नोएडा में औद्योगिक अशांतिः गौतमबुद्ध नगर पुलिस की विफलता या सोची-समझी साजिश?

नोएडा के फेज-2, सेक्टर-60, 62 और होजरी कॉम्प्लेक्स जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र सोमवार को बवाल के मैदान में तब्दील हो गए। करीब 50,000 श्रमिकों ने वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भीड़ उग्र हो गई और देखते ही देखते 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की गई। इस दौरान उपद्रवियों ने 20 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिसमें पुलिस की गाड़ियाँ भी शामिल थीं।

3,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
उद्यमियों के अनुसार, इस हिंसा में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है। पुलिस की नाकामी के 3 मुख्य बिंदु हो सकते है। विभिन्न रिपोर्ट्स और जानकारों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर पुलिस इस स्थिति को भांपने में पूरी तरह विफल रही। इंटेलिजेंस (खुफिया विभाग) की सुस्ती दूसरा कारण हो सकता है। श्रमिकों ने शुक्रवार को ही चेतावनी दी थी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सोमवार को बड़ा आंदोलन होगा। इसके बावजूद पुलिस का खुफिया तंत्र यह पता नहीं लगा सका कि इतनी भारी संख्या में मजदूर एकजुट होकर हिंसक रुख अपना सकते हैं। मजदूरों तक सही सूचना का अभाव भी बताया जा रहा है। कई फैक्टरियों ने मजदूरों की मांगें मान ली थीं, लेकिन पुलिस और प्रशासन इस संदेश को समय रहते मजदूरों तक पहुँचाने में विफल रहे। इसी संचार अंतराल का फायदा उपद्रवियों ने उठाया।भीड़ प्रबंधन में देरीरू जब हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर जमा होने शुरू हुए, तब शुरुआती दौर में पुलिस की मौजूदगी नगण्य थी। जब तक भारी पुलिस बल और आरपीएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) को तैनात किया गया, तब तक उपद्रवी काफी नुकसान कर चुके थे। भ्रामक सूचनाओं और बाहरी तत्वों का प्रभाव पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं ने आग में घी का काम किया। हरियाणा में न्यूनतम वेतन बढ़ने की खबर के बाद नोएडा के मजदूरों में असंतोष था, जिसे कुछ असामाजिक तत्वों ने उकसावे में बदल दिया। पुलिस का दावा है कि हिंसा में कुछ बाहरी जिलों के लोग भी शामिल थे, जो माहौल बिगाड़ने के इरादे से आए थे।

अब तक की कार्रवाई गिरफ्तारी
पुलिस ने अब तक 396 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में 7 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। उपद्रवियों की पहचान के लिए 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि पुलिस ने शनिवार की चेतावनी को गंभीरता से लिया होता और औद्योगिक क्षेत्रों में समय रहते सुरक्षा बढ़ा दी होती, तो करोड़ों के इस नुकसान और शहर में पैदा हुए डर के माहौल को टाला जा सकता था। उद्यमियों का आरोप है कि जिस वक्त उनकी फेक्टरी में तोड़फोड़ हो रही थी उस वक्त पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

 

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