जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के महिला हॉकी फाइनल में भारत ने शुक्रवार को डिफेंडिंग चैंपियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 1-0 से हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया। यह भारत का 1982 के बाद पहला एशियन गेम्स महिला हॉकी स्वर्ण है और टीम की कुल दूसरी स्वर्ण पदक उपलब्धि। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया।
मैच का निर्णायक पल पहले क्वार्टर के 10वें मिनट में आया। सक्षी की सटीक पास पर लालरेमसियामी ने घूमकर शक्तिशाली टोमहॉक शॉट लगाया, जो चीनी गोलकीपर के ऊपर से जाकर नेट में समा गया। यह लालरेमसियामी का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था और उनके करियर का यादगार क्षण साबित हुआ। इसके बाद भारत को बचाव पर ज्यादा ध्यान देना पड़ा। दूसरे क्वार्टर में चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने झांग यिंग के शॉट को बाईं ओर गोता लगाकर शानदार तरीके से बचा लिया। यह सेव मैच की सबसे महत्वपूर्ण घटना साबित हुई।
भारत की डिफेंस ने बाकी मैच में चीनी हमलों को विफल रखा। नवनीत कौर का पेनल्टी कॉर्नर प्रयास पोस्ट के पास से निकल गया, जबकि सलीमा तेते के काउंटर-अटैक में मौका गंवा दिया गया। अंत में हूटर बजते ही भारतीय खिलाड़ी खुशी से झूम उठे। यह जीत 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में चीन से 4-0 की सेमीफाइनल हार का बदला भी थी। इससे पहले टीम ने विश्व कप में चीन के खिलाफ 2-2 ड्रॉ खेला था। 1982 में नई दिल्ली में एलिजा नेल्सन की कप्तानी में जीता गया स्वर्ण पदक अब तक का एकमात्र था। 1998 और 2018 में भारत फाइनल में पहुंचा लेकिन रजत पर ही संतोष करना पड़ा।
यह जीत शुक्रवार को भारतीय दल का छठा स्वर्ण पदक था, जिससे देश का कुल स्वर्ण पदक तालिका 16 तक पहुंच गया। टीम की इस उपलब्धि ने न केवल एशियाई हॉकी में भारत की वापसी को चिह्नित किया बल्कि ओलंपिक की राह भी आसान बना दी। खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और देशभर के प्रशंसकों के लिए यह लंबे इंतजार के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता है।
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