नोएडा में महिला डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगों ने ऐसे बनाया निशाना

नोएडा। साइबर अपराधियों ने नोएडा की 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 18.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को पहले एयरटेल मुख्यालय का कर्मचारी और फिर महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार पांच दिनों तक मानसिक दबाव और निगरानी में रखकर आरोपियों ने उनसे एफडी तुड़वाकर दो अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम ट्रांसफर करा ली। मामले में साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

एयरटेल कर्मचारी और महाराष्ट्र पुलिस अधिकारी बनकर किया कॉल

सेक्टर-30 निवासी सेवानिवृत्त महिला चिकित्सक के अनुसार, 13 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एयरटेल हेड ऑफिस का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को कॉन्फ्रेंस पर जोड़कर दूसरे व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने स्वयं को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया।

गिरफ्तारी का डर दिखाकर हासिल की बैंक और निवेश की जानकारी

आरोपियों ने महिला डॉक्टर को निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक वह किसी से बात न करें और केवल उनके बताए निर्देशों का पालन करें। गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई और सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने का भय दिखाकर ठगों ने उनके बैंक खातों, एफडी, पोस्ट ऑफिस जमा और अन्य निवेश की पूरी जानकारी हासिल कर ली।

एफडी तुड़वाकर दो खातों में भेजे 18.50 लाख रुपये

14 जुलाई को साइबर ठगों ने जांच के नाम पर रकम एक तथाकथित “सुरक्षित खाते” में जमा कराने का दबाव बनाया। महिला सेक्टर-30 स्थित इंडियन बैंक शाखा पहुंचीं, अपनी एफडी तुड़वाई और 10.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए खाते में भेज दिए। इसके बाद भी आरोपी लगातार वीडियो कॉल और फोन कॉल के जरिए उन्हें अपने नियंत्रण में रखते रहे। 17 जुलाई को ठगों ने उनसे आठ लाख रुपये एक अन्य बैंक खाते में भी ट्रांसफर करा लिए। इस तरह कुल 18.50 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।

साइबर पुलिस कर रही बैंक खाते और डिजिटल साक्ष्यों की जांच

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस साइबर ठगों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।

वरिष्ठ नागरिक क्यों बनते हैं साइबर ठगी का आसान शिकार?

पूर्व आईपीएस अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होने के कारण साइबर अपराधी उन्हें आसानी से डरा देते हैं। सरकारी एजेंसियों, बैंक या टेलीकॉम कंपनियों का नाम लेकर विश्वास जीतना साइबर ठगों की आम रणनीति है। अकेले रहने वाले बुजुर्ग अक्सर मानसिक दबाव में आकर परिवार या परिचितों से सलाह लिए बिना ही बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं।

साइबर सुरक्षा सलाह

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, बैंक या टेलीकॉम कंपनी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही किसी सुरक्षित खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। ऐसे किसी भी कॉल पर तुरंत बातचीत बंद करें, परिवार से सलाह लें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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