Noida Cyber Crime: सेंट्रल नोएडा की सेक्टर-142 थाना पुलिस ने बुधवार रात सेक्टर-138 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से डेस्कटॉप कंप्यूटर, मोबाइल फोन, नेटवर्किंग उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहमदाबाद (गुजरात) निवासी मास्टरमाइंड मंसूरी उर्फ मंसूरी रशीद (26), सिरोही (राजस्थान) निवासी तरुण मिश्रा (39) और करवार (कर्नाटक) निवासी चंद्रकांत (39) के रूप में हुई है।
ठगी का तरीका
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह गिरोह विदेशों (खासकर अमेरिका) में रहने वाले उन लोगों को निशाना बनाता था, जिनका क्रेडिट स्कोर खराब होने के कारण बैंक से लोन नहीं मिल पा रहा था। आरोपी फर्जी पहचान बनाकर, विदेशी ई-सिम और कंप्यूटर-मोबाइल के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते और “लोन प्रोसेसिंग फीस/एडवांस” के नाम पर रकम ठग लेते थे। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म से ठगी के तरीके सीखकर इस धंधे को अंजाम दिया।
कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दबिश दी और तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, फंडिंग चैनल और ठगी की कुल रकम का पता लगाने के लिए डिजिटल फोरेंसिक और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में साइबर-लोन ठगी के ताजा मामले
इसी सप्ताह नोएडा साइबर क्राइम थाने ने पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर फर्जी सैंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले दो और साइबर अपराधियों को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया है। इसके पहले सेक्टर-141 क्षेत्र में प्राइवेट लोन ऐप के ज़रिए वीडियो कॉल कर ब्लैकमेल करने वाले छह लोगों को भी पकड़ा गया था, जिन पर करीब 25 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। इन ताजा खुलासों से साफ है कि लोन/फाइनेंस के नाम पर चल रहे साइबर-ठगी के मॉड्यूल अब अधिक संगठित और (cross-border) हो गए हैं।
नागरिकों के लिए सलाह
किसी भी अनजान कॉल/मैसेज पर “लोन प्रोसेसिंग फीस”, “एडवांस” या “सिक्योरिटी डिपॉजिट” न दें। लोन केवल बैंक/आरबीआई-पंजीकृत संस्थाओं से ही लें और ऑफिशियल वेबसाइट/ऐप के ज़रिए ही आवेदन करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें।

