देशभर के मेडिकल aspirants के सपनों को झटका देते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए CBI को सौंपी है। यह फैसला उन रिपोर्ट्स के बाद आया जिनमें सैकड़ों सवालों के मैचिंग ‘गेस पेपर’ का खुलासा हुआ, जो परीक्षा से पहले ही Telegram, WhatsApp और कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैल चुका था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले की जड़ गुरुग्राम में है। राजस्थान के जामवा रामगढ़ के दो भाई मंगीलाल और दिनेश बिवाल ने 26 अप्रैल को गुरुग्राम के एक डॉक्टर से NEET का पेपर 30 लाख रुपये में खरीदा। इसके बाद एक भाई ने अपने बेटे (जो सीकर में तैयारी कर रहा था) को दिया और 29 अप्रैल को इसे कई लोगों को बेच दिया। सीकर इस पूरे स्कैम का एपिसेंटर बन गया, जहां से यह ‘गेस पेपर’ और आगे फैला।
लीक कैसे फैला: छात्रों की आपबीती
छात्रों ने बताया कि परीक्षा से पहले Telegram चैनल्स और WhatsApp ग्रुप्स (जिनमें एक ‘Private Mafia’ नाम का ग्रुप भी शामिल) सक्रिय हो गए थे। दोस्तों के जरिए इनवाइट मिलते थे, सीनियर्स PDFs शेयर करते थे। कीमतें 30 हजार से लेकर 28 लाख रुपये तक बताई जा रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि 100 से 150 सवाल (कुछ में 410 तक) मैच कर गए। नाशिक (महाराष्ट्र) से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड समेत कई राज्यों तक यह नेटवर्क फैला। राजस्थान पुलीस की स्पेशियल ऑपरेशन्स ग्रूप (SOG) ने कई गिरफ्तारियां कीं, जिनमें मास्टरमाइंड मनीष यादव और कंसल्टेंट राकेश मंडावरिया (RK Consultancy, सीकर) शामिल हैं। CBI अब पूरे मामले की कमान संभाल चुकी है और FIR दर्ज कर ली गई है, जिसमें आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
छात्रों-परिवारों पर भावनात्मक संकट
परीक्षा रद्द होने से 24 लाख से ज्यादा छात्रों और उनके परिवारों में गहरी निराशा और चिंता फैल गई है। कोटा, दिल्ली समेत कई जगहों पर छात्रों ने प्रदर्शन किए। कई छात्रों ने बताया कि महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई, फिर से तैयारी का इंतजार और आर्थिक-मानसिक बोझ बढ़ गया। यह महज अकादमिक संकट नहीं, बल्कि एक बड़े भावनात्मक संकट का रूप ले चुका है। NTA के DG अभिषेक सिंह ने कहा कि नई परीक्षा की तारीख 7-10 दिनों में घोषित की जाएगी। छात्रों को नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ेगा और फीस भी वापस की जाएगी।
NTA पर सवालिया निशान
यह पहली बार नहीं है जब NTA की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। पिछले वर्षों में भी अनियमितताओं की शिकायतें आई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रिंटिंग प्रेस, इंसाइडर्स और डिजिटल नेटवर्क की मिलीभगत को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। CBI की जांच में अब यह देखा जाएगा कि NTA या प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े लोग भी शामिल थे या नहीं। यह घोटाला न सिर्फ मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से भी खेलता है। CBI की रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि छात्र नई परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं – उम्मीद के साथ कि इस बार सब कुछ पारदर्शी रहेगा।
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