राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मान सरोवर परिसर, आबूरोड में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन 2026 में देशभर से बड़ी संख्या में पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी शामिल हुए। ‘श्रेष्ठ विश्व के निर्माण के लिए सशक्त मीडिया’ विषय पर आयोजित इस महासम्मेलन में पत्रकारिता की भूमिका, मीडिया की जिम्मेदारियों और बदलते डिजिटल दौर में विश्वसनीय पत्रकारिता की जरूरत को लेकर व्यापक मंथन किया गया।
सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 1500 से अधिक मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया और पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में मीडिया और समाज के बीच संबंध, पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव तथा सकारात्मक पत्रकारिता जैसे विषय प्रमुख रहे।
डॉ. सरफराज सैफी को किया गया सम्मानित
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन के दौरान भारत न्यूज़ मीडिया ग्रुप के CEO एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. सरफराज सैफी को ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए पत्रकारों को संबोधित करते हुए पत्रकारिता की बदलती भूमिका और मौजूदा चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
डॉ. सरफराज सैफी ने कहा कि मीडिया का काम सिर्फ खबर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं है। पत्रकारिता की वास्तविक जिम्मेदारी खबर के पीछे छिपी सच्चाई को सामने लाने और समाज को सही दिशा देने की भी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार को खबर की गति के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता का भी ध्यान रखना चाहिए।


‘वायरल होना सच होने की गारंटी नहीं’
सोशल मीडिया के दौर में तेजी से फैलती सूचनाओं का जिक्र करते हुए डॉ. सैफी ने कहा कि आज कोई भी सूचना कुछ ही मिनटों में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकती है, लेकिन किसी सूचना का वायरल होना उसे सच साबित नहीं करता।
उन्होंने पत्रकारों से तथ्य जांचने और पुष्टि के बाद ही खबर प्रकाशित या प्रसारित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ खबर को सबसे पहले देने की नहीं, बल्कि सही खबर को विश्वसनीय तरीके से सामने रखने की है।
‘मीडिया की ताकत उसकी विश्वसनीयता में है’
डॉ. सरफराज सैफी ने कहा कि मीडिया की असली ताकत उसकी आवाज की ऊंचाई में नहीं बल्कि उसकी विश्वसनीयता में होती है। उन्होंने कहा कि टीआरपी, व्यूज और क्लिक की प्रतिस्पर्धा के बीच पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने पत्रकारिता में सनसनीखेज प्रस्तुति के बढ़ते चलन पर भी चिंता जताई और कहा कि मीडिया को प्रभाव पैदा करने के लिए तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से बचना चाहिए। पत्रकारिता जितनी निर्भीक हो, उतनी ही जिम्मेदार भी होनी चाहिए।
सकारात्मक पत्रकारिता पर दिया जोर
डॉ. सैफी ने सकारात्मक पत्रकारिता की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में अपराध, विवाद, राजनीतिक टकराव और नकारात्मक घटनाओं को जगह मिलना स्वाभाविक है, लेकिन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों और प्रयासों को भी प्रमुखता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काम केवल समस्या बताना नहीं है। यदि किसी समस्या को उजागर किया जा रहा है तो उसके समाधान की संभावनाओं पर भी चर्चा होनी चाहिए। ऐसी पत्रकारिता समाज को निराश करने के बजाय उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ विश्व के निर्माण में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आज ऐसी पत्रकारिता की जरूरत है जो तेज हो, लेकिन जल्दबाजी वाली न हो; निर्भीक हो, लेकिन गैर-जिम्मेदार न हो और प्रभावशाली हो, लेकिन सनसनीखेज न हो।
दो पुस्तकों का विमोचन भी किया
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन के दौरान डॉ. सरफराज सैफी ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के साथ उन्होंने पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
महासम्मेलन में पत्रकारों के अलावा बुद्धिजीवी वर्ग, प्रोफेसर और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी अपनी बात रखी। वक्ताओं ने मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक पत्रकारिता और समाज निर्माण में मीडिया की भूमिका को लेकर अपने विचार साझा किए।
बीके राजयोगिनी मोहिनी दीदी से विशेष मुलाकात
इस अवसर पर डॉ. सरफराज सैफी ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की प्रमुख बीके राजयोगिनी मोहिनी दीदी से भी विशेष मुलाकात की। दोनों के बीच विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। इस दौरान संस्था से जुड़े सामाजिक, आध्यात्मिक और देश-दुनिया से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई।
मुलाकात के दौरान ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में संस्था से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
बीके करुणा भाई ने की सरफराज सैफी की सराहना
ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के मीडिया विंग के चेयरमैन राजयोगी बीके करुणा भाई ने भी डॉ. सरफराज सैफी की पत्रकारिता और उनके विचारों की सराहना की। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी भूमिका और प्रयासों की तारीफ करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए पत्रकारों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। अलग-अलग मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने मौजूदा दौर में पत्रकारिता के सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।
देश-दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं ब्रह्माकुमारीज़ के लोग
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था से जुड़े लोग भी शामिल हुए। संस्था की ओर से बताया गया कि देश और दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग ब्रह्माकुमारीज़ के कार्यक्रमों और गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
सम्मेलन में मीडिया और समाज के बीच सकारात्मक संवाद को मजबूत करने तथा पत्रकारिता को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पत्रकारिता को लेकर देशभर के मीडियाकर्मियों ने किया मंथन
पांच दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा हुई। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के विस्तार ने जहां खबरों की पहुंच को तेज किया है, वहीं फेक न्यूज, अधूरी जानकारी, बिना सत्यापन के खबरों के प्रसार और क्लिक आधारित पत्रकारिता जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं।
ऐसे समय में सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता को बनाए रखना सबसे जरूरी है। पत्रकार को तकनीक के साथ कदमताल करते हुए भी तथ्यों, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल सिद्धांतों को नहीं छोड़ना चाहिए।
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन 2026 में डॉ. सरफराज सैफी का सम्मान और उनका संबोधन इसी व्यापक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे खबर की तेज रफ्तार के बीच सत्य और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक जिम्मेदार मीडिया ही समाज में सकारात्मक बदलाव का मजबूत माध्यम बन सकता है।

