कई सर्विस रोड व अंडरपासों में अंधेरा, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के संचालन की तैयारियों के बीच शहर की कई मुख्य और सर्विस रोड शाम ढलते ही अंधेरे में डूब जाती हैं। सेक्टर-98 चौराहे से सेक्टर-93 तक के मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें बंद या खराब पायी जा रही हैं, जबकि पंचशील अंडरपास और सेक्टर-129 के सामने के बड़े हिस्सों में भी अँधेरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कदम न उठाए जाने की नाराज़गी जताई है। नागरिकों का कहना है कि एक्सप्रेसवे की मुख्य लाइटें जलने के बावजूद सर्विस रोड पर रोशनी न होने से सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है। सेक्टर-142 एडवेंट से ग्रेटर नोएडा की ओर जाने वाली सर्विस रोड और भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे की सड़क विशेष रूप से अँधेरे से पीड़ित हैं। भंगेल और सलारपुर की बड़ी आबादी इन मार्गों से गुजरती है, जिससे शाम के बाद अकेले निकलना कई लोगों के लिए असुरक्षित हो गया है।

स्थानीयों के अनुभव

भंगेल की रहने वाली एक नागरिक ने बताया कि भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे इतना अँधेरा रहता है कि शाम के बाद अकेले निकलने में डर लगता है। सेक्टर-82 की रुचि ने कहा कि बरोला टी-पॉइंट से सलारपुर तक एलिवेटेड रोड के नीचे निर्माण संबंधी धूल-मिट्टी और रात के समय अँधेरा बना रहता है। सलारपुर की सुमन पांडे ने कहा कि एलिवेटेड रोड बनने के बाद उम्मीद थी कि नीचे की सड़क सुरक्षित होगी, पर 800 मीटर तक एक भी लाइट नहीं लगी है। सेक्टर-128 के विपिन प्रधान ने बताया कि सर्विस रोड पर अँधेरे की वजह से आगे की स्थिति पता नहीं चल पाती और हादसे का खतरा बना रहता है। पार्श्वनाथ प्रेस्टीज, सेक्टर-93A के एओए अध्यक्ष रजनीश नंदन ने कहा कि एक्सप्रेसवे पर लाइटें जलती हैं पर सर्विस रोड अँधेरे में रहता है। सेक्टर-122 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष शिवकुमार तिवारी ने भी संकेत दिया कि उनकी सर्विस रोड पर लाइट नहीं लगवाई जा रही है। सेक्टर-73 के नरेश यादव ने बताया कि मुख्य सड़क पर कई स्ट्रीट लाइट पोल टूटे हुए हैं और शिकायत के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गयी।

प्राधिकरण का दावा और जमानत

नोएडा प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार पूरे शहर में लगभग 1.80 लाख स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। प्राधिकरण के अनुसार स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद देखरेख का टेंडर जारी कर विद्युत यांत्रिक विभाग (ईएमडी) की तरफ से एजेंसी को रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाती है। निगरानी की जिम्मेदारी सर्कल के वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और जेई (जूनियर इंजीनियर) की होती है। प्राधिकरण के जीएम आर. पी. सिंह ने कहा, “शहर में रास्तों के प्रकाश को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। इसके लिए तीनों सर्कल को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाते हैं। जहां भी समस्या या खराबी है उसे दूर करवाया जाएगा।” हालांकि स्थानीय निवासी और आरडब्ल्यूए नेताओं का कहना है कि दिए गए निर्देश और रिकॉर्ड मिलने के बावजूद जमीन पर समस्याएं जस की तस बरकरार हैं। कई स्थानों पर पोल टूटे हुए हैं, कुछ लैंप झुक गए हैं और कुछ जगहों पर पूरी तरह लाइट ही नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को रात के समय जोखिम और असुविधा का सामना करना पड़ता है।

निरीक्षण व अपेक्षित कार्रवाई

स्थानीय सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर खम्भे व फिटिंग की मरम्मत में समय लग रहा है, जबकि अन्य जगहों पर बिजली आपूर्ति या तारों के झण्ड-झान से जुड़े तकनीकी कारण भी उपस्थित हैं। नगरवासियों का दबाव बढ़ने और मीडिया रिपोर्टिंग के बाद अधिकारियों के द्वारा इन मुद्दों की प्राथमिकता सूची में शामिल करने की संभावना जताई जा रही है। शहरी निगरानी टीमों को निर्देश मिलते ही कई बिंदुओं पर आकस्मिक सर्वे और मरम्मत कार्य शुरू किए जाने की पहल का संकेत मिलता है, परन्तु फिलहाल व्यापक और त्वरित सुधार का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

नागरिक क्या चाहते हैं, स्थानीय निवासी कि मांग 

सर्विस रोड और अंडरपास पर फौरन कार्यरत लाइटें लगाई जाएँ। टूटी हुई पोल व फिटिंग की शीघ्र मरम्मत कराई जाए। अँधेरे वाले स्थलों का शॉर्ट-टर्म व लॉन्ग-टर्म रखरखाव प्लान सार्वजनिक किया जाए। पैदल मार्गों व चौराहों पर नियमित निगरानी व फॉलो-अप की व्यवस्था की जाए।नोएडा प्राधिकरण के दावों और निर्देशों के बावजूद सेक्टर-98 से सेक्टर-93 तक तथा भंगेल, सलारपुर और कई सर्विस रोड पर अँधेरा नागरिकों के सामने बड़ी चिंता बना हुआ है। हवाईअड्डे की तैयारी एवं अन्य स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बीच आधारभूत सुरक्षा—रात में सड़कों की रोशनी—पर भी सोचना आवश्यक है। जनप्रतिनिधियों और प्राधिकरण दोनों से निवासियों की तेज़ और पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद है ताकि शाम होते ही लोग सुरक्षित ढंग से घर जा सकें।

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