Skyroot’s Vikram-1 created history: हैदराबाद/श्रीहरिकोटा, भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। शनिवार सुबह श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से स्कायरूट एरोस्पेस के रॉकेट Vikram-1 का प्रक्षेपण सफल रहा, जिसने भारत को अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बना दिया जहां कोई निजी कंपनी ऑर्बिटल क्लास रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम है। इस ऐतिहासिक मिशन के पीछे जो नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है, वह है स्कायरूट एरोस्पेस के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चाँदना का एक ऐसा शख़्स जिसकी कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
स्कूल में गणित में सिर्फ 51 नंबर, फिर IIT खड़गपुर तक का सफ़र
1991 में हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे पवन कुमार चाँदना का शुरुआती स्कूली रिकॉर्ड कतई यह संकेत नहीं देता था कि आगे चलकर वह देश का रॉकेट वैज्ञानिक बनेंगे। स्कूल के दिनों में उन्होंने गणित में महज़ 51 अंक हासिल किए थे वही विषय जो बाद में उनके पूरे करियर की बुनियाद बना। बताया जाता है कि उनके पिता ने इस नतीजे को उनकी सीमा नहीं मानने दिया और उन्हें IIT कोचिंग में दाख़िला दिलवाया। कोचिंग शुरू होते ही गणित और भौतिकी में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी, और उन्होंने पहले ही प्रयास में IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली। 2007 में उन्होंने IIT खड़गपुर में दाख़िला लिया, जहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ड्यूल डिग्री (बीटेक और थर्मल साइंस में एमटेक) 2012 में पूरी की। यही वह मोड़ था जिसने एक “औसत” छात्र को देश के सबसे होनहार इंजीनियरों में शुमार कर दिया।
ISRO में छह साल, GSLV Mk-III और SSLV जैसे मिशनों पर काम
IIT से निकलने के बाद Pawan ने पारंपरिक कॉर्पोरेट करियर के बजाय अंतरिक्ष क्षेत्र को चुना और 2012 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ गए। तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में वैज्ञानिक के तौर पर उन्होंने क़रीब छह साल तक काम किया। इस दौरान वे भारत के सबसे भारी लॉन्च व्हीकल GSLV Mk-III, इसके S-200 सॉलिड रॉकेट बूस्टर, और स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों का हिस्सा रहे। इसी दौर में उन्हें रॉकेट प्रणाली, प्रणोदन तकनीक और बड़े पैमाने की वैज्ञानिक टीमवर्क की गहरी समझ मिली और साथ ही यह भी एहसास हुआ कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में निजी कंपनियां तेज़ी से अपनी जगह बना रही हैं।
2018 में सरकारी नौकरी छोड़ शुरू हुआ स्कायरूट एरोस्पेस का सफ़र
2018 में पवन कुमार चाँदना ने अपने साथी इंजीनियर नागा भरत डका के साथ मिलकर एक बड़ा और जोखिम भरा फ़ैसला लिया एक सुरक्षित सरकारी नौकरी को छोड़कर हैदराबाद में स्कायरूट एयरोस्पेस की नींव रखी। न कोई स्टार्टअप का अनुभव, न निवेशकों का नेटवर्क, न ही निजी रॉकेट कंपनियों के लिए कोई तय नियामकीय ढांचा बावजूद इसके दोनों ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की एक नई इबारत लिखने की ठानी। नवंबर 2022 में कंपनी ने अपना पहला सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम -एस (मिशन ‘प्रारंभ’) सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिससे Skyroot भारत की पहली ऐसी निजी कंपनी बनी जिसने अंतरिक्ष तक रॉकेट भेजा। इसके बाद कंपनी ने मई 2026 में क़रीब 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाकर 1.1 अरब डॉलर वैल्यूएशन के साथ भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न कंपनी बनने का दर्जा हासिल किया।
आज का इतिहास: Vikram-1 का सफल प्रक्षेपण
शनिवार, 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा के फर्स्ट लॉन्च पैड से मिशन ‘आगमन’ के तहत Vikram-1 का पहला परीक्षण उड़ान भरा। क़रीब सात मंज़िला ऊंचा यह चार-चरणीय, पूर्ण रूप से कार्बन कंपोज़िट ढांचे वाला रॉकेट निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है। पहली ही कोशिश में यह प्रक्षेपण सफल रहा और रॉकेट ने छह पेलोड जिनमें दो सैटेलाइट शामिल थे निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिए। इस मिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष तक भेजा गया। स्कायरूट के सह-संस्थापक और सीओओ नागा भारत डका ने इस मिशन को क़रीब एक हज़ार लोगों की मेहनत, 400 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं के योगदान और लगभग तीन हज़ार दिनों के संकल्प का नतीजा बताया।
पीएम मोदी ने फोन कर दी बधाई, कहा यह तो बस शुरुआत है
लॉन्च की सफलता के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवन कुमार चाँदना और नागा भरत डका को फोन कर बधाई दी। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि ने देश के युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया है और उन्होंने पूरी टीम को उसके युवा जोश के लिए विशेष रूप से सराहा। पीएम मोदी ने इसे देश की ‘आत्मनिर्भरता’ नीति की एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि स्कायरूट ने अंतरिक्ष में एक नया पेड़ ही नहीं लगाया, बल्कि धरती पर नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाली एक नई जड़ भी मज़बूत की है। उन्होंने संस्थापकों को मुलाक़ात के लिए भी आमंत्रित किया और भरोसा दिलाया कि सरकार भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास में पूरा सहयोग करती रहेगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने इससे पहले नवंबर 2025 में हैदराबाद में स्कायरूट के ‘इन्फिनिटी कैंपस’ का उद्घाटन भी किया था, क़रीब दो लाख वर्ग फुट में फैली यह अत्याधुनिक सुविधा हर महीने एक ऑर्बिटल रॉकेट बनाने की क्षमता रखती है।
युवाओं के लिए एक सीख
पवन कुमार चाँदना की कहानी इस धारणा को चुनौती देती है कि स्कूली अंकों से किसी की भविष्य की क्षमता तय होती है। गणित में महज़ 51 नंबर पाने वाला एक छात्र आज भारत के सबसे महत्वाकांक्षी निजी अंतरिक्ष अभियान का नेतृत्व कर रहा है। उनकी यात्रा ट्यूशन क्लास से IIT, IIT से ISRO, और ISRO से एक अरब डॉलर की स्पेस-टेक कंपनी तक, जिज्ञासा, दृढ़ता और जोखिम उठाने के साहस की मिसाल बन गई है।
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