पर “महंगाई का चाबुक” करार दिया था। सरकार की ओर से जवाब देते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने सफाई दी थी कि भारत में घरेलू LPG की कीमतें कई पड़ोसी और विकसित देशों की तुलना में अब भी कम हैं, और एक सिलेंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से ज्यादा होने के बावजूद उपभोक्ता को यह 942 रुपये में मिल रहा है। राज्यसभा में भी नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सत्ता पक्ष के नेता जगत प्रकाश नड्डा के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हो चुकी है, जिसमें खड़गे ने आपूर्ति बाधित होने और गरीब-मध्यम वर्ग पर असर का आरोप लगाया था, जबकि नड्डा ने इसे राजनीति करार दिया था।
व्यापारियों के लिए राहत
आज की कटौती का सबसे ज्यादा फायदा होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और कैंटीन जैसे व्यवसायों से जुड़े लोगों को मिलेगा, जो लगातार कई महीनों से बढ़ती कमर्शियल गैस कीमतों से परेशान थे। हालांकि पिछले एक साल का कुल हिसाब देखें तो राहत के बावजूद दाम अब भी जुलाई 2025 के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, जिससे कारोबारियों की जेब पर असर पहले जैसा हल्का नहीं हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ सकता है, क्योंकि सरकार या तेल कंपनियों की ओर से इस पर फिलहाल कोई नई घोषणा नहीं हुई है।
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