नोएडा। आबादी के प्लॉट की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-146 में आबादी के प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया के तहत 307 पात्र किसानों को रिजर्व लेटर जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 50 अन्य किसानों की पात्रता का सत्यापन अंतिम चरण में पहुंच गया है। जांच पूरी होते ही उन्हें भी रिजर्व लेटर जारी कर दिए जाएंगे।
यह फैसला उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वर्षों से आबादी के प्लॉट की मांग को लेकर नोएडा प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे थे। अब रिजर्व लेटर मिलने के बाद प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
सत्यापन पूरा होने पर ही जारी किए गए रिजर्व लेटर
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल केवल उन्हीं किसानों को रिजर्व लेटर जारी किए गए हैं, जिनकी पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन पूरी तरह पूरा हो चुका है। जिन किसानों के दस्तावेजों की जांच अभी चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने के बाद रिजर्व लेटर जारी किए जाएंगे।
50 किसानों का सत्यापन अंतिम चरण में
प्राधिकरण के मुताबिक लगभग 50 किसानों के दस्तावेजों की जांच अंतिम चरण में है। राजस्व रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों का मिलान पूरा होते ही इन किसानों को भी रिजर्व लेटर जारी कर दिए जाएंगे, जिससे वे भी आबादी प्लॉट आवंटन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।
सेक्टर-146 में होगा आबादी प्लॉट का आवंटन
रिजर्व लेटर जारी होने के बाद अब नोएडा प्राधिकरण सेक्टर-146 में आबादी के प्लॉटों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
वर्षों से कर रहे थे इंतजार
नोएडा के विभिन्न गांवों के किसान लंबे समय से आबादी के प्लॉट की मांग कर रहे थे। कई बार किसानों ने प्राधिकरण अधिकारियों से मुलाकात की, ज्ञापन सौंपे और धरना-प्रदर्शन भी किए। किसानों का कहना था कि अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें नियमानुसार आबादी के प्लॉट मिलने चाहिए। अब 307 किसानों को रिजर्व लेटर मिलने से अन्य पात्र किसानों में भी उम्मीद जगी है कि उनकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी होगी।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
आबादी के प्लॉट का रिजर्व लेटर मिलने के बाद किसानों को उनके भूखंड के आवंटन का रास्ता साफ हो जाता है। इससे वर्षों से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और प्रभावित किसानों को उनके अधिकार का लाभ मिल सकेगा। प्राधिकरण का यह कदम किसानों और प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

