राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) की पेपर लीक विवाद के बाद री-एग्जाम के बीच तमिलनाडु में छात्रों पर मानसिक दबाव का कहर जारी है। मात्र चार दिनों में तीन नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे राज्य में नीट के खिलाफ राजनीतिक विरोध और तेज हो गया है। साथ ही, परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने में देरी के कारण कई छात्रों के पेपर छूट जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिस पर छात्र, अभिभावक और विशेषज्ञों ने गहरी नाराजगी जताई है।
तमिलनाडु के सलेम, धर्मपुरी और कृष्णगिरि जिलों में हुई इन आत्महत्याओं ने पूरे देश में नीट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और राज्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि 19 वर्षीय एस. गोपिका (सलेम), आर. रोशनी (धर्मपुरी) और 20 वर्षीय सी. वेत्रि आनंदन (कृष्णगिरि) ने आत्महत्या कर ली। गोपिका दो वर्ष से नीट की तैयारी कर रही थीं और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कोचिंग नहीं ले पाईं। री-टेस्ट की घोषणा से उनका तनाव बढ़ गया था। रोशनी कोचिंग सेंटर से घर लौटकर तैयारी कर रही थीं, जबकि वेत्रि आनंदन ने सुसाइड नोट में नीट के डर और नींद न आने की बात लिखी थी। इन घटनाओं के अलावा, कोयंबटूर में 19 वर्षीय अनु कीर्तन और अन्य जगहों पर भी नीट से जुड़ी तनावपूर्ण घटनाएं दर्ज की गईं। देशभर में रद्द हुए मूल परीक्षा (5 मई) और 21 जून के री-एग्जाम के बीच कम से कम 11-12 छात्रों की आत्महत्याएं रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें तमिलनाडु, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि राज्य शामिल हैं।
परीक्षा केंद्रों पर देरी से पहुंचने की मार
21 जून को हुए री-एग्जाम में सख्त नियमों के कारण कई छात्र समय पर केंद्र पहुंचने में असफल रहे। बेंगलुरु, तेलंगाना और अन्य स्थानों पर छात्र रोते हुए बाहर खड़े दिखे। अभिभावकों ने पुलिस और अधिकारियों के सामने घुटनों पर बैठकर गुहार लगाई, लेकिन 1:30 बजे के कटऑफ के बाद एंट्री नहीं दी गई। कुछ छात्रों ने गूगल मैप्स की गलती, ट्रैफिक जाम (कांग्रेस रैली आदि) या बायोमेट्रिक समस्या का हवाला दिया।
छात्रों की प्रतिक्रिया: कई छात्रों ने कहा कि वर्षों की मेहनत एक-दो मिनट की देरी से बर्बाद हो गई। एक छात्र ने बताया, “हम घंटों पहले निकले थे, लेकिन ट्रैफिक और गलत दिशा के कारण समय पर नहीं पहुंच सके। यह अन्याय है।”
अभिभावकों की व्यथा: माता-पिता ने गुस्सा और दुख जताया। एक अभिभावक ने कहा, “हमारे बच्चे ने रात भर नहीं सोया, हम दूर से आए, लेकिन नियम इतने सख्त कि कोई सुनवाई नहीं। पेपर लीक होने पर कोई सजा नहीं, लेकिन छात्रों की छोटी-छोटी गलती पर सख्ती।” कुछ अभिभावकों ने बच्चों को सांत्वना देते हुए आंसू नहीं रोक पाए।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मत: विशेषज्ञों का कहना है कि नीट जैसी हाई-स्टेक परीक्षा में लीक और रद्दीकरण छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। कोचिंग कल्चर, एकल परीक्षा का दबाव और ग्रामीण-शहरी विभेद छात्रों को तोड़ रहा है। कई विशेषज्ञ नीट को समाप्त करने या राज्य स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
तमिलनाडु में DMK छात्र wing ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। PMK नेता अंबुमणि रामदास ने कहा कि या तो पूरे देश में नीट खत्म हो या तमिलनाडु को छूट दी जाए। VCK चीफ थोल थिरुमावलवन ने राज्य सरकार से कानूनी कदम उठाने की अपील की। मुख्यमंत्री विजय ने पहले ही नीट समाप्त करने और क्लास 12 के आधार पर मेडिकल एडमिशन की मांग दोहराई थी। एनटीए ने री-एग्जाम को सख्त सुरक्षा (बायोमेट्रिक, सीसीटीवी, जामर आदि) के साथ कराया, लेकिन छात्रों का कहना है कि पेपर पिछले वाले से कठिन था।
निष्कर्ष और सुझाव
नीट विवाद छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा संकट बन गया है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभिभावक बच्चों से खुलकर बात करें, काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए और नीट जैसी परीक्षाओं में लचीलापन व पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। तमिलनाडु समेत कई राज्यों की मांग है कि राज्य अपनी जरूरत के अनुसार व्यवस्था बनाएं। इस संकट ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों का सपना और परिवारों का दर्द अब सिर्फ आंकड़ों से आगे जाकर सोचने की मांग कर रहा है।

