आपनी ही पार्टी ने मुझे खामोश कर दिया: राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफा दिया, पीएम मोदी की तारीफ की; दो अन्य सांसदों के साथ BJP के तरफ़, बंगाल में मोदी ने RG कर रेप पीड़िता की मां के साथ TMC पर साधा निशाना

आपनी ही पार्टी ने मुझे खामोश कर दिया: आम आदमी पार्टी (AAP) में आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के प्रमुख चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ दो अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी। चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की और कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने ऐसे साहसिक फैसले लिए हैं, जिनसे कई नेता डरते थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सेवा करेंगे।

राघव चड्ढा ने एक बयान में कहा, “…हम भाजपा में विलय कर रहे हैं। पिछले 12 सालों में भाजपा की केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई ऐसे फैसले लिए हैं जो कि आज से पहले कई नेता लेने से डरते थे… इस नेतृत्व पर जनता ने एक बार नहीं बल्कि 3 बार मुहर लगाई है। हम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के लिए काम करेंगे…” यह बयान AAP में ‘बगावत’ की तस्वीर पेश करता है, जहां चड्ढा को हाल ही में राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया था और बोलने का समय भी रोक दिया गया था। पार्टी नेताओं ने उन्हें ‘BJP से डरने’ और पुराने आलोचनात्मक पोस्ट्स डिलीट करने का आरोप लगाया था। चड्ढा ने खुद को “चुप कराया गया, लेकिन हाराया नहीं” बताया था।

यह घटनाक्रम ठीक उसी समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली के दौरान RG कर रेप-मर्डर मामले की पीड़िता की मां के साथ मंच साझा कर रहे थे। पीएम मोदी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर महिलाओं की सुरक्षा में नाकामी और उनके न्याय की मांग को दबाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि TMC ने पीड़िता की मां को “उनकी बेटी छीन ली” जैसी स्थिति में धकेल दिया है। RG कर मामले में डॉक्टर की बर्बर हत्या के बाद बंगाल में महिलाओं के मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है, और पीड़िता की मां अब BJP टिकट पर पानिहाटी सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

दोनों घटनाओं को जोड़कर देखें तो विपक्षी दलों में असंतोष और ‘आंतरिक दमन’ का एक बड़ा पैटर्न उभरता है। AAP में राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली नेता को ‘साइलेंस’ करने की कोशिश और TMC पर पीएम का आरोप दोनों ही विपक्षी खेमे में महिलाओं, न्याय और लोकतांत्रिक आवाजों को कुचलने के आरोपों को मजबूत करते हैं। चड्ढा ने AAP में अपने 12 साल के अनुभव के दौरान पार्टी की कई उपलब्धियों का जिक्र किया, लेकिन हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों पर उनके नरम रुख और पंजाब-दिल्ली मुद्दों पर दूरी ने पार्टी लीडरशिप से टकराव पैदा कर दिया।

AAP नेताओं ने चड्ढा पर ‘कम्प्रोमाइज्ड’ होने और पार्टी लाइन न मानने के आरोप लगाए, जबकि BJP ने उनका समर्थन किया और कहा कि केजरीवाल सक्षम नेताओं को इस्तेमाल कर फिर फेंक देते हैं। अब चड्ढा के इस्तीफे और संभावित BJP जुड़ाव से दिल्ली-पंजाब की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। वहीं, बंगाल में RG कर मामले को लेकर TMC-BJP टकराव तेज हो गया है, जहां पीड़िता की मां ने TMC पर सबूत मिटाने और न्याय न देने का आरोप लगाया है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ये घटनाएं 2026 के बंगाल चुनावों और आने वाले अन्य राज्यों के चुनावों में विपक्षी एकता को चुनौती दे रही हैं। AAP में यह बगावत पार्टी की आंतरिक लोकतंत्र की कमी को उजागर करती है, जबकि पीएम मोदी की रैली महिलाओं की सुरक्षा को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश है।

अभी तक AAP की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया में चड्ढा के इस्तीफे को ‘अपेक्षित’ बताया जा रहा है, जबकि BJP चुप्पी साधे हुए है। आगे की घटनाएं देखने लायक होंगी, खासकर अगर चड्ढा औपचारिक रूप से BJP में शामिल होते हैं। यह विकास विपक्षी दलों के लिए एक चेतावनी साबित हो सकता है कि आंतरिक असहमति को दबाने की कोशिशें उल्टा पड़ सकती हैं।

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