नोएडा में शहीदान-ए-कर्बला, विशेष रूप से हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 जाँनिसार साथियों की याद में एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर इस मार्च में भाग लिया और कर्बला के अमर संदेश—हक़, इंसाफ़, सब्र, कुर्बानी, अमन और इंसानियत—को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कर्बला की कुर्बानी को बताया मानवता की सबसे बड़ी मिसाल
मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की शहादत केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सत्य और न्याय की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपने परिवार और 72 साथियों के साथ सर्वोच्च बलिदान दिया। यही कारण है कि कर्बला की घटना आज भी दुनिया भर के लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने और मानवता की रक्षा का संदेश देती है।
अमन, भाईचारे और सामाजिक एकता का दिया संदेश
कैंडल मार्च के दौरान आयोजकों और प्रतिभागियों ने कहा कि आज के समय में समाज को कर्बला के संदेश की पहले से अधिक आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा, सामाजिक सद्भाव, शांति और इंसानियत को मजबूत करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी हमें यह सिखाती है कि सत्य, न्याय और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए हर कठिनाई का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए।
शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम
पूरा कैंडल मार्च शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतिभागियों ने मोमबत्तियां जलाकर शहीदान-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज में प्रेम, सौहार्द तथा इंसानियत का संदेश फैलाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने कर्बला के आदर्शों को जीवन में अपनाने और आने वाली पीढ़ियों तक इस प्रेरणा को पहुंचाने पर भी जोर दिया।

