मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में पति को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में बेहद तीखी टिप्पणी लिखी। उन्होंने लिखा कि वे मरना पसंद करेंगे, लेकिन डरपोक जज नहीं कहलवाना चाहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वे अपने सिद्धांतों पर चल सकते हैं, तभी तक सेवा में रहेंगे, वरना इस्तीफा दे देंगे।
क्या है मामला
सोमवार को जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर क्षेत्र में हुए शहजादी हत्याकांड में आरोपी पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई और 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। मामले के अनुसार, 23 जुलाई 2018 की रात नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट की और उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शहजादी की मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान शहजादी के माता-पिता और भाई अपने पुराने बयानों से मुकर गए, लेकिन घटना के अगले दिन अस्पताल में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज शहजादी का अंतिम बयान अदालत के लिए निर्णायक साबित हुआ, जिसमें उसने पति पर ही आग लगाने का आरोप लगाया था। चूंकि बयान में दहेज उत्पीड़न का जिक्र नहीं था, इसलिए नदीम को दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। ननद सोनी को भी सभी आरोपों से मुक्त किया गया, जबकि सास शमशीदा की पहले ही मौत हो चुकी थी।
फैसले में जज की अहम टिप्पणियां
अपने फैसले में जज रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि उन्हें बचपन से भगवान के अलावा किसी से न डरने की सीख मिली है और अगर वे किसी और से डरने लगेंगे तो जनता का न्यायपालिका से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने यह भी लिखा कि यदि वे माफियाओं से डरने लगें तो इस पवित्र संस्था से इस्तीफा दे देना ही बेहतर होगा। जज ने मुजफ्फरनगर में अपराधियों के दबदबे का जिक्र करते हुए लिखा कि यहां भरी अदालत में विक्की त्यागी की हत्या हो चुकी है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं था। उन्होंने शौकीन गैंग के आतंक का भी उल्लेख किया, जिसके सदस्य शाहनवाज को हाल ही में इसी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।
फैसले में उन्होंने ज्ञानवापी मामले के बाद खुद को और परिवार को मिलीं जान से मारने की धमकियों का भी जिक्र किया, जिसमें एक आरोपी ने सोशल मीडिया पर धमकी भरा पोस्ट डाला था। जज ने यह भी लिखा कि इस समय वे कुछ आचरण से आहत हैं, जिसका मकसद अपराधियों को बचाना है, लेकिन पद की गरिमा को देखते हुए इस पर विस्तार से बोलना उचित नहीं समझते। उन्होंने एक और खुलासा करते हुए लिखा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गैंगस्टर ने उन्हें धमकी भरा संदेश भेजा था कि अभी केवल मुकदमे हटवाए गए हैं, आगे दबाव बनाने पर कोर्ट और जिला दोनों बदलवा दिए जाएंगे।
जिला जज ने हटाए थे 100 केस
गौरतलब है कि पिछले महीने जिला जज ने रवि कुमार दिवाकर की अदालत से करीब 100 मुकदमे वापस लेकर दूसरी अदालतों में स्थानांतरित कर दिए थे, जिसे लेकर जज ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
17 साल की सेवा में 36 को फांसी
रवि कुमार दिवाकर अपनी 17 साल की न्यायिक सेवा में अब तक 36 दोषियों को मृत्युदंड सुना चुके हैं। मुजफ्फरनगर में महज 5 महीने के कार्यकाल में उन्होंने 23 दोषियों को फांसी की सजा दी है। उन्होंने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वे संभल और बरेली में तैनात रह चुके हैं और 2009 में न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे।
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