मोदी सरकार के लिए नई चुनौती, सड़कों पर उतरे जेन जेड, बढ़ता असंतोष और विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 वर्षों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में युवा विरोध प्रदर्शन उभरकर सामने आए हैं। देशभर में, खासकर दिल्ली में, जेन जेड युवा सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की खामियां, नागरिक स्वतंत्रता और मतदाता सूची के संशोधन जैसे मुद्दों ने युवाओं में गुस्सा भड़काया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह दिल्ली में हजारों सुरक्षा बल तैनात होने के बावजूद युवा प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स फांदे, सरकार विरोधी नारे लगाए और पुलिस से भिड़ गए। एक युवक ने “लॉन्ग लिव द रिवोल्यूशन” का नारा लगाते हुए पुलिस बस में धकेले जाने से पहले चीखा। स्वतंत्र संस्था आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) प्रोजेक्ट के अनुसार, इस साल भारत में सड़क प्रदर्शन पिछले एक दशक में सबसे अधिक होने की संभावना है।

विश्लेषकों का कहना है कि युवा विरोध और विपक्ष के बढ़ते समर्थन ने मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से सबसे बड़ी संकट की स्थिति पैदा कर दी है। 30 साल से कम उम्र के लोग देश के करीब एक अरब मतदाताओं में लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। हालांकि सरकार स्थिर बनी हुई है और अगला आम चुनाव 2029 में होना है।

हालिया प्रदर्शन मुख्य रूप से चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित रहे। कार्यकर्ता और विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए, जिससे भाजपा को हाल के राज्य चुनावों में फायदा पहुंचा। भाजपा, सरकार और चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करते हैं। पार्टी का कहना है कि उसकी जीत मोदी की लोकप्रियता और मजबूत आर्थिक विकास से हुई है।

ये प्रदर्शन सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित नहीं हैं। युवा बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। आर्थिक विकास के आंकड़ों के बावजूद लाखों युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा। जुलाई 2026 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नामक युवा आंदोलन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। भारी प्रदर्शनों के बाद प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था, जो मोदी सरकार के लिए दुर्लभ झटका माना गया।

CJP की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन कैंपेन से हुई थी, जब शीर्ष न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। यह आंदोलन सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से फैला और लाखों युवाओं को जोड़ लिया। युवा अब उन्हीं प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन पर भाजपा लंबे समय से हावी रही।

अक्टूबर में दिल्ली में भारी सुरक्षा तैनाती, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान तथा प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों के बावजूद युवा वापस सड़कों पर आ रहे हैं। पुलिस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। विश्लेषक कहते हैं कि मोदी को चुनौती देने का डर अब कम होता जा रहा है।

सरकार का रुख अब तक सख्त रहा है, लेकिन युवा असंतोष को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे अब राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में हैं। अगले चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन जेन जेड की यह आवाज भारतीय राजनीति के लिए एक नई हकीकत बन चुकी है।
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