रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला, नौ मारे गए; लेबनान में इजराइल-हिजबुल्लाह के बीच आंशिक युद्धविराम लेकिन हमले जारी

वैश्विक स्तर पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। एक ओर रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, जिनमें नौ लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं, वहीं मध्य पूर्व में लेबनान ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच आंशिक युद्धविराम की घोषणा की है, लेकिन दक्षिणी लेबनान में हमले जारी हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष में नया मोड़

रूस ने मंगलवार तड़के यूक्रेन के प्रमुख शहरों किव, दिनिप्रो और खार्किव पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम नौ लोग मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए। किव में दो आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है। एक अस्पताल और गैस स्टेशन भी प्रभावित हुए। किव के मेयर विटाली क्लित्श्को ने बताया कि राजधानी में चार मौतें हुईं और 51 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रयासरत हैं। यूक्रेन ने हवा से मार गिराने वाले हथियारों से कई मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया, लेकिन हमले की तीव्रता ने रक्षा प्रणाली पर दबाव डाला। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन पश्चिमी सहयोगियों से अधिक हवाई सुरक्षा उपकरणों की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में बड़े हमलों की चेतावनी दी थी। रूस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन यह हमला युद्ध के चलते सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मध्य पूर्व में आंशिक शांति की उम्मीद

दूसरी ओर, लेबनान ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच आंशिक युद्धविराम की घोषणा की है। इस समझौते के तहत इजराइल बेरूत और उसके उपनगरों पर हमले नहीं करेगा, जबकि हिजबुल्लाह इजराइल पर हमले रोक देगा। लेबनान की वाशिंगटन दूतावास ने इसे सीमित डी-एस्केलेशन बताया, जो पूर्ण संघर्ष समाप्त नहीं करेगा। हालांकि, दक्षिणी लेबनान में लड़ाई जारी है। यह समझौता अमेरिकी प्रस्ताव पर आधारित है और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष, खासकर ईरान से जुड़े तनाव के बीच आया है। ईरान ने हाल ही में अमेरिकी हमलों के जवाब में कदम उठाए हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि दोनों क्षेत्रों में ये घटनाएं वैश्विक सुरक्षा को चुनौती दे रही हैं। यूक्रेन में रूसी आक्रमण ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति प्रभावित कर सकता है, जबकि मध्य पूर्व में अस्थिरता तेल बाजार को अस्थिर रखेगी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोनों स्थितियों पर नजर रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की जा रही है कि कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाएं ताकि इन संघर्षों को रोका जा सके।

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