Negligence at Noida Authority’s EV charging stations: नोएडा-एनसीआर में प्रदूषित हवा और चढ़ती गर्मी से निपटने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने कुछ साल पहले ईईएसएल (Energy Efficiency Services Limited) के साथ 54 स्थानों पर 169 इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित करने का एमओयू साइन किया था। लेकिन अब ज्यादातर स्टेशन जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं, जहां अवैध पार्किंग और छोटे-मोटे व्यावसायिक काम फल-फूल रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही से आम जनता के करीब 40 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए, जबकि EV मालिक चार्जिंग की तलाश में परेशान घूम रहे हैं।
यह एमओयू वर्ष 2021 में साइन हुआ था, जब नोएडा प्राधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण और EV अपनाने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 169 चार्जिंग स्टेशनों पर 40 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया था। लेकिन हाल के सर्वे और स्थानीय निवासियों की शिकायतों से पता चलता है कि 70 प्रतिशत से ज्यादा स्टेशन अब काम नहीं कर रहे। सेक्टर-18, सेक्टर-62, सेक्टर-50 और फेज-3 जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित स्टेशन पर धूल जमा हो चुकी है, चार्जर टूटे पड़े हैं और तारें लटक रही हैं।
स्थानीय EV यूजर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम EV खरीदकर प्रदूषण कम करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन न होने से पेट्रोल पंप पर निर्भर होना पड़ता है। सेक्टर-62 का स्टेशन तो चाट-समोसे की दुकान बन गया है!” एक अन्य निवासी ने कहा, “अवैध पार्किंग करने वालों को कोई रोकता नहीं, जबकि प्राधिकरण के बोर्ड अभी भी लगे हैं।”
नोएडा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन पर पुष्टि की कि रखरखाव की कमी और तकनीकी खराबी के कारण कई स्टेशन बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा, “हम ईईएसएल के साथ समन्वय कर रहे हैं और जल्द ही नए टेंडर जारी करेंगे।” लेकिन विपक्षी नेता राकेश यादव ने इसे “पूर्ण लापरवाही” करार देते हुए कहा, “40 करोड़ जनता के टैक्स से बर्बाद हुए, प्राधिकरण जवाब दे कि कब सुधार होगा?”
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने चेतावनी दी, “EV को बढ़ावा देने के बिना दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स सुधर नहीं सकता। ये स्टेशन पुनर्जीवित न हुए तो EV अपनाना मुश्किल हो जाएगा।” ग्रेटर नोएडा में भी इसी तरह के 20 स्टेशन प्रभावित हैं, जहां स्थिति और खराब है। प्राधिकरण ने घोषणा की है कि अगले तीन माह में 50 प्रतिशत स्टेशनों को चालू करने का लक्ष्य है, लेकिन जनता संदेह में है। क्या यह सिर्फ कागजी घोषणा साबित होगी या वास्तविक बदलाव आएगा, समय बताएगा।

