अभिषेक बनर्जी का करीबी, फाल्टा का ‘बाहुबली’, अब पुलिस की गिरफ्त में
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘पुष्पा’ के नाम से मशहूर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान को आखिरकार नेपाल सीमा के नजदीक से गिरफ्तार कर लिया गया है। हफ्तों से फरार चल रहे इस बाहुबली नेता की गिरफ्तारी को बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। जहांगीर खान TMC के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के सबसे करीबी और विश्वस्त सहयोगियों में गिने जाते थे।
कौन हैं जहांगीर ‘पुष्पा’ खान?
जहांगीर खान पिछले एक दशक से फाल्टा विधानसभा क्षेत्र पर डर और दबदबे के बल पर राज करते आए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC नेता अभिषेक बनर्जी को डायमंड हार्बर सीट से 10 लाख 48 हजार 230 वोटों का भारी-भरकम अंतर दिलाने में अहम भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आए जब उन्होंने चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को खुली चुनौती दे डाली। अजय पाल शर्मा को उनकी कड़क छवि के कारण ‘सिंघम’ कहा जाता है। जहांगीर ने जनता के बीच ललकारते हुए कहा था — “अगर वो सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।” कथित रूप से यह बयान उस वक्त आया जब शर्मा ने मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोप में जहांगीर के घर जाकर उनके परिजनों को चेतावनी दी थी। यह ‘पुष्पा’ वाला बयान वायरल हो गया और खान देखते-देखते बंगाल के सबसे चर्चित राजनीतिक चेहरों में शुमार हो गए।
फाल्टा में चुनावी गड़बड़ी और पुनर्मतदान
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र तब राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गया जब चुनाव आयोग ने वहां पुनर्मतदान का आदेश दिया। चुनाव आयोग को ऐसे सबूत मिले कि मतदाताओं को BJP के पक्ष में वोट डालने से रोका गया और ईवीएम पर BJP के चुनाव चिह्न को सफेद टेप से ढका गया। पुनर्मतदान से पहले ही फाल्टा पुलिस ने जहांगीर खान के करीबी सहयोगी और फाल्टा पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान को गिरफ्तार किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सैदुल पर हत्या की कोशिश और राजनीतिक हिंसा फैलाने के कई लंबित मामले दर्ज थे।
मैदान छोड़ा, फिर हुए फरार
पुनर्मतदान से महज 48 घंटे पहले जहांगीर खान ने उम्मीदवारी वापस ले ली। उन्होंने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं, मैं यहां शांति और विकास चाहता हूं। हमारे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फाल्टा के लिए विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैं खुद को चुनाव से अलग कर रहा हूं।” इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान को मिली अंतरिम गिरफ्तारी-सुरक्षा को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की दुहाई देकर बार-बार सुरक्षा नहीं मांगी जा सकती। जहांगीर के खिलाफ फाल्टा थाने में 7 एफआईआर दर्ज थीं। हाईकोर्ट से सुरक्षा हटते ही जहांगीर खान फरार हो गए और हफ्तों तक पुलिस उनकी तलाश में लगी रही।
नेपाल सीमा के पास धरे गए ‘पुष्पा’
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हफ्तों की फरारी के बाद जहांगीर ‘पुष्पा’ खान को अंततः नेपाल सीमा के नजदीक से गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट की सुरक्षा हटने के बाद वे पहले बंगाल के भीतर इधर-उधर छिपते रहे, फिर देश छोड़ने की फिराक में नेपाल सीमा की ओर बढ़ गए, जहां पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के इस कद्दावर नेता पर कानूनी शिकंजा पूरी तरह कसता जा रहा था और किसी भी वक्त गिरफ्तारी की आशंका जताई जा रही थी। 
BJP का तंज — ‘पुष्पा झुक गया’
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर खान की पहले उम्मीदवारी वापसी और फिर फरारी पर व्यंग्य करते हुए कहा था “कहां है स्वयंभू पुष्पा?” उन्होंने दावा किया कि जहांगीर भाग गए क्योंकि उन्हें पता था कि चुनाव में उनके पक्ष में मतदान एजेंट तक नहीं मिलते। TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भी कटाक्ष करते हुए पूछा “अगर जहांगीर खान पुष्पा थे, तो झुके क्यों?”
फाल्टा में BJP की जीत, ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ ध्वस्त
फाल्टा उपचुनाव में BJP के देबांशु पंडा विजयी रहे, जबकि जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे। यह नतीजा अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना गया, जिनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में फाल्टा आता है।
TMC का रुख
TMC ने जहांगीर की उम्मीदवारी वापसी को उनका “निजी फैसला” बताया और कहा कि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से फाल्टा में अकेले 100 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पार्टी ने कहा कि कई दफ्तरों को तोड़ा और जबरन बंद किया गया।
राजनीतिक विश्लेषण
जहांगीर खान की गिरफ्तारी इस मायने में खास है क्योंकि यह बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC के उन बाहुबलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की कड़ी में एक और कदम है जो दशकों से कानून से बेपरवाह होकर काम करते रहे। पर्यवेक्षक इसकी तुलना 2024 में संदेशखाली के TMC नेता शेख शाहजहां की गिरफ्तारी से कर रहे हैं, जो 55 दिनों की फरारी के बाद पकड़े गए थे। ‘पुष्पा’ की यह गिरफ्तारी बंगाल के उस बदलते राजनीतिक माहौल की दास्तान है, जिसमें ‘झुकेंगे नहीं’ कहने वाले भी आखिरकार कानून के सामने नतमस्तक हो जाते हैं।

