नोएडा। नोएडा में अपना घर खरीदना लाखों लोगों का सपना है। लेकिन सस्ता फ्लैट देखकर तुरंत बुकिंग करना कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी आर्थिक भूल साबित हो सकता है। खासकर उन इलाकों में जहां जमीन के स्वामित्व, भू-उपयोग, नक्शे की स्वीकृति और निर्माण की वैधता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नोएडा के हाजीपुर, भंगेल, सलारपुर और बरौला जैसे इलाकों में कई जगह बड़े बिल्डरों और अधिकृत परियोजनाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर फ्लैट मिलने का दावा किया जाता है। यही सस्ती कीमत खरीदारों को आकर्षित करती है, लेकिन खरीदारी से पहले दस्तावेजों की जांच नहीं की गई तो यही सौदा भारी पड़ सकता है।
सस्ता फ्लैट देखकर न करें जल्दबाजी
नोएडा में जमीन की कीमत लगातार बढ़ने के कारण आम आदमी के लिए अधिकृत सोसाइटी में फ्लैट खरीदना आसान नहीं है। इसी वजह से जब किसी इलाके में बाजार भाव से काफी कम कीमत पर फ्लैट या प्लॉट उपलब्ध कराया जाता है तो खरीदार आकर्षित हो जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर वही फ्लैट इतना सस्ता क्यों है?
कई मामलों में कम कीमत का कारण जमीन की स्थिति, निर्माण की अनुमति, परियोजना की स्वीकृति, भू-उपयोग या अन्य कानूनी अड़चनें हो सकती हैं। इसलिए केवल कीमत देखकर घर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
हाजीपुर से भंगेल तक निर्माण को लेकर सवाल
नोएडा के पुराने गांवों और उनके आसपास तेजी से हुए शहरीकरण ने जमीन को सोने की तरह महंगा बना दिया है। हाजीपुर, भंगेल, सलारपुर और बरौला जैसे इलाकों में पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में आवासीय निर्माण हुए हैं।
इन क्षेत्रों में कहीं छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं तो कहीं ऐसे निर्माण दिखाई देते हैं जिनकी वैधता को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि कुछ लोगों ने जमीन की वास्तविक स्थिति बताए बिना खरीदारों को फ्लैट बेच दिए।
हालांकि किसी खास इमारत या परियोजना को अवैध कहना तभी उचित होगा जब संबंधित प्राधिकरण या सक्षम कानूनी प्रक्रिया में उसकी स्थिति स्पष्ट हो। इसलिए खरीदारों के लिए सबसे जरूरी है कि वे प्राधिकरण और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से वास्तविक स्थिति की पुष्टि करें।
भू-माफिया के जाल में फंसने का खतरा
इन इलाकों में सबसे बड़ी चिंता कथित जमीन कारोबार को लेकर है। आरोप लगते रहे हैं कि कुछ जमीन कारोबारी और बिल्डर जमीन की पूरी कानूनी स्थिति खरीदारों को स्पष्ट किए बिना उसे आवासीय इस्तेमाल के लिए बेचते हैं।
कई बार खरीदार को यह बताया जाता है कि जमीन पूरी तरह साफ है, नक्शा पास है और निर्माण में कोई समस्या नहीं होगी। खरीदार भी इन दावों पर भरोसा करके अपनी जमा पूंजी लगा देता है।
लेकिन बाद में यदि जमीन के स्वामित्व, भू-उपयोग या निर्माण की अनुमति को लेकर विवाद सामने आता है तो खरीदार के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
बुलडोजर चला तो किसका नुकसान?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी निर्माण को प्राधिकरण नियमों के विपरीत पाता है और उसके खिलाफ कार्रवाई होती है तो वहां रहने वाले आम खरीदारों का क्या होगा?
