“जय हिन्द जनाब डिजिटल” की ग्राउंड रिपोर्ट: बॉटनिकल गार्डन से जेवर तक का पहला हफ्ता उम्मीदें भी, खामियाँ भी
उत्तर प्रदेश सरकार की नई इलेक्ट्रिक बस सेवा के पहले हफ्ते की जमीनी हकीकत जानने के लिए जब “जय हिन्द जनाब डिजिटल” की टीम ने खुद जेवर एयरपोर्ट से बॉटनिकल गार्डन तक का सफर किया, तो एसी बसों की ठंडक और किफायती किराए के साथ-साथ ऑटो माफिया की दादागिरी, अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्रियों में जानकारी की कमी जैसी कड़वी सच्चाइयाँ भी सामने आईं।
शुरुआत: योगी की हरी झंडी, 100 बसों की रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 12 जून को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र से जेवर एयरपोर्ट तक के लिए 45 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई। इसी अवसर पर 3 हाइड्रोजन बसों को भी रवाना किया गया और नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का शुभारंभ भी हुआ। 15 जून से 100 इलेक्ट्रिक सिटी बसों का नियमित संचालन शुरू हो गया। पहले चरण में 100 ई-बसों में 10 डबल-डेकर बसें भी शामिल हैं। यह सेवा नोएडा प्राधिकरण और UPSRTC के आपसी समन्वय से संचालित हो रही है। सीएम योगी ने कहा कि मांग के अनुरूप क्रमिक बढ़ोतरी करते हुए भविष्य में तीनों प्राधिकरणों के माध्यम से 500 बसों का संचालन किया जाएगा।
रूट और किराया: सस्ता सफर, पर रास्ता पेचीदा
इस सेवा के लिए 5 रूट तय किए गए हैं जिनमें सबसे अहम है सेक्टर-90 डिपो और बॉटनिकल गार्डन से सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर तक का रूट। इसके अलावा परी चौक, गौर सिटी, सूरजपुर और ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इलाकों को भी जोड़ा गया है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किराया बेहद किफायती रखा गया है न्यूनतम ₹20, मध्यम दूरी के लिए ₹30 और अधिकतम ₹50। यानी जहाँ कैब से जेवर जाने पर ₹800 से ₹1,400 तक खर्च होते हैं, वहीं ई-बस में महज ₹50 में एसी का मजा लेते हुए एयरपोर्ट तक पहुँचा जा सकता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: बस में सवार हुई “जय हिन्द जनाब डिजिटल” की टीम
जब हमारी टीम ने कंडक्टर आशिस पांडे और ड्राइवर शुभम् गुप्ता के साथ जेवर एयरपोर्ट से बॉटनिकल गार्डन तक का सफर किया, तो रास्तेभर कई दिलचस्प और चिंताजनक पहलू सामने आए।
ऑटो माफिया की दादागिरी: कंडक्टर आशिस पांडे ने बताया कि ऑटो वालों की तरफ से लगातार परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं। रूट पर ऑटो चालक जानबूझकर बस स्टॉपेज के पास खड़े होकर यात्रियों को बस से पहले ही उठाने की कोशिश करते हैं। यह समस्या नई नहीं है — यात्रियों ने बताया कि नोएडा में एक मूर्ति-चार मूर्ति के बीच पहले भी सरकारी बसें चलती थीं, लेकिन ऑटो माफिया के दबाव और अव्यवस्था के चलते वे बंद हो गई थीं।
एक महिला यात्री की आवाज: बस में सफर कर रहीं एक महिला यात्री ने खुलकर कहा — “ये बस योगी जी ने चलाई है, ये नहीं बंद होगी।” उनका इशारा साफ था कि पिछली सरकारों में शुरू की गई सेवाएँ टिक नहीं पाई थीं, लेकिन इस बार उन्हें उम्मीद है।
जानकारी की भारी कमी: पूरे सफर में एक बात बार-बार महसूस हुई — यात्रियों को इस बस सेवा के रूट, स्टॉपेज और समय-सारणी की पर्याप्त जानकारी नहीं है। कई लोग बस स्टॉप पर खड़े होकर यह तय नहीं कर पा रहे थे कि यह बस उनके गंतव्य तक जाएगी या नहीं।
समय की समस्या: सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि बसें तय अंतराल से अधिक देर से आ रही हैं। दावा था हर 15-30 मिनट पर बस मिलेगी, लेकिन जमीन पर यह नियमितता अभी नहीं बन पाई है।
जमीनी खामियाँ: तस्वीर का दूसरा पहलू
पहले दिन की कमज़ोरी: 15 जून को लखनऊ एयरपोर्ट से इंडिगो की पहली फ्लाइट जेवर पर लैंड हुई, लेकिन उस दिन जमीनी स्तर पर बसों की भारी कमी दिखी। यात्रियों को बसें न मिलने के कारण कैब का इंतजार करना पड़ा।
एक्सप्रेसवे पर उतारना: जेवर के स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि बसें मुख्य कस्बे या गाँवों के भीतर नहीं जाती — यात्रियों को यमुना एक्सप्रेसवे पर ही उतार दिया जाता है, जहाँ न छाँव है, न शेल्टर।
बस स्टैंड नदारद: जेवर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में अभी तक कोई व्यवस्थित बस स्टेशन नहीं बना है, जिससे खुले एक्सप्रेसवे पर चढ़ने-उतरने में जान का खतरा बना रहता है।
स्टाफ क्या कहता है?
ड्राइवर शुभम् गुप्ता और कंडक्टर आशिस पांडे ने बताया कि सेक्टर-90 डिपो में हाई-टेक फास्ट चार्जिंग की व्यवस्था है जहाँ बसें 2 घंटे में फुल चार्ज हो जाती हैं। लंबे रूट पर बाधा नहीं आती। दोनों का मानना है कि रूट बिल्कुल नया होने के कारण शुरुआती दिक्कतें स्वाभाविक हैं। बस संचालन के पहले चरण में ड्राइवरों और कंडक्टरों सहित करीब 300 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। स्टाफ को भरोसा है कि जैसे-जैसे यात्री संख्या बढ़ेगी और समय-सारणी पक्की होगी, स्थिति सुधरेगी।
आगे क्या?
आने वाले समय में एक्वा लाइन मेट्रो और नमो भारत ट्रेन का विस्तार भी सीधे जेवर एयरपोर्ट तक किया जाएगा। Newsnation नोएडा प्राधिकरण का अनुमान है कि इस नई बस सेवा से करीब 2 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और नोएडा में ट्रैफिक व प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष: वक्त ही बताएगा
जय हिन्द जनाब डिजिटल की इस ग्राउंड रिपोर्ट का सार यही है कि ₹50 में एसी ई-बस से एयरपोर्ट पहुँचने का सपना साकार तो हुआ है, लेकिन अभी यह सेवा “नवजात शिशु” की तरह है जिसे अभी ऑटो माफिया, अधूरे स्टॉपेज, अनियमित समय और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियों से लड़ना है। जैसा कि बस में सफर करती उस महिला यात्री ने कहा “ये बंद नहीं होगी।” और जैसा कि कंडक्टर आशिस पांडे और ड्राइवर शुभम् गुप्ता ने उम्मीद जताई “दिन बीतेंगे तो सब ठीक होगा।” अब देखना यह है कि सरकारी इरादे और जमीनी हकीकत के बीच की यह दूरी कब और कैसे पटती है। आना वक्त ही बताएगा।
रिपोर्ट: जय हिन्द जनाब डिजिटल | प्रकाशन तिथि: 18 जून 2026

