नोएडा में यमुना-हिंडन के डूब क्षेत्र में धड़ल्ले से बिक रहे प्लॉट, सैकड़ों अवैध निर्माणों में फंसे परिवार, जानिए कैसे हो रहा खेल

Hindon River Flood Zone

नोएडा। दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा होने के कारण नोएडा में जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसी का फायदा उठाकर यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र (फ्लड प्लेन) में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलाया जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार दोनों नदियों के किनारे बसे सैकड़ों निर्माण डूब क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जहां निर्माण गतिविधियां नियमानुसार प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद प्रॉपर्टी डीलर लोगों को सस्ते प्लॉट और अपने घर का सपना दिखाकर धड़ल्ले से रजिस्ट्री करवा रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों को बाद में बिजली, पानी, सीवर और अन्य सरकारी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में हजारों लोगों की जीवनभर की कमाई दांव पर लगती नजर आ रही है।

डूब क्षेत्र में बस रहीं अवैध कॉलोनियां

यमुना और हिंडन नदी के किनारे स्थित कई इलाकों में वर्षों से अवैध रूप से प्लॉटिंग कर कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि ये क्षेत्र बाढ़ प्रभावित यानी फ्लड प्लेन (डूब क्षेत्र) में आते हैं। ऐसे स्थानों पर निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों की जान-माल के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

इसके बावजूद जमीन माफिया और प्रॉपर्टी डीलर खुलेआम प्लॉट बेच रहे हैं और खरीदारों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि भविष्य में कॉलोनी नियमित हो जाएगी।

रजिस्ट्री होने से लोग समझ लेते हैं जमीन सुरक्षित

विशेषज्ञों का कहना है कि कई खरीदार यह मान लेते हैं कि यदि जमीन की रजिस्ट्री हो गई है तो निर्माण भी पूरी तरह वैध होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि रजिस्ट्री होने का अर्थ निर्माण की वैधता नहीं होता। यदि जमीन डूब क्षेत्र, अधिसूचित क्षेत्र या प्रतिबंधित भूमि में आती है, तो वहां मकान बनाने की अनुमति नहीं मिलती।

इसी भ्रम का फायदा उठाकर कई डीलर लोगों को प्लॉट बेच रहे हैं।

बिजली-पानी के लिए भटक रहे परिवार

इन अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। चूंकि निर्माण वैध नहीं माना जाता, इसलिए संबंधित विभाग नियमित बिजली कनेक्शन, पेयजल आपूर्ति, सीवर लाइन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में असमर्थ रहते हैं। कई परिवार वर्षों से अस्थायी बिजली व्यवस्था, टैंकरों से पानी और खराब सड़कों के सहारे जीवन बिताने को मजबूर हैं।

बाढ़ का भी बना रहता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण होने से प्राकृतिक जल निकासी बाधित होती है। भारी बारिश या नदी का जलस्तर बढ़ने पर ऐसे क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इससे न केवल अवैध निर्माणों को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

जिला प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण समय-समय पर अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई और चेतावनी जारी करते रहे हैं। इसके बावजूद अवैध प्लॉटिंग और निर्माण का सिलसिला पूरी तरह नहीं थम पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और खरीदारों को समय रहते जागरूक नहीं किया जाएगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।

प्लॉट खरीदने से पहले बरतें सावधानी

रियल एस्टेट विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्लॉट या जमीन की खरीद से पहले खरीदार को संबंधित विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से यह अवश्य जांच कर लेनी चाहिए कि भूमि डूब क्षेत्र, अधिसूचित क्षेत्र या किसी प्रतिबंधित श्रेणी में तो नहीं आती। केवल रजिस्ट्री के आधार पर निवेश करना भविष्य में बड़ी कानूनी और आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। नोएडा में यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बढ़ते अवैध निर्माण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। एक ओर डीलर लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर जमीन बेच रहे हैं, तो दूसरी ओर उन्हीं प्लॉटों पर घर बनाने वाले परिवार बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और नियमों का प्रभावी पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

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