RBI 2027 में ला सकता है ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट, जानिए क्या होंगे फायदे और क्या बंद हो जाएंगे पुराने नोट?

RBI Plastic Notes 2027

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की करेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद आरबीआई ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल की तैयारी कर रहा है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो वर्ष 2027 से इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से नियमित प्रचलन में लाया जा सकता है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल कागज के मौजूदा नोटों को बंद करने की कोई योजना नहीं है।

क्या है RBI की योजना?

वित्त मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी है कि RBI के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 100 करोड़ ₹10 और 100 करोड़ ₹20 के पॉलिमर नोट फील्ड ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे। यानी शुरुआती चरण में कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जाएंगे। इनका उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में इनकी मजबूती, टिकाऊपन और लोगों की प्रतिक्रिया का आकलन करना है।

2027 में क्यों हो सकती है शुरुआत?

RBI गवर्नर ने संकेत दिया है कि फील्ड ट्रायल सफल रहने पर अगले चरण में इन नोटों का नियमित प्रचलन शुरू किया जाएगा। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार व्यापक स्तर पर इनकी शुरुआत 2027 के दौरान या वित्त वर्ष 2027-28 के शुरुआती दौर में हो सकती है।

प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों के फायदे

पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर माने जाते हैं।

  • इनकी उम्र कागज के नोटों से कई गुना अधिक होती है।
  • ये पानी, नमी और गंदगी से जल्दी खराब नहीं होते।
  • फटने और घिसने की संभावना कम रहती है।
  • इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना अधिक कठिन हो जाता है।
  • लंबे समय तक चलने के कारण बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी और लागत में बचत होगी।

क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे?

नहीं। केंद्र सरकार और RBI दोनों ने स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागज के नोट अमान्य हो जाएंगे। दोनों प्रकार के नोट साथ-साथ चलेंगे और पुराने ₹10 तथा ₹20 के नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और कई अन्य देशों में वर्षों से पॉलिमर करेंसी का उपयोग किया जा रहा है। इन देशों में ऐसे नोट अधिक टिकाऊ और सुरक्षित साबित हुए हैं। इसी अनुभव को देखते हुए भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोट ही क्यों?

₹10 और ₹20 के नोट सबसे अधिक लेनदेन में इस्तेमाल होते हैं। लगातार हाथ बदलने के कारण ये जल्दी फट जाते हैं और इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। इसी वजह से RBI ने सबसे पहले इन्हीं मूल्यवर्ग के नोटों पर पायलट परियोजना शुरू करने का फैसला किया है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि जेब में रखने वाले छोटे नोट पहले की तुलना में ज्यादा समय तक सुरक्षित रहेंगे। बारिश, नमी और सामान्य उपयोग से नोट जल्दी खराब नहीं होंगे। साथ ही नकली नोटों पर भी प्रभावी नियंत्रण मिलने की उम्मीद है। हालांकि डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर इसका कोई तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं बताई गई है।

 

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