नोएडा प्राधिकरण के नए दफ्तर में तकनीकी अव्यवस्था! इंटरनेट और सर्वर की दिक्कत से अटके काम, लोगों को हो रही परेशानी

Noida News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में उद्घाटित नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-96 स्थित नए प्रशासनिक मुख्यालय में विभागों की शिफ्टिंग तो तेजी से हो रही है, लेकिन तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट, सर्वर और कंप्यूटर नेटवर्क की समस्याओं के चलते कई विभागों का नियमित कामकाज प्रभावित हो गया है, जिससे नागरिकों के जरूरी कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं।

प्राधिकरण के पुराने सेक्टर-6 कार्यालय से विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अपनी फाइलें, कंप्यूटर, रिकॉर्ड और अन्य कार्यालय सामग्री नए भवन में स्थानांतरित कर चुके हैं। हालांकि कई विभाग अभी भी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नेटवर्क कनेक्टिविटी और सर्वर से जुड़ी समस्याओं के कारण ऑनलाइन फाइलें नहीं खुल पा रही हैं और कई डिजिटल सेवाएं प्रभावित हैं।

सूत्रों के अनुसार, संपत्ति, भवन योजना, जल एवं सीवर, इंजीनियरिंग और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में आने वाले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोगों को तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाद में आने के लिए कहा जा रहा है। इससे रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले आवेदकों और निवेशकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, सेक्टर-96 स्थित नया प्रशासनिक मुख्यालय करीब 390 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्राधिकरण के सभी प्रमुख विभागों को एक ही परिसर में लाकर नागरिकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 जून को इस आधुनिक भवन का उद्घाटन किया था और इसे डिजिटल प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था।

हालांकि वर्तमान में शिफ्टिंग के संक्रमणकाल के कारण तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं। आईटी नेटवर्क, सर्वर माइग्रेशन और विभिन्न विभागों के डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह एकीकृत करने का कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से सामान्य की जा रही हैं और जल्द ही सभी विभाग पूर्ण क्षमता के साथ नए कार्यालय से संचालित होंगे।

इस बीच नागरिकों की मांग है कि जब तक नई व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि प्रॉपर्टी, बिल्डिंग प्लान, रजिस्ट्री, शिकायतों और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को बार-बार प्राधिकरण के चक्कर न लगाने पड़ें।

 

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