जेवर एयरपोर्ट: तीसरे चरण में 8,600 करोड़ का मुआवजा बंटना शुरू, हाई कोर्ट से मिली अधिग्रहण को मंजूरी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तीसरे चरण के विस्तार को लेकर भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन ने जेवर तहसील के 14 गांवों के किसानों के बैंक खातों में सीधे मुआवजा राशि ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है, और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी अधिग्रहण प्रक्रिया पर मुहर लगाते हुए किसानों की आपत्तियां खारिज कर दी हैं।

14 गांवों की जमीन, हजारों किसान प्रभावित

तीसरे चरण में थोरा, नीमका शाहजहांपुर, ख्वाजपुर, रनहेरा, किशोरपुर, बनवारीबांस, पारोही, मुकिमपुर शिवारा, जेवर बंगर, साबौता मुस्तफाबाद, अहमदपुर चौरौली, दयानतपुर, बंकापुर और रोही — इन 14 गांवों की लगभग 1857.8871 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इस अधिग्रहण से 14 गांवों के लगभग 15 हजार किसान प्रभावित हो रहे हैं। दस्तावेज जमा कराने और सत्यापन के लिए प्रशासन ने इन्हीं गांवों में कैंप लगाए, जहां किसानों के मुआवजे संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए। 

मुआवजे का गणित: 8,600 करोड़ का लक्ष्य, आधे से ज्यादा बंट चुका

मुआवजे को लेकर सबसे ताजा और पुष्ट आंकड़ा यह है कि तीसरे चरण के एवज में कुल 8600 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जाना है। मई 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों को अप्रैल तक लगभग 2500 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका था, और अधिकारियों ने जून तक मुआवजा बांटने का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जहां तक दर का सवाल है, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में सामने आया कि किसानों को दी जाने वाली मुआवजे की दरें 4,772 रुपये से लेकर 4,778 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक तय की गई हैं। 

हाई कोर्ट ने भी ठोकी मुहर

अधिग्रहण को चुनौती दे रहे किसानों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की बेंच ने 1,858 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को सही ठहराते हुए किसानों की सभी आपत्तियां खारिज कर दीं। कोर्ट ने पाया कि प्रभावित परिवारों में से 73.02 प्रतिशत लोगों ने अधिग्रहण के लिए अपनी सहमति दे दी थी, जो अनिवार्य 70 प्रतिशत सीमा से ज्यादा है। हालांकि कोर्ट ने किसानों को एक अहम राहत भी दी। आदेश में स्पष्ट किया गया कि आबादी (रिहाइशी इलाके) का कब्जा तभी लिया जाएगा जब पुनर्वास स्थल पूरी तरह विकसित हो जाए, और इन शर्तों का उल्लंघन होने पर इसे अदालत के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। पुनर्वास योजना के तहत प्रभावित परिवारों को विकसित आवासीय भूखंड, पांच लाख रुपये की एकमुश्त राशि और कमजोर समूहों के लिए विशेष अतिरिक्त प्रावधान दिए जा रहे हैं। 

बड़ी तस्वीर: देश का सबसे बड़ा भूमि अधिग्रहण

जेवर एयरपोर्ट परियोजना को कुल मिलाकर भारत के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहणों में गिना जा रहा है। पूरी परियोजना में कुल 5,428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण और लगभग 18 गांवों के 25,000 किसानों का विस्थापन शामिल है। इसमें से 4,752 हेक्टेयर पांच रनवे के निर्माण के लिए और 676 हेक्टेयर विस्थापन व पुनर्वास के लिए निर्धारित है। 

आगे क्या

प्रशासन का लक्ष्य जून 2026 तक तीसरे चरण का पूरा मुआवजा वितरित कर देना है, जिसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा। पुनर्वास स्थलों के पूरी तरह तैयार होने तक किसानों के मौजूदा घरों पर कब्जा न लेने की हाई कोर्ट की शर्त प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।

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