जिस व्यक्ति ने 20-30 लाख, 40-50 लाख या उससे भी अधिक रुपये खर्च करके फ्लैट खरीदा है, उसके लिए घर केवल एक संपत्ति नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई होती है। ऐसे में यदि निर्माण कानूनी विवाद में फंसता है या कार्रवाई की स्थिति बनती है तो आर्थिक नुकसान का सबसे बड़ा असर उस परिवार पर पड़ सकता है जिसने शायद अपनी पूरी बचत इसी घर में लगा दी हो।
इसीलिए फ्लैट खरीदने से पहले केवल बिल्डर की बात पर भरोसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
खरीदार इन दस्तावेजों की जरूर करें जांच
किसी भी संदिग्ध या कम कीमत वाली परियोजना में फ्लैट खरीदने से पहले खरीदार को कम से कम जमीन और निर्माण से जुड़े मूल दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
जमीन का मालिक कौन है? इसका राजस्व रिकॉर्ड से सत्यापन करें।
भू-उपयोग क्या है? यह जांचना जरूरी है कि जमीन पर आवासीय निर्माण की अनुमति है या नहीं।
बिल्डिंग प्लान स्वीकृत है या नहीं? केवल बिल्डर द्वारा दिखाया गया नक्शा पर्याप्त नहीं है।
प्राधिकरण की अनुमति क्या है? संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि करें।
RERA में परियोजना दर्ज है या नहीं? जहां लागू हो, परियोजना की RERA स्थिति जरूर जांचें।
कंप्लीशन और ऑक्युपेंसी की स्थिति क्या है? केवल तैयार इमारत देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि सभी वैधानिक अनुमतियां मिल चुकी हैं।
जमीन पर कोई मुकदमा या विवाद तो नहीं? राजस्व और न्यायिक रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण है।
सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से जमीन सुरक्षित नहीं हो जाती
कई खरीदार यह मान लेते हैं कि यदि उनके नाम रजिस्ट्री हो गई है तो संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन जमीन की रजिस्ट्री और उस पर किए गए निर्माण की वैधता दो अलग-अलग विषय हो सकते हैं।
किसी जमीन का हस्तांतरण हो जाना अपने आप यह प्रमाणित नहीं करता कि उस पर बहुमंजिला आवासीय निर्माण की सभी आवश्यक मंजूरियां मौजूद हैं। इसलिए खरीदार को जमीन के साथ-साथ निर्माण की वैधता भी जांचनी चाहिए।
सस्ता घर या जीवनभर का जोखिम?
हाजीपुर, भंगेल, सलारपुर और बरौला जैसे इलाकों में कम कीमत पर घर मिलने की वजह से खरीदारों की दिलचस्पी बनी हुई है। लेकिन यहां सबसे जरूरी सवाल कीमत नहीं, बल्कि कानूनी सुरक्षा है।
यदि कोई फ्लैट बाजार से असामान्य रूप से सस्ता मिल रहा है तो खरीदार को यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि आखिर वह इतना सस्ता क्यों है। अगर जवाब दस्तावेजों में नहीं मिलता और केवल बिल्डर या ब्रोकर की मौखिक गारंटी दी जा रही है तो सावधान होने की जरूरत है।
नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
हाजीपुर में हालिया कार्रवाई के बाद अब नोएडा के उन क्षेत्रों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है जहां वर्षों से बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ है। यदि प्राधिकरण आने वाले समय में व्यापक स्तर पर भूमि और भवनों की जांच करता है तो कई ऐसे निर्माण भी जांच के दायरे में आ सकते हैं जिनकी वैधता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों की है जिन्होंने बिना दस्तावेजों की पूरी जांच किए फ्लैट खरीद लिए हैं।
घर खरीदना जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश हो सकता है, इसलिए केवल सस्ता देखकर घर खरीदना समझदारी नहीं है। हाजीपुर, भंगेल, सलारपुर और बरौला जैसे क्षेत्रों में फ्लैट खरीदने से पहले जमीन, नक्शा, भू-उपयोग, प्राधिकरण की अनुमति और जहां लागू हो वहां RERA रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराना जरूरी है। वरना जिस आशियाने को जीवनभर की कमाई से खरीदने का सपना देखा है, वही भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।